kaithal-हाईकोर्ट की दखलदांजी पर हरियाणा पुलिस ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

हाईकोर्ट की दखलदांजी पर हरियाणा पुलिस ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
अटल हिंद संवाददाता/कैथल । हरियाणा पुलिस ने एक मामले मे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की दखलदांजी के बाद दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला कैथल के एक क्रैप के कारोबारी से जबरन वसूली व रिश्वत लेने का है, जिसमें कैथल सिटी थाना पुलिस ने दिल्ली पुलिस के छह कर्मचारियों व अधिकारियों को आरोपी बनाया है। आरोपों के मुताबिक, आरोपी पुलिसकर्मियों ने कारोबारी को चोरी के केस में फंसाने का डर दिखाकर दिसंबर 2018 में रिश्वत ली थी।
यह है पूरा मामला
सिटी थाना कैथल में दर्ज हुए केस नम्बर 552 में गांव चंदाना निवासी सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि शहर में जींद रोड बाईपास नाका पर उसकी क्रैप की दुकान है। 23 दिसंबर 2018 को शाम करीब छह बजे उसकी दुकान पर एक इनोवा गाड़ी में पांच व्यक्ति आए। जिन्होंने खुद को दिल्ली सीआईडी क्राइम ब्रांच से बताया। पुलिसवाले कहने लगे कि तुमने चोरी की गाड़ी काटी है, इसलिए तेरे ऊपर केस दर्ज होगा।
झूठे केस में फंसाने की दी धमकी
दुकानदार ने खुद का सही ठहराते हुए सबूत दिखाए तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि हम 200 किलोमीटर चलकर आए हैं और झूठे केस में फंसाने की धमकी देनी शुरू कर दी। आरोपियों ने पांच लाख रुपए रिश्वत मांगी तो तीन लाख रुपए देने तय हुए। सुरेंद्र का आरोप है कि उसने पहले ही तय कर लिया था कि बिना गलती किए रिश्वत देनी पड़ी तो रिश्वत लेने वालों को पकड़वाएंगे।

बिना गिनती किए अंधेरे में ली रिश्वत
उसने रुपए जमा करने के लिए दिल्ली पुलिस से कुछ घंटे का समय मांगा, तब तक पुलिसवाले दुकान से कुछ दूरी पर खड़े हो गए। रात करीब 9.10 बजे उसने पुलिसवाले को 2 लाख 33 हजार रुपए सीसीटीवी के सामने देने चाहे तो पुलिसवाला उसे अंधेरे में ले गया और गिनती किए बिना ही रुपए लेकर चलता बना। उसी रात सवा तीन बजे अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस को हेड कांस्टेबल विनय बताया और कहा कि तुमने तीन लाख बोलकर 2.33 लाख रुपए दिए।

बातचीत की रिकॉर्ड
रिश्वत के कम पैसे देने को लेकर आरोपी पुलिसकर्मी ने काफी देर बातचीत की और बकाया रकम मांगने लगा। इसकी उसने अपने मोबाइल में रिकार्डिंग कर ली। सुरेंद्र का कहना है कि उसने पहले ही प्लान के तहत कम रुपए दिए थे ताकि पुलिसवाले दोबारा रुपए मांगे तो वह उन्हें पकड़वा सके। लेकिन आरोपियों को यही बोला कि गलती से कम रुपए दिए हैं वह बकाया रुपए भी दे देगा।

रिश्वते लेने दोबारा पहुंचे तो आए काबू
सुरेंद्र ने कहा कि मैने दिल्ली पुलिस को रंगे हाथ पकड़वाने के लिए विजिलेंस इंस्पेक्टर को कॉल की तो विजिलेंस इंस्पेक्टर ने खुद को बाहर बताते हुए मोबाइल बंद कर लिया। फिर कैथल के तत्कालीन एसपी वसीम अकरम को कॉल करके सारा मामला बताया और कॉल रिकॉर्डिंग भी व्हाट्सएप की। एसपी के आदेश पर सीआईए के इंस्पेक्टर रमेश चंद्र ने मेरे से संपर्क किया और कहा कि हमें कुछ कागजी कार्रवाई भी करनी है, इसलिए दिल्ली पुलिस के पास अभी मत जाना, दिल्ली पुलिस को गुमराह करते रहो।

