जाखल में सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ नगरपालिका कर्मचारियों ने की तालाबंदी,

जाखल में सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ नगरपालिका कर्मचारियों ने की तालाबंदी,

सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ जाखल नगरपालिका कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, दो घंटे की तालाबंदी कर मनाया 'विश्वासघात दिवस'

जाखल /योगेश खनेजा / 18 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रांतीय आह्वान पर आज जाखल मंडी नगरपालिका कार्यालय में कर्मचारियों का भारी आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। सरकार द्वारा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी करने और पिछले समझौतों को लागू न करने से नाराज कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह एक बड़ा कदम उठाया। कर्मचारियों ने सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे तक पूरे दो घंटे के लिए नगरपालिका कार्यालय के मुख्य द्वार पर पूर्ण तालाबंदी कर दी। इस सांकेतिक हड़ताल और तालाबंदी के कारण कार्यालय का समस्त प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया। कर्मचारियों ने सरकार पर धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए इस दिन को ‘विश्वासघात दिवस’ के रूप में मनाया। 

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इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सफाई कर्मचारी संघ के स्थानीय प्रधान सुरेंद्र कुमार ने किया। उनके नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारी नगरपालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर एकत्र हुए और वहां धरना देकर बैठ गए। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इस आंदोलन की खास बात यह रही कि फायर ब्रिगेड (अग्निशमन विभाग) के कर्मचारियों ने भी इस धरने को अपना पूरा नैतिक और व्यावहारिक समर्थन दिया। फायर ब्रिगेड कर्मियों के शामिल होने से कर्मचारियों की एकजुटता और मजबूत दिखाई दी। इस मौके पर विरेंद्र नैन, अमरीक सिंह, गुरचरण सिंह, कर्मा सिंह, रवि कुमार, तरसेम सिंह और धर्मा सिंह सहित कई वरिष्ठ कर्मचारी नेता और प्रतिनिधि मुख्य रूप से मौजूद रहे। 

धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गत 13 मई को विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और उच्च अधिकारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी जायज मांगों को जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। लेकिन अत्यंत खेद का विषय है कि महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार ने उस लिखित समझौते को धरातल पर लागू नहीं किया है, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों के साथ विश्वासघात है। 

कर्मचारियों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें दोहराईं। उनकी मुख्य मांगों में लंबे समय से कार्यरत कच्चे सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को तुरंत प्रभाव से पक्का करना, विभागों में चल रही ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) को पूरी तरह से समाप्त करना, कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाना और देश भर में चर्चा का विषय बनी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना शामिल है। 

इस दो घंटे की तालाबंदी और कार्य बहिष्कार का सीधा असर जाखल शहर की व्यवस्था पर देखने को मिला। प्रशासनिक काम रुकने से अपने जरूरी कागजी कार्यों के लिए दूर-दराज से पहुंचे आम नागरिकों को भारी मानसिक और व्यावहारिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, सफाई कर्मियों के काम पर न जाने के कारण शहर की सफाई और सीवर व्यवस्था भी पूरी तरह से प्रभावित रही, जिससे जगह-जगह गंदगी के ढेर देखने को मिले। कर्मचारी नेताओं ने अंत में सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 13 मई के समझौते की मांगों को जल्द से जल्द अक्षरशः लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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