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JJP को लग गया रोग अविश्वास प्रस्ताव से भाजपा से ज्यादा चितिंत जेजेपी क्यों 

JJP को लग गया रोग अविश्वास प्रस्ताव से भाजपा से ज्यादा चितिंत जेजेपी क्यों
Chandigarh(अटल हिन्द ब्यूरो )

JJP finds disease why JJP is more worried than BJP due to the no confidence motion

हरियाणा में कांग्रेस की तरफ से विधानसभा बजट सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। इसमें नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधायकों संग राय मशविरा भी किया है।

इधर भाजपा और जजपा का कहना है कि हुड्डा का अविश्वास प्रस्ताव ओंधे मुंह गिरेगा। लेकिन जेजेपी को चिंता सताने लग रही है।

तीन कृषि कानूनों को विरोध में किसान लगातार धरना प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ महंगाई की मार अब लोगों को भी झेलनी पड़ रही है।कांग्रेस की तरफ से बजट सत्र में लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव ने जेजेपी की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि किसान संगठन लगातार जेजेपी को बीजेपी से अलग होने के लिए दबाव बना रहे हैं।

हरियाणा में पांच मार्च को बजट सत्र शुरु होने वाला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तय किया है कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद खट्टर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी।

हालांकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके लिए दो बार राज्यपाल से मुलाकात करने के लिए समय मांग चुके हैं और वो राजभवन जा चुके हैं, लेकिन राज्यपाल से मुलाकात नहीं हो पाई है।जानकारों की मानें तो कांग्रेस द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव को अगर विधानसभा अध्यक्ष स्वीकार करते हैं तो दस दिन के भीतर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करानी जरूरी होगा।

खट्टर सरकार को भले ही संख्या के आधार पर कोई खतरा ना हो लेकिन जेजेपी के लिए ये एक परीक्षा की घड़ी होगी क्योंकि सदन में दुष्यंत को बोलते हुए देखना दिलचस्प होगा।

सरकार के साथ रहते हुए दुष्यंत किसानों को कैसे खुश रखेंगे, ये बड़ी बात होगी। अगर दुष्यंत ने सरकार का साथ दिया तो किसानों की भारी नाराजगी झेलनी पड़ेगी।और अगर किसानों के साथ खड़े हुए तो अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे। यही वजह है कि हुड्डा का दांव खट्टर से ज्यादा दुष्यंत के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

जेजेपी प्रदेश में नई नवेली पार्टी थी, फिर भी उसके 10 विधायक बने। 10 विधायकों वाली जेजेपी पार्टी ने भाजपा को समर्थन दे दिया और सत्ता में आ गए। हालांकि कई बार जजपा के विधायकों में नाराजगी भी देखने को मिली।

हरियाणा के जींद जिले में जेजेपी का गठन हुआ था और वहीं पिछले दिनों हुई खाप पंचायत ने जेजेपी विधायकों को बीजेपी से गठबंधन तोड़ने का दबाव बनाया था।

खट्टर सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने किसानों के समर्थन में ना सिर्फ अपना समर्थन वापस लिया बल्कि चेयरमैन के पद को भी छोड़ दिया।

महम से निर्दलीय विधायक भी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर पहले ही सरकार से अलग गए थे जबकि हरियाणा में खट्टर सरकार को सहयोग दे रहे जेजेपी का मूल वोटर जाट और किसान माने जाते हैं।

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