15 दिन बाद किनाला गांव में जीवन कुंडू को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब

हिसार जिले के किनाला गांव में मंगलवार का सूरज एक बहुत ही दुखद और भारी माहौल लेकर उगा। पिछले 15 दिनों से जिस न्याय की लड़ाई को पूरा परिवार, ग्रामीण, खाप पंचायतें और किसान संगठन लड़ रहे थे, उसकी एक महत्वपूर्ण कड़ी के तहत आखिरकार 4 अगस्त को अपनी जान गंवाने वाले जीवन कुंडू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जीवन कुंडू का पार्थिव शरीर जैसे ही अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के शवगृह से उनके पैतृक गांव किनाला पहुंचा, पूरा इलाका गमगीन हो गया। परिजनों की चीख-पुकार और गांव वालों की नम आंखों के बीच 11 साल के मासूम बेटे रिशु ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
इस दौरान गांव में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। आसपास के गांवों के ग्रामीण, खाप पंचायतों के प्रतिनिधि और विभिन्न किसान संगठनों के नेता जीवन कुंडू को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 15 दिनों का लंबा इंतजार केवल एक परिवार का दर्द नहीं था, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लोगों के सब्र और न्याय की मांग का इम्तिहान बन चुका था। सरकार द्वारा पीड़ित परिवार की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करने के बाद ही परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुए थे।
4 अगस्त की वह खौफनाक सुबह और पुरानी रंजिश
इस पूरे दुखद वाकये की शुरुआत 4 अगस्त की सुबह हुई थी। हिसार के सूर्यनगर इलाके में रहने वाले और डेयरी का कारोबार चलाने वाले जीवन कुंडू रोज की तरह सुबह करीब साढ़े पांच बजे अपने काम पर निकले थे। वह अपनी बाइक के पीछे ट्रॉली बांधकर गोबर डालने के लिए जा रहे थे। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रास्ते में उनके साथ कोई अनहोनी होने वाली है।
जैसे ही जीवन सड़क पर आगे बढ़े, पड़ोसी रमेश और उसके साथ आए करीब 10 से 12 युवकों ने उन्हें रास्ते में घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, हमलावरों के हाथों में लाठी और डंडे थे। आरोपियों ने बिना संभलने का मौका दिए जीवन पर हमला बोल दिया और उन्हें तब तक बेरहमी से पीटते रहे जब तक कि वह अधमरा होकर जमीन पर नहीं गिर पड़े। हमलावर घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए, जबकि गंभीर रूप से घायल जीवन को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मौत से पहले का दर्दनाक वीडियो और रंजिश की वजह
अस्पताल में जीवन कुंडू की मौत होने से पहले का एक मिनट 12 सेकेंड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में जीवन के दोनों पैरों पर गहरे जख्म और चोट के गंभीर निशान साफ देखे जा सकते थे। अपनी जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहे जीवन ने वीडियो में दर्द से कराहते हुए पूरी घटना की आपबीती सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि पड़ोसी रमेश, मोल्हड़ और उनके साथ आए 15 से 20 युवकों ने उन्हें घेरकर बुरी तरह पीटा और उनके पैर तोड़ दिए।
इस खौफनाक वारदात के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है। कुछ समय पहले जीवन की डेयरी में पशुओं के लिए हौद बनाने को लेकर पड़ोसी रमेश के साथ विवाद हुआ था। उस समय भी दोनों पक्षों में कहासुनी और मारपीट हुई थी, जिसमें आरोप है कि रमेश पक्ष के लोगों ने जीवन की पत्नी रमन पर भी हमला किया था। उस समय पुलिस में मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उसी रंजिश का इतना भयानक अंजाम होगा, यह किसी ने सोचा भी नहीं था।
15 दिन तक क्यों अटका रहा अंतिम संस्कार?
जीवन कुंडू की हत्या के बाद ही स्थानीय लोगों, परिजनों और खाप प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश फैल गया था। मुख्य आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर 'जीवन कुंडू संघर्ष समिति' का गठन किया गया था। परिवार का कहना था कि जब तक मुख्य आरोपी रमेश अत्री की गिरफ्तारी नहीं होती और परिवार को सुरक्षा व सहायता नहीं मिलती, तब तक वे जीवन के शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
इसके चलते जीवन का शव 15 दिनों तक अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी में रखा रहा। इस दौरान हिसार से लेकर आसपास के जिलों में धरना-प्रदर्शन हुए, टोल प्लाजा जाम किए गए और मामला लगातार राजनीतिक व सामाजिक रूप से तूल पकड़ता गया। 15 अगस्त को हांसी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान भी विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनी थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी देखने को मिली थी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ वार्ता और सहमति
मामले को बढ़ता देख और सामाजिक स्थिति की गंभीरता को समझते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप किया। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री और जीवन कुंडू संघर्ष समिति के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच एक लंबी और विस्तृत बैठक हुई थी। इस बैठक में सरकार ने पीड़ित परिवार और संघर्ष समिति की सभी मांगों पर विचार किया और उन्हें मानने का फैसला लिया।
बैठक में तय हुआ कि पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही परिवार को आर्थिक सहायता राशि देने पर भी सहमति बनी थी। मुख्य आरोपी रमेश अत्री की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स की अतिरिक्त टीमों का गठन करने का आदेश दिया गया था। साथ ही 15 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने और जब्त किए गए वाहनों को छोड़ने का आश्वासन दिया गया था।
गांव किनाला में जब पहुंचा शव, मची चीख-पुकार
सोमवार देर शाम सरकार के साथ सहमति बनने के बाद मंगलवार सुबह अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से जीवन कुंडू का शव उनके पैतृक गांव किनाला लाया गया। शव के गांव में प्रवेश करते ही हर आंख नम हो गई थी। घर के बाहर लोगों का भारी जमावड़ा लगा हुआ था और जैसे ही जीवन की देह को घर के आंगन में रखा गया, उनकी पत्नी रमन होश खो बैठीं।
वहीं, जीवन की बहन अपने भाई के शव से लिपटकर बिलख-बिलखकर रोने लगी। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स के कलेजे को छलनी कर दिया था। गांव का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जिसकी आंखों में आंसू न हों और 14 दिनों का मानसिक तनाव परिजनों के चेहरों पर साफ झलक रहा था।
11 साल के मासूम बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि
अतिम यात्रा जब घर से श्मशान घाट की ओर बढ़ी, तो उसमें हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए थे। 'जीवन कुंडू अमर रहे' और न्याय की मांग के नारों के बीच शवयात्रा श्मशान घाट पहुंची थी जहां माहौल बेहद गमगीन था। सभी धार्मिक और सामाजिक रीती-रिवाजों को पूरा करने के बाद जीवन के 11 वर्षीय बेटे रिशु ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
कम उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद मासूम रिशु का शांत और भारी चेहरा वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर रहा था। अंतिम संस्कार के समय खाप पंचायतों के चौधरी, किसान संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे थे। इन सभी ने जीवन कुंडू को श्रद्धासुमन अर्पित किए और परिवार को इस कठिन घड़ी में ढांढस बंधाया।