जाखल के अक्कांवाली गांव में लंबे केश एवं केश संभाल प्रतियोगिता आयोजित, 120 बच्चों ने लिया भाग

जाखल के अक्कांवाली गांव में लंबे केश एवं केश संभाल प्रतियोगिता आयोजित, 120 बच्चों ने लिया भाग

सिखी स्वरूप और बच्चों को गुरबाणी से जोड़ने की पहल

अक्कांवाली में लंबे केश एवं केश संभाल प्रतियोगिता आयोजित, 120 बच्चों ने लिया भाग

जाखल/ 4 सितंबर 2026 /योगेश खनेजा/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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जाखल में सिख स्वरूप और बच्चों को गुरबाणी से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल की गई है। धन-धन साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज जी की अपार कृपा तथा हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सदस्य एडवोकेट अमनप्रीत कौर के विशेष प्रयासों से गांव अक्कांवाली स्थित गुरुद्वारा साहिब में लंबे केश एवं केश संभाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।

इस प्रतियोगिता में करीब 120 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में सिखी स्वरूप, गुरु साहिब की शिक्षाओं और अपने केशों की संभाल के प्रति जागरूकता पैदा करने का संदेश दिया गया है।

प्रतियोगिता के विजेताओं और प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित

प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। इसके साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बच्चों को मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया है।

इस अवसर पर गांव की संगत और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। गुरु घर के ग्रंथी भाई भाई गुरचरण सिंह ने भी कार्यक्रम की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग और संगत

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही है। इस अवसर पर भाई परमजीत सिंह, भाई हरविंदर सिंह ढैपई, भाई जसबीर सिंह, भाई रमणदीप सिंह, बीबी मनप्रीत कौर, बीबी रजिंदर कौर, बीबी राजविंदर कौर सहित कई लोग उपस्थित रहे हैं।

गांव-गांव करवाई जा रही हैं ऐसी प्रतियोगिताएं

एडवोकेट अमनप्रीत कौर ने बताया है कि इन प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सिखी स्वरूप, केशों की संभाल और गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ना है। साथ ही बच्चों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर एक बेहतर और संस्कारी जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इसी उद्देश्य के तहत हलके के विभिन्न गांवों में लगातार लंबे केश और केश संभाल प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा है कि बच्चों में अपनी सिख पहचान को लेकर जागरूकता पैदा करना समय की जरूरत है।

प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को अपनी विरासत और सिखी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया है कि इन आयोजनों में वह स्वयं भी उपस्थित रहकर बच्चों और संगत का उत्साह बढ़ा रही हैं।

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