झारखंड का छात्र आंदोलन: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ रांची में छात्रों का प्रदर्शन

झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बल्कि दूसरा जंतर मंतर बन चुकी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से चल रहा छात्र आंदोलन उन लाखों युवाओं की बेचैनी की आवाज है जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और व्यापक अनियमितताओं ने उनकी मेहनत, समय और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनकी मुख्य मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए, संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द किया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
छात्रों की प्रमुख मांगें और व्यवस्था पर सवाल
यह आंदोलन महज कुछ परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश नहीं है, बल्कि इसके भीतर उस व्यवस्था के प्रति अविश्वास दिखाई देता है जिसमें एक सामान्य मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार का युवा वर्षों तक किताबों के बीच अपना जीवन खपा देता है। छात्र सरकारी नौकरी को केवल रोजगार नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा और परिवार के भविष्य का माध्यम मानते हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच, प्रभावित परीक्षाओं—जिनमें 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल जैसी परीक्षाओं का उल्लेख किया जा रहा है—की निष्पक्ष समीक्षा तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रद्द कर दोबारा आयोजित करना शामिल है। छात्र यह भी चाहते हैं कि परीक्षा संचालन प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए।
परीक्षा व्यवस्था की त्रुटियां और छात्रों का संघर्ष
एक छात्र परीक्षा के लिए वर्षों तैयारी करता है और महंगी कोचिंग न मिलने पर पुस्तकालय, हॉस्टल या घर के छोटे से हिस्से में बैठकर पढ़ाई करता है। कई छात्र उम्र की सीमा के कारण अंतिम अवसर पर परीक्षा देते हैं। ऐसे में परीक्षा के बाद पेपर लीक, गोपनीयता, उत्तर पुस्तिका या परिणाम को लेकर सवाल उठना गंभीर स्थिति पैदा करता है। झारखंड सीआईडी द्वारा कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है, जिसके तहत जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से पूछताछ की गई है और अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। हालांकि छात्रों को आश्वासन नहीं बल्कि एक समयबद्ध रोडमैप और स्पष्ट प्रशासनिक मानकों की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचा जा सके।