जींद में नगर पालिका और अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में हुआ बड़ा प्रदर्शन

जींद में रविवार को नगर पालिका एवं अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में सीटू कार्यकर्ताओं और विभिन्न यूनियनों ने मिलकर शहर में एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में आशा वर्कर्स, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, निर्माण मजदूर, मनरेगा मजदूर, वन विभाग मजदूर, क्रेच वर्कर्स, मिड डे मील वर्कर्स सहित विभिन्न स्कीम वर्कर्स ने बहुत बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारी श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ अपना भारी रोष जताया। सभी कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि उनकी रुकी हुई सभी मांगों को तुरंत लागू किया जाए।
नेहरू पार्क में रोष सभा का आयोजन
इस बड़े प्रदर्शन को शुरू करने से पहले शहर के नेहरू पार्क में एक रोष सभा का आयोजन किया गया। इस रोष सभा को संबोधित करते हुए कपूर सिंह और सचिव संदीप जाजवान ने बहुत महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि नगरपालिका एवं अग्निशमन कर्मचारियों की यह हड़ताल किसी भी शौक का परिणाम नहीं है। बल्कि यह सरकार की तरफ से की गई वादाखिलाफी का नतीजा है जिसके कारण कर्मचारियों को मजबूर होकर आंदोलन के रास्ते पर आना पड़ा है। सरकार ने 13 मई 2026 को कर्मचारियों के साथ एक समझौता किया था। लेकिन तय समय सीमा पूरी होने के बाद भी उस समझौते को लागू करने की दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
समझौते की मुख्य और अहम मांगें
मांग पत्र के अनुसार हुए उस समझौते में नगरपालिका, निगम एवं परिषदों में कार्यरत करीब 13093 अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करने पर सहमति बनी थी। इसके साथ ही लगभग 6800 रिक्त पदों को भरने जैसी विभिन्न मांगों पर भी पूरी सहमति बनी थी। आशा वर्कर्स यूनियन से जुड़ीं नीलम, राजबाला, पवन व यशपाल ने सभा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ठेका एवं अस्थायी कर्मचारियों को रोजगार की पूरी सुरक्षा देने, न्यूनतम वेतन देने, ईएसआई और पीएफ जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के मुद्दे इस समझौते का मुख्य हिस्सा थे। इसके अलावा अग्निशमन विभाग के शहीद कर्मचारियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी देने जैसे संवेदनशील मुद्दे भी इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा थे।
सरकार के रवैये की कड़ी निंदा और रोष
इन तमाम समझौतों के होने के बावजूद सरकार द्वारा इस समझौते को जमीन पर लागू नहीं किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की इसी बेरुखी और लापरवाही के कारण कर्मचारियों के मन में बहुत भारी रोष पैदा हो गया है। सरकार को किसी भी प्रकार के दमन का रास्ता अपनाने से बचना चाहिए। इसके बजाय सरकार को कर्मचारियों के साथ पहले किए गए सभी समझौतों को तुरंत लागू करना चाहिए। मांग पत्र में सीटू संगठन ने सरकार के इस अड़ियल रवैये की बहुत कड़ी निंदा की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कर्मचारियों को दोबारा हड़ताल के रास्ते पर जाने के लिए पूरी तरह से सरकार ने ही मजबूर किया है।