खाली पेपर करवाए हस्ताक्षर
डीएसपी कृष्ण व सीआईए ने उसे सिटी थाना में बुलाकर खाली कागजात पर हस्ताक्षर करवा लिए। कैथल पुलिस के प्लान के तहत उसने दिल्ली पुलिस को बकाया राशि देने के लिए कैथल जींद बाइपास चौक पर बुलाया। दिल्ली पुलिस वाले दो गाडिय़ों में आए, जिन्हें कैथल पुलिस ने घेरकर काबू कर लिया और सिटी थाना में ले गई। आरोपी पुलिस वालों की पहचान एसआई ज्ञानेंद्र सिंह, एएसआई अशोक कुमार, हेड कांस्टेबल विनय कुमार, कांस्टेबल सोनू प्यार, सोनू कुमार व सोनू सैनी के तौर पर हुई थी। बुलेट पर थाना पहुंचे तत्कालीन एसपी वासिम अकरम, पीड़ित को धमकायाउसी रात एसपी वसीम अकरम बुलेट बाइक पर सिटी थाना पहुंचे और सुरेंद्र व उसके भाई भगत सिंह को कहा कि तुमने रिश्वत देने का अपराध किया है। यह कहते हुए उन्हें थाना में बैठा लिया और दिल्ली पुलिस के छह आरोपियों को अलग कमरा में बैठाकर एसपी अकरम बातचीत करने लगे। एक एएसआई ने सुरेंद्र का मोबाइल लेकर रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी, लेकिन तब तक वह रिकॉर्डिंग किसी और मोबाइल में भी भेज चुका था। एक घंटे बाद एसपी अकरम थाना से चले गए और उन्हें रात 2.15 पर यह कहते हुए घर भेज दिया की कार्रवाई कर देंगे। सुबह पता चला कि कैथल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और रात के समय सीसीटीवी की तार जानबुझकर तोड़ दी थी।

समझौते के लिए सुरेंद्र के भतीजे का किया अपहरण
सुरेंद्र का आरोप है कि उसका भतीजा भगत सिंह केमिस्ट की दुकान करता है। 26 अप्रैल को भगत सिंह पिहोवा में पैदल अपने बुआ के लड़के के पास जा रहा था तो इनोवा गाड़ी में आए छह व्यक्तियों ने उसका अपहरण कर लिया। आरोपियों ने खुद को सीआईए-1 हिसार से बताया। परिवार वाले गांव के मौजिज व्यक्तियों के थाना पिहोवा थाना गए तो पता चला कि हिसार सीआईए-1 ने भगत सिंह को लेकर थाना में कोई सूचना नहीं दी थी। अगले दिन 27 अप्रैल को भगत सिंह के मोबाइल से कॉल आई कि मेरे को सीआईए पुलिस टॉर्चर कर रही है। सुरेंद्र का आरोप है कि वे हिसार सीआईए गए तो इंस्पेक्टर ने कहा कि तुम्हारा दिल्ली पुलिस के साथ कोई मामला है, उसमें समझौता कर लो तो भगत सिंह को छोड़ देंगे। हिसार पुलिस ने कहा कि दिल्ली पुलिस के उस केस में 18 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। फिर सीआईए-1 हिसार इंचार्ज ने कहा कि भगत सिंह को थाना भूना फतेहाबाद भेज दिया है। वहां जाकर बातचीत करो। वे भूना गए तो एसआई भूप सिंह ने कहा कि सीआईए-1 हिसार इंस्पेक्टर मेरा अच्छा मित्र है। जब एसआई से कहा कि भगत सिंह बेकसूर है और हम हर जगह शिकायत करेंगे। तो एसआई कहने लगा कि कहीं शिकायत मत करना छोटा सा केस ही लगाऊंगा जिसमें जल्द जमानत हो जाएगी।

पीड़ित ने सीबीआई व हाईकोर्ट को दी शिकायत
सभी पुलिसवालों की मिलीभगत के चलते केस में कहीं सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने सीबीआई चंडीगढ़ व हाईकोर्ट को शिकायत दी। जिसके बाद कैथल पुलिस हरकत में आई। डीएसपी कलायत द्वारा मामले की प्राथमिक जांच के बाद दिल्ली पुलिस के एसआई ज्ञानेंद्र सिंह, एएसआई अशोक कुमार, हेड कांस्टेबल विनय कुमार, कांस्टेबल सोनू प्यार, सोनू कुमार व सोनू सैनी के खिलाफ केस दर्ज हुआ।

डीएसपी का बयान
गांव चंदाना निवासी पीड़ित सुरेन्द्र की शिकायत पर थाना सिटी कैथल में दिल्ली पुलिस के 6 कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, मामले की जांच चल रही है जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कारवाई की जाएगी।
डीएसपी कैथल बलजिंदर सिंह।

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