जींद के 4 युवक चेन्नई से गिरफ्तार | वायुसेना क्लर्क भर्ती परीक्षा में प्रॉक्सी और नकल का खुलासा 2026

जींद के चार युवक चेन्नई से गिरफ्तार: वायु सेना क्लर्क भर्ती परीक्षा में प्रॉक्सी और हाई-टेक नकल का खुलासा
जींद / चेन्नई / 08 अगस्त 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो
भारतीय वायु सेना (IAF) की क्लर्क भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के एक अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। चेन्नई के अवाडी स्थित एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर/एयर फोर्स स्टेशन पर 2 अगस्त 2026 (रविवार) को हुई परीक्षा में हरियाणा के जींद जिले के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से दो ने प्रॉक्सी (दूसरे उम्मीदवार की जगह) परीक्षा दी, जबकि दो अन्य पर लघु इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल करने का आरोप है।
यह परीक्षा अग्निवीर वायु के तहत लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) और सिविलियन मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट ड्राइवर जैसे पदों के लिए आयोजित की गई थी। महज चार रिक्तियों के लिए देशभर से करीब 1,800 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा केंद्र पर हॉल टिकट सत्यापन के दौरान गड़बड़ी पकड़ी गई।
कैसे खुला राज?
निरीक्षकों ने एक अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड की फोटो और परीक्षा दे रहे व्यक्ति के चेहरे में अंतर पाया। पूछताछ में उसकी पहचान जींद के थुआ गांव निवासी आर. गौरव (21) के रूप में हुई, जो एस. अमन कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था। गौरव ने बताया कि वह तीन अन्य साथियों के साथ आया था। इसके आधार पर दूसरे प्रॉक्सी उम्मीदवार एस. अनिल (27, जींद) को पकड़ा गया, जो एच. सुनील/सुनील कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था।
इसके अलावा थुआ गांव के डी. सावन (25) और रामना पट्टी के सी. दीपक (24) को कानों में छिपे बेहद छोटे (एक सेंटीमीटर से भी कम) सिम-इनेबल्ड जीएसएम ईयरपीस के साथ पकड़ा गया। ये उपकरण बाहर से जवाब रिसीव करने के लिए थे। परीक्षा केंद्र में लगे सिग्नल जैमर के कारण उपकरण काम नहीं कर सके। तलाशी में ब्लूटूथ डुअल सिम जीएसएम बॉक्स, ब्लूटूथ ईयरपीस, आठ मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड भी बरामद हुए।
गौरव के ठहरने के स्थान (कमरे) की तलाशी ली गई तो वहां से तीन अन्य युवकों के बैग बरामद हुए। गौरव की निशानदेही पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा हॉल में मौजूद अन्य तीन साथियों को भी दबोच लिया गया:
- अनिल (27 वर्ष, गांव छत्तर, जींद): यह आरोपी मूल अभ्यर्थी सुनील के स्थान पर फर्जी उम्मीदवार (प्रॉक्सी) बनकर पर्चा हल कर रहा था।
- सावन (25 वर्ष, गांव थुआ, जींद): यह कान में बेहद बारीक (1 सेमी से भी छोटा) सिम-इनेबल्ड वायरलेस जीएसएम ईयरपीस लगाकर नकल कर रहा था।
- दीपक (24 वर्ष, रामना पट्टी, जींद): इसे भी कान के भीतर छिपाए गए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ पकड़ा गया।
आर्थिक लेन-देन और आगे की जांच
पूछताछ में चारों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें प्रॉक्सी परीक्षा देने या नकल में मदद के लिए प्रत्येक को 50,000 रुपये एडवांस मिले थे। बाकी राशि अभ्यर्थी के चयन होने के बाद मिलनी थी। वायु सेना अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद चारों को मुथ्थापुदुपेट पुलिस स्टेशन को सौंप दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
तमिलनाडु पुलिस मूल उम्मीदवारों, बिचौलियों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह है। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में भी अवाडी में वायु सेना परीक्षा में हरियाणा के एक युवक को प्रॉक्सी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
जींद से जुड़े परीक्षा फर्जीवाड़े के मामले पहले भी सामने आए
इस मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जींद जिले से जुड़े परीक्षा में प्रतिरूपण के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। जुलाई 2025 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की CET परीक्षा के दौरान जींद के दो लोगों को कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में भी एडमिट कार्ड पर फोटो बदलने और परीक्षा केंद्र पर पहचान संबंधी गड़बड़ी का आरोप सामने आया था।
नवंबर 2024 में भी चंडीगढ़ स्थित 3 BRD एयरफोर्स स्टेशन की एक सिविलियन भर्ती परीक्षा में जींद निवासी युवक को दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के आरोप में पकड़े जाने की खबर सामने आई थी। उस मामले में परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड और अभ्यर्थी की पहचान की जांच के दौरान कथित प्रतिरूपण का पता चला था।
इन पुराने मामलों का मौजूदा मामले से सीधा संबंध होने का कोई प्रमाण फिलहाल सामने नहीं है। इसलिए दोनों घटनाओं को केवल परीक्षा में प्रतिरूपण की समान प्रवृत्ति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
वायु सेना जैसी संवेदनशील संस्था की भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर प्रॉक्सी उम्मीदवार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहुंचने की कोशिश सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोटो, दस्तावेज और अन्य जांच प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। अवाडी परीक्षा केंद्र पर भी इसी तरह की जांच के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई है।
इस मामले में सिग्नल जैमर की मौजूदगी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कथित बरामद होने का पहलू विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि जांच में यह साबित होता है कि उपकरण परीक्षा के दौरान बाहरी संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से लाए गए थे, तो यह मामला सामान्य नकल से आगे बढ़कर सुनियोजित परीक्षा धोखाधड़ी की श्रेणी में देखा जा सकता है।
अब इन सवालों के जवाब तलाशेगी पुलिस
इस मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं—
- अमन कुमार और सुनील की जगह परीक्षा देने का कथित प्रयास किसके कहने पर किया गया?
- चारों आरोपियों का आपस में क्या संबंध है?
- कथित 50 हजार रुपये एडवांस किसने दिए?
- क्या दोनों मूल अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है?
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कहां से खरीदे या उपलब्ध कराए गए?
- क्या आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल संपर्कों से किसी बिचौलिए या गिरोह का पता चलता है?
- क्या इस मामले में चार से अधिक लोग शामिल हैं?
- क्या अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की कोशिश की गई थी?
इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से ही सामने आएंगे।
आरोप साबित होना अभी बाकी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गिरफ्तार किए गए चारों युवक फिलहाल आरोपों का सामना कर रहे हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस की प्राथमिकी, बरामदगी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों के आधार पर मामले की वास्तविक तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।
फिलहाल इतना सामने आया है कि 2 अगस्त को अवाडी एयर फोर्स स्टेशन में आयोजित वायु सेना भर्ती परीक्षा के दौरान पहचान संबंधी जांच से कथित गड़बड़ी का पता चला और जींद से जुड़े चार युवकों को हिरासत में लेकर पुलिस कार्रवाई की गई। अब जांच का असली केंद्र यह पता लगाना है कि यह केवल चार युवकों की कोशिश थी या इसके पीछे भर्ती परीक्षा को निशाना बनाने वाला कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
जींद पुलिस का रुख
जींद के पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने कहा कि इस मामले की फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। जिले से कोई युवक पकड़ा गया है तो उसके बारे में जांच की जाएगी।
यह घटना सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हाई-टेक नकल और प्रॉक्सी रैकेट की बढ़ती समस्या को फिर रेखांकित करती है। जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा है।