जींद में श्रम अधिकारों पर सरकार के हमलों के खिलाफ हुआ विरोध प्रदर्शन, दी गिरफ्तारियां

जींद में किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों तथा खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर सोमवार को आयोजित देशव्यापी जेल भरो सत्याग्रह के तहत जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शकारी किसान, मजदूर, स्कीम वर्कर्स, कच्चे कर्मचारी, छात्र, नौजवान और आम नागरिक नेहरू पार्क से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और अपनी गिरफ्तारियां दीं। प्रशासन एवं पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
नेहरू पार्क में हुई जनसभा
प्रदर्शन से पहले नेहरू पार्क में आयोजित जनसभा की संयुक्त अध्यक्षता रमेश चंद्र, रामप्यारी, प्रेम सिंहमार, सतपाल सरोहा, सुधीर, होशियार सिंह और सतीश बड़ौदा ने की। बैठक का संचालन कपूर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि देश की मेहनतकश जनता आज महंगाई, बेरोजगारी, खेती के बढ़ते संकट, पशुपालन की समस्याओं, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली तथा रोजगार की असुरक्षा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है।
केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर असंतोष
केंद्र और राज्य सरकारों की आर्थिक एवं श्रम नीतियों का असर सबसे अधिक किसान, मजदूर, कर्मचारी, छात्र, नौजवान और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकारों ने सत्ता में आने से पहले रोजगार बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने, महंगाई कम करने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने जैसे बड़े वादे किए थे लेकिन कुछ नहीं किया गया। बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की आय से जुड़े सवाल आज भी गंभीर बने हुए हैं। जबकि श्रम क्षेत्र में चार लेबर कोड लागू करने, सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण तथा योजनाओं में बदलाव जैसे कदमों को लेकर मजदूर संगठनों में व्यापक असंतोष है।
प्रमुख मांगें
अमेरिका के साथ कृषि क्षेत्र में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को रद्द किया जाए और सभी फसलों की एमएसपी पर कानूनी खरीद की गारंटी दी जाए। किसान एवं मजदूरों की कर्जमाफी की जाए और चारों लेबर कोड रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल किए जाएं। परियोजना वर्करों, सफाई कर्मचारियों सहित सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए तथा 30 हजार न्यूनतम मासिक वेतन लागू किया जाए। मनरेगा को बहाल करते हुए वीबी जी रामजी योजना को रद्द किया जाए। मनरेगा में 200 दिन का रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए। बिजली क्षेत्र के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना को वापस लिया जाए। श्रम कल्याण बोर्ड को बहाल कर निर्माण मजदूरों को लंबित एवं सभी पात्र लाभ दिए जाए तथा फसल बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही नहरी सिंचाई एवं पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने और सेम की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की गई।