जींद बस अड्डा पर रोडवेज कर्मचारियों का दो घंटे प्रदर्शन, निजीकरण के विरोध में उठाई मांग

जींद में हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को जींद डिपो में रोडवेज कर्मचारियों ने दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार से मुख्य मांग की गई कि निजीकरण का रास्ता पूरी तरह से छोड़ा जाए। इसके साथ ही रोडवेज के बेड़े में 10 हजार सरकारी बसें शामिल की जाएं और बेरोजगारों को रोजगार देने की प्रक्रिया पर तेजी से आगे बढ़ा जाए।
प्रदर्शनकारी रोडवेज कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रधान देवेंद्र घोड़ेला, सुनील, धर्मबीर, दिनेश, पवन, ओमप्रकाश, रमेश और बलजीत मान ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री से 16 जून को एक महत्वपूर्ण वार्ता हुई थी। उस वार्ता में परिवहन मंत्री ने यह घोषणा की थी कि रोडवेज के बेड़े में 500 बसें और अधिक खरीदी जाएंगी। कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए यह भी आश्वासन दिया गया था कि 40 दिन के भीतर दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
राज्य कैशियर सुशील ईक्कस और जयवीर तालू ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार मानी गई मांगों को सही ढंग से लागू नहीं कर रही है। इसके उलट विभाग में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने की बजाय प्राइवेट परमिट देने शुरू किए जा रहे हैं जो जले पर नमक छिड़कने जैसा काम है। इसी भारी नाराजगी के चलते चार सितंबर को प्रदेश भर के सभी रोडवेज कर्मचारियों ने प्रत्येक डिपो पर दो घंटे का प्रदर्शन किया है।
यूनियन के नेताओं ने सरकार के सामने कई स्पष्ट मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि प्राइवेट परमिट तुरंत प्रभाव से रद किए जाएं। परिवहन मंत्री के साथ बातचीत के दौरान जो मांगें पहले मानी जा चुकी हैं, उनको तुरंत लागू किया जाए। यदि सरकार बातचीत के माध्यम से समस्याओं का उचित समाधान नहीं करती है तो हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन जल्द ही एक बैठक बुलाएगी। इसके बाद सभी यूनियनों को एक सूत्र में बांधते हुए एक निर्णायक आंदोलन किया जाएगा और रोडवेज का निजीकरण किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।
वेतनमान और अन्य प्रमुख मांगें
कर्मचारियों ने मांग की है कि कर्मचारियों के वेतनमान के लिए स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए। इसके तहत चालक का वेतनमान 54100 रुपये, परिचालक और लिपिक का वेतनमान 35400 रुपये किया जाए। इसके साथ ही अन्य सभी कर्मचारियों के वेतन की विसंगति को भी पूरी तरह से दूर किया जाए।
विभाग में खाली पड़े सभी पदों पर तुरंत प्रभाव से प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी की जाए। साल 2016 के चालकों सहित सभी कच्चे कर्मचारियों को माननीय कोर्ट के निर्णय के अनुसार पक्का किया जाए। देय अर्जित अवकाश को पहले की तरह ही दोबारा लागू किया जाए और बकाया रात्रि ठहराव का पूरा भुगतान किया जाए।
बकाया भुगतान और अन्य सुविधाएं
कर्मचारियों की यह भी मांग है कि ओवरटाइम पॉलिसी को खोला जाए और सभी गांवों में रात्रि ठहराव की व्यवस्था की जाए। पेंडिंग पड़े सभी ओवरटाइम का भुगतान किया जाए। पिछले 10 साल से लंबित पड़े बोनस का तुरंत भुगतान किया जाए। विभाग में जितने भी पद खाली हैं, उन पर तुरंत प्रभाव से पक्की भर्ती की जाए।