जींद जिला कारागार में नम आंखों के साथ बहनों ने भाइयों को बांधी राखी, जेल प्रशासन ने किए खास इंतजाम

जींद में शुक्रवार को महानिदेशक कारागार अर्शिंद्र सिंह चावला के आदेशानुसार जिला कारागार में रक्षाबंधन का त्यौहार बहुत उत्साह के साथ मनाया गया। जिला कारागार में बंद बंदियों को उनकी बहनों द्वारा जेल प्रशासन के सहयोग से राखियां बांधी गईं। इस अवसर पर जेल प्रशासन की तरफ से विशेष प्रबंध किए गए थे।
शुक्रवार को जिला कारागार में कैदियों और बंदियों को रक्षाबंधन पर जेल के अंदर ही राखी और मिठाई उपलब्ध करवाई गई। बहनों को भाई की पूजा करने और माथे पर तिलक लगाने के लिए आवश्यक सामग्री भी जेल के अंदर ही उपलब्ध हुई। इसके बाद बहनों ने अपनी भाई की कलाई पर रक्षासूत्र और राखी बांधी।
खीर से कराया मुंह मीठा
राखी बांधने के बाद बहनों ने अपने भाइयों को खीर खिलाकर उनका मुंह मीठा करवाया। यह पूरा कार्यक्रम बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान जेल में एक अलग ही भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
जेल अधीक्षक दीपक शर्मा के विचार
जेल अधीक्षक दीपक शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के पवित्र प्यार का मुख्य प्रतीक माना जाता है। इस खास दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधती हैं। इसके साथ ही वे भाइयों के अच्छे भविष्य, लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का पक्का वचन देते हैं।
महिला और पुरुष बंदियों के लिए विशेष प्रबंध
जिला जेल में बंद सभी पुरुष बंदियों को उनकी बहनों से राखियां बंधवाई गईं। इसके अलावा महिला बंदियों द्वारा बाहर से आए अपने भाइयों को भी राखियां बंधवाई गईं। जेल विभाग द्वारा राखियों, रक्षासूत्र और लड्डू मिठाई का पूरा प्रबंध किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जेल में बंद पुरुष और महिला बंदी केवल जेल में रहने के कारण अपने मौलिक अधिकारों से किसी भी तरह वंचित न रहने पाएं। जेल प्रशासन का यह भी उद्देश्य था कि जेल में बंद होने के कारण उनके अंदर किसी भी प्रकार की अपराधबोध की भावना पैदा न होने पाए।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रक्षाबंधन का यह त्यौहार जेल के अंदर पूरे सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने हेतु पुलिस प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा के बहुत पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के इन इंतजामों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी शरारती तत्व किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम न देने पाए।