नरवाना में जन संघर्ष मंच हरियाणा का केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

जन संघर्ष मंच हरियाणा ने किया केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ प्रदर्शन ।
चीनी के लगातार बढते दाम, खाद्य अनाज को एथेनॉल उत्पादन में झोंकने तथा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का विरोध
नरेंद्र जेठी/नरवाना /01 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
नरवाना में जन संघर्ष मंच हरियाणा की जिला कमेटी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में चीनी के लगातार बढ़ते दामों, खाद्य अनाज को इथेनॉल उत्पादन में झोंकने तथा पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का खुलकर विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं।
- चीनी के दाम आधे किए जाने की मांग की गई।
- जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।
- पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की नीति को बंद करने की मांग की गई।
- खाद्य अनाज, गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए बंद करने को कहा गया।
- दूध, सरसों का तेल, दाल, अनाज जैसी जीवनोपयोगी वस्तुएं सरकारी राशन की दुकानों पर सस्ते दामों में उपलब्ध करवाने की मांग की गई।
- राशन व्यवस्था का विस्तार करने की मांग की गई।
- बस और रेल के किराए आधे किए जाने की मांग की गई।
- न्यूनतम मजदूरी 1000 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग की गई।
इथेनॉल नीति पर उठाए गए सवाल
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला प्रधान राजेश श्योकंद ने कहा कि चीनी के दामों में उछाल के लिए केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति मुख्य रूप से जिम्मेदार है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत गन्ने, चावल, मक्का और अन्य खाद्यान्नों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 720 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन में बड़ी मात्रा में अनाज और चीनी बनाने योग्य गन्ने का इस्तेमाल हुआ था। इस वर्ष इथेनॉल उत्पादन 800 करोड़ लीटर से अधिक पहुंचने के साथ गन्ने की एक बड़ी मात्रा इथेनॉल उत्पादन में लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ई-20 पेट्रोल लागू करने के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में जनता को कोई राहत नहीं मिली है। इसके विपरीत अनेक वाहन मालिकों को माइलेज में कमी तथा पुराने वाहनों में इंजन संबंधी समस्याओं की शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है।
चीनी के बढ़े दामों से बिगड़ा रसोई का बजट
मंच के जिला सचिव सत्यवीर सिंह ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही मेहनतकश जनता के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना मुश्किल होता जा रहा था। ऐसे में चीनी की कीमतों में हुई भारी वृद्धि ने आम आदमी की रसोई का बजट और बिगाड़ दिया है। पिछले 20-25 दिनों में चीनी के दाम में करीब 19 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है और कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। चीनी के दाम बढ़ने का असर केवल चाय और घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मिठाई, बेकरी तथा अनेक खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ेंगी।
खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
जिला उप-प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि जिस गन्ने से चीनी बननी चाहिए और जिस अनाज से जनता का पेट भरना चाहिए, उसे ईंधन में बदलने की नीति खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उत्पादन में कमी का फायदा उठाकर थोक व्यापारियों और जमाखोरों द्वारा मुनाफाखोरी किए जाने की संभावना भी बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार से जमाखोरी और कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने राशन डिपो पर मिलने वाले सरसों के तेल, जो कि 40 रुपये में 2 लीटर मिलता था, उसको 40 रुपये से बढ़ा कर सीधे 100 रुपये कर दिया था और अब सरकार ने डिपो पर इस तेल की सप्लाई बंद कर दी है। ऐसे ही मोदी सरकार ने रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है।
कर्मचारियों के आंदोलन और दमन का विरोध
मंच के जिला वित्त सचिव राजेश गोरा ने कहा कि हरियाणा में सीवर-सफाई जैसे जोखिम भरे कामों में भी भाजपा सरकार ने ठेकेदारी प्रथा लागू कर रखी है। आज नगर पालिका और दमकल कर्मचारी आंदोलनरत हैं। परन्तु हरियाणा की भाजपा सरकार उनकी मांगें मानने की बजाय धरने-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का लाठी, गोली, अव्यवहारिक गिरफ्तारियों द्वारा पुलिसिया दमन कर रही है। इनके अलावा प्रदर्शनकारियों को पूर्व सरपंच जोगिंदर बडनपुर, राजेश सुदकन, हवा सिंह, दिलबाग डोहाना खेड़ा आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। मंच ने मजदूरों, किसानों, ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और तमाम मेहनतकश जनता से मोदी सरकार की महंगाई बढ़ाने वाली जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। इस मौके पर वेदपाल डोहाना खेड़ा, शमशेर, बिट्टू, भीष्म, सुरेश, दयानंद, चांदी राम समेत अनेक कार्यकर्ता शामिल रहे।