बोहड़ाकला के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन, आशा दीदी ने बताए श्रीकृष्ण के गुणों को जीवन में उतारने के लाभ

पटौदी विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े गांव बोहड़ाकला में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा और भावना के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में बाल-गोपाल श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और आस्था का भाव देखने को मिला। भावना और आध्यात्मिकता के अनोखे संगम से सजे इस समारोह में मनमोहक चैतन्य झांकी और प्रेममय गीतों की धुनों से पूरा परिसर आध्यात्मिकता की शक्तिशाली तरंगों से गूंज उठा।
- श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों को जीवन में उतारना ही सच्ची जन्माष्टमी है।
- ओम शांति रिट्रीट सेंटर में केक कटिंग और रास नृत्य के साथ पर्व मनाया गया।
- अहमदाबाद से वरिष्ठ राजयोगिनी बीके अमर दीदी ने विशेष रूप से शिरकत की।
- श्रद्धालुओं ने बाल-गोपाल को झूले में झुलाया और विशेष भोग अर्पित किया।
श्रीकृष्ण के गुणों को अपनाना ही सच्ची भक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने जन्माष्टमी के वास्तविक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों और चरित्रों को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना ही सच्ची जन्माष्टमी मनाना है। आशा दीदी ने बताया कि श्रीकृष्ण की वह स्वर्णिम दुनिया, जहाँ मानवता अपने सर्वोच्च शिखर पर है, आज भी हर मन की आकांक्षा है। उन्होंने कहा कि ऐसी 'देवताओं की दुनिया' का पुननिर्माण केवल और केवल आध्यात्मिक मूल्यों और राजयोग के निरंतर अभ्यास से ही संभव है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और उत्सव का उत्साह
समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण के चैतन्य बाल-रूप को श्रद्धापूर्वक झूले में झुलाया और उनके साथ रास रचाया। रास नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने वहां मौजूद सभी लोगों को श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम के भावों से भर दिया। इस शुभ अवसर पर केक कटिंग भी की गई और सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। कार्यक्रम में अहमदाबाद से पधारीं वरिष्ठ राजयोगिनी बीके अमर दीदी की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने अपने प्रेरक विचारों से सबका मार्गदर्शन किया। अंत में, बाल-गोपाल को विशेष भोग अर्पित किया गया और सभी उपस्थित लोगों को ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया। इस आध्यात्मिक समारोह में संस्थान के सैकड़ों समर्पित सदस्यों और स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में शिरकत की।