जयपुर बगरू में CJP टीम का विरोध, आशुतोष रांका से मारपीट

Atal Hind Team Online22 August 202610 min read51 viewsराजस्थान
जयपुर बगरू में CJP टीम का विरोध, आशुतोष रांका से मारपीट

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका रामपुरा कंवरपुरा स्कूल आने वाले हैं। इससे पहले कुछ लोग यहां इकट्ठा होकर उनका और पार्टी का विरोध कर रहे हैं। विरोध किस बात का कर रहे हैं, यह बात साफ नहीं है। पार्टी का विरोध है, व्यक्ति का विरोध है, स्कूल बनने देने का विरोध है।

दिनेश जांगिड़ /जयपुर /21 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

जयपुर के बगरू इलाके में सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर शुक्रवार को विवाद सामने आया। रामपुरा-कंवरपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और धक्का-मुक्की के बाद मारपीट तथा पथराव के आरोप सामने आए।

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CJP की ओर से कहा गया कि टीम सरकारी स्कूल की वास्तविक स्थिति देखने और वहां पढ़ रहे बच्चों की समस्याओं को समझने के लिए पहुंची थी। CJP के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौके पर पहुंचे थे। दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों और भाजपा समर्थकों की ओर से आरोप लगाया गया कि बाहरी लोग गांव के स्कूल के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने के लिए पहुंचे थे।

घटना से जुड़े सामने आए वीडियो में कुछ लोगों को एक वाहन की ओर जाते और उसके पीछे दौड़ते हुए देखा जा सकता है। अलग-अलग रिपोर्टों में इस घटना को लेकर मारपीट और पथराव की बात कही गई है। हालांकि, घटना में शामिल हर व्यक्ति की पहचान और उसकी राजनीतिक संबद्धता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती है।

स्कूल के निरीक्षण को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामला बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक CJP की 'स्कूल ठीक करो' मुहिम के तहत टीम सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने के लिए अलग-अलग जगहों पर जा रही है। इसी क्रम में टीम ने इस स्कूल का जायजा लेने की कोशिश की थी।

यह CJP टीम के सदस्य है…जो स्कूल निरीक्षण करने आशुतोष रांका के साथ गए थे…जो स्कूल भैंस के तबेले में चल रही थी…इस मारपीट में हाथ में बड़ा फ्रेक्चर हुआ है…SMS अस्पताल में इसका इलाज जारी है…जो भी इस घटना में मारपीट का समर्थन कर रहें है वो राजस्थान की सस्कृति का अपमान कर रहें है।

इस तरह की संस्कृति कतई अस्वीकार्य है…जिम्मेदारों से निवेदन है आंख ना बंद करें इस घटना के दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो।

CJP का कहना है कि स्कूल की इमारत लंबे समय से खराब स्थिति में है और बच्चों को मुख्य भवन के बजाय दूसरी जगह पढ़ाया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को टीनशेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। CJP ने इसी व्यवस्था को लेकर स्कूल का निरीक्षण करने की बात कही।

वहीं स्थानीय ग्रामीणों का पक्ष इससे अलग है। उनका कहना है कि स्कूल भवन की मरम्मत और सुधार के लिए सरकार की ओर से करीब 12.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि वे स्थानीय स्तर पर स्कूल की व्यवस्था ठीक कराने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

गांव के रास्ते पर भी विरोध

रिपोर्टों के अनुसार CJP टीम के पहुंचने से पहले ही गांव में विरोध का माहौल बन गया था। ग्रामीण स्कूल के बाहर जमा हुए और टीम के आने का विरोध किया। कुछ रिपोर्टों में मुख्य रास्ते पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी किए जाने और वाहनों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई है।

इसके बाद CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच बहस और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ने पर टीम को वापस लौटना पड़ा। कुछ मीडिया रिपोर्टों में वाहनों पर पथराव और शीशे टूटने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की अलग-अलग स्तर पर पुष्टि की आवश्यकता है।

CJP की तरफ से इस घटना को गंभीर बताया गया है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को स्कूल का निरीक्षण करने से रोकने के लिए हिंसा का सहारा लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के पीछे भाजपा से जुड़े लोग थे। दूसरी ओर स्थानीय लोगों और भाजपा समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गांव के लोग स्कूल के मुद्दे को राजनीतिक विवाद नहीं बनाना चाहते।

आशुतोष रांका ने क्या आरोप लगाए?

घटना के बाद आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि टीम के साथ मारपीट की गई और पत्थर फेंके गए। उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।

रांका के अनुसार, उनकी टीम को पुलिस से मदद की जरूरत थी, लेकिन उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि यह उनका मुद्दा है और पुलिस इसमें नहीं पड़ेगी। पुलिस की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। बाद में रांका ने घटना को सुनियोजित बताते हुए इसके लिए राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि हमला उनके निर्देश पर हुआ। यह एक राजनीतिक आरोप है और उपलब्ध रिपोर्टों में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि रांका के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

CJP ने घटना के बाद राजस्थान सरकार से कार्रवाई की मांग भी की है। पार्टी की ओर से 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

CJP कार्यकर्ता शिवांगी शर्मा का आरोप

CJP कार्यकर्ता शिवांगी शर्मा ने भी घटना को लेकर अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि टीम के सदस्यों को 'आतंकवादी', 'नक्सली' और दूसरे आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित किया गया। उनका कहना था कि टीम का उद्देश्य सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की स्थिति को देखना था।

शिवांगी शर्मा ने सवाल उठाया कि अगर कोई संगठन बच्चों की शिक्षा और स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की बात करता है तो उसे गांव में जाने से क्यों रोका जाना चाहिए। उनके मुताबिक बच्चों की पढ़ाई और सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है।

