राष्ट्रीय कवि संगम रेवाड़ी ने जगदीश मित्तल के निधन पर आयोजित की श्रद्धांजलि सभा

राष्ट्रीय कवि संगम, रेवाड़ी के तत्त्वावधान में आज जिला मुख्यालय स्थित बाल भवन में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल के असामयिक निधन पर शोक-सभा आयोजित की गई। यह श्रद्धांजलि सभा जगदीश मित्तल की आत्मिक शांति हेतु आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम का आयोजन अटल हिन्द के लिए मनोज गोयल द्वारा रेवाड़ी में 4 सितंबर को किया गया।
वरिष्ठ रचनाकार एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रमेशचंद्र शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित शोकसभा में दो मिनट के मौन के साथ दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। प्रो. शर्मा ने कहा कि 57 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे, राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय जगदीश मित्तल जी का असमय जाना समाज, राष्ट्र, साहित्य एवं संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है।
साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि
संस्कृति लेखक तथा वरिष्ठ साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया ने जगदीश मित्तल जी को भारतीय संस्कृति के पर्याय, कविता के स्थापित एवं नवोदय रचनाकारों के सेतु, राष्ट्रीयता के पक्षधर, पोषक व सजग प्रहरी बताया। उन्होंने मित्तल जी को अपना समूचा जीवन राष्ट्र एवं समाज की सेवा में समर्पित करने वाले राष्ट्रीय सांस्कृतिक जागृति का अग्रदूत बताया। संगम के जिला अध्यक्ष डॉ. मुकुट अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम को राष्ट्रीय, प्रादेशिक तथा जिला स्तर पर उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिर स्थाई एवं प्रेरणापुंज बनाने के उद्देश्य से एक नवाचारी साहित्यिक रोड मैप तैयार करके कार्य करना होगा, और यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति
बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद के अध्यक्ष ऋषि सिंहल ने कहा कि उनके जाने से साहित्य जगत ने एक संवेदनशील साहित्य-साधक, मार्गदर्शक और प्रेरणादायी व्यक्तित्व खो दिया है। संगम के महामंत्री अरुण गुप्ता 'अजेय' ने कहा कि उनका स्नेह, सरलता, साहित्य के प्रति समर्पण और उनका मार्गदर्शन हम सभी के हृदय में सदैव जीवित रहेगा। रेजांगला शौर्य समिति के अध्यक्ष नरेश चौहान राष्ट्रपूत ने कहा कि मित्तल जी का जाना साहित्य व समाज सेवा के क्षेत्र में ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भर पाना संभव नहीं है और ऐसा लगता है जैसे असमय सूर्यास्त हो गया है। इस अवसर पर संगम उपाध्यक्ष डॉ. कविता गुप्ता, राजेश भुलक्कड़, अजय यादव, सुनील कुमार, कैलाश भारद्वाज, तेजभान कुकरेजा, नरेंद्र जोशी, मनोज कौशिक, हरिप्रसाद, गोपाल वशिष्ठ, हिम्मत सिंह, ओमप्रकाश गुप्ता, त्रिभुवन भटनागर आदि साहित्यकार तथा राष्ट्रीय कवि संगम, रेवाड़ी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।