इस बयान के बाद विवाद का दायरा केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठने लगा कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं की जानकारी लेने के लिए सामाजिक या राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका क्या होनी चाहिए।

ग्रामीणों और भाजपा समर्थकों का अलग पक्ष

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव का स्कूल उनका स्थानीय मुद्दा है और इसके समाधान के लिए सरकार से धन स्वीकृत हो चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल की मरम्मत के लिए करीब 12.50 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है और गांव के लोग चाहते हैं कि काम जल्द शुरू हो।

ग्रामीणों की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि CJP की टीम स्कूल की समस्या को राजनीतिक मुद्दा बनाने के उद्देश्य से पहुंची थी। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और स्कूल परिसर को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए।

यही बात राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान में भी सामने आई। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए और स्कूलों के शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की स्कूलों में गतिविधियों को लेकर आपत्ति जताई।

सरकारी स्कूल की स्थिति पर भी सवाल

इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्कूल की वास्तविक स्थिति है। CJP का दावा है कि स्कूल भवन की हालत खराब है और बच्चों को वैकल्पिक जगह पर पढ़ना पड़ रहा है। कुछ रिपोर्टों में टीनशेड और पशुओं के बाड़े के पास बच्चों के पढ़ने की बात कही गई है।

अगर स्कूल भवन वास्तव में जर्जर है और बच्चों को वैकल्पिक जगह पर पढ़ाना पड़ रहा है तो यह शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल है। दूसरी तरफ यदि सरकार ने मरम्मत के लिए धन स्वीकृत कर दिया है तो अगला सवाल यह है कि काम कब शुरू होगा और बच्चों को स्थायी भवन कब मिलेगा।

यानी विवाद चाहे राजनीतिक हो या स्थानीय, मूल मुद्दा बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की स्थिति ही है। इस मुद्दे का समाधान आरोप-प्रत्यारोप के बजाय स्कूल भवन, स्वीकृत राशि और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति सामने रखकर किया जा सकता है।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की एंट्री को लेकर पहले से विवाद

यह घटना ऐसे समय हुई है जब राजस्थान में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियो बनाने को लेकर पहले से बहस चल रही है। हाल ही में राज्य में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की गतिविधियों को लेकर दिशा-निर्देशों की खबर सामने आई थी।

CJP ने इन प्रतिबंधों का विरोध किया था। संगठन का कहना है कि यदि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है तो उसका निरीक्षण और जानकारी सामने आना जरूरी है। दूसरी तरफ सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

इस वजह से बगरू की घटना को केवल स्थानीय विवाद के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। यह घटना सरकारी स्कूलों की निगरानी, राजनीतिक संगठनों की भूमिका और स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर चल रही बड़ी बहस से भी जुड़ गई है।

CJP के 'स्कूल ठीक करो'

CJP ने हाल में 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में मौजूद बुनियादी समस्याओं को सामने लाना है। इनमें खराब भवन, पानी, शौचालय, सफाई, खिड़कियां और दूसरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

अभियान के तहत संगठन के कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों में स्कूलों की स्थिति देखने और स्थानीय लोगों तथा बच्चों से बातचीत करने की बात कह रहे हैं। CJP का दावा है कि इन समस्याओं की जानकारी सरकार तक पहुंचाकर सुधार की मांग की जाएगी।

लेकिन इस अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। सरकार और भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों में राजनीतिक गतिविधियां या ऐसे निरीक्षण नहीं होने चाहिए जिनसे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो।

घटना के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

बगरू की घटना के बाद राजस्थान में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। CJP ने हमले की जिम्मेदारी तय करने और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की है। पार्टी की ओर से आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्कूलों को राजनीतिक विवाद से दूर रखने की बात कही। भाजपा की ओर से भी यह कहा गया कि स्कूलों का शैक्षणिक माहौल बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

इस बीच कांग्रेस की ओर से भी घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। राजनीतिक दलों के आरोपों के बीच जरूरी यह है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था।

असली सवाल स्कूल और बच्चों का है

बगरू के रामपुरा-कंवरपुरा की घटना में राजनीतिक आरोप दोनों तरफ से हैं। CJP इसे अपने कार्यकर्ताओं पर हमला और स्कूल की स्थिति सामने लाने से रोकने की घटना बता रही है। ग्रामीण इसे बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध बता रहे हैं।

इन दोनों पक्षों के बीच एक बात पर ध्यान देना जरूरी है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं हैं। अगर स्कूल भवन खराब है तो उसे ठीक करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर मरम्मत के लिए राशि मंजूर है तो काम की समयसीमा और प्रगति भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

इसी तरह किसी भी सामाजिक या राजनीतिक संगठन को स्कूल में जाने से पहले लागू प्रशासनिक नियमों का पालन करना चाहिए। यदि निरीक्षण को लेकर अनुमति या सुरक्षा संबंधी नियम हैं तो उनका पालन होना चाहिए। लेकिन किसी भी मतभेद का जवाब मारपीट, पथराव या रास्ता रोककर देना भी उचित नहीं माना जा सकता।

बगरू की घटना अब केवल CJP और ग्रामीणों के बीच विवाद नहीं रह गई है। यह राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति, स्कूलों में बाहरी लोगों की भूमिका और शिक्षा के राजनीतिकरण पर बहस का हिस्सा बन चुकी है।

आगे यह मामला किस दिशा में जाता है, यह पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और स्कूल की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा। सबसे जरूरी यह है कि विवाद के बीच बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल को लेकर किए गए सरकारी दावों तथा स्थानीय लोगों की शिकायतों की वास्तविक स्थिति सामने आए।

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