कैथल बाबा राजपुरी डेरे में साधु हत्या

Atal Hind Team Online2 September 202610 min read27 viewsकैथल
कैथल बाबा राजपुरी डेरे में साधु हत्या

कैथल बाबा लदाना डेरे में साधु की संदिग्ध मौत, मुख्य महंत हिरासत में

कैथल//02 सितंबर  2026  /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

कैथल जिले के गांव बाबा लदाना स्थित ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में बुधवार को एक साधु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया। डेरे के विश्राम गृह में साधु शिव शंकर पुरी का शव मिलने के बाद आसपास के इलाके में चर्चा फैल गई। शव पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आने के बाद अनुयायियों ने हत्या की आशंका जताई।

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घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद सीआईए और एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ की टीमें भी जांच के लिए डेरे में पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की। मुख्य महंत दूजपुरी समेत कुछ साधुओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

मामला सामने आने के बाद डेरे में बड़ी संख्या में अनुयायी और ग्रामीण भी पहुंच गए। अनुयायियों ने मुख्य महंत पर साधु को पीट-पीटकर मारने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि साधु को बांधकर उसके साथ मारपीट की गई थी। हालांकि पुलिस ने अभी इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की जांच जारी है।

पुलिस के मुताबिक मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकेगा। इसलिए फिलहाल मामले को संदिग्ध मौत और हत्या के आरोपों के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

सुबह डेरे में मिला साधु का शव

प्राथमिक जानकारी के अनुसार मृतक साधु की पहचान शिव शंकर पुरी के रूप में हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक वह करीब तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश से बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में आया था। वह डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी के पास रह रहा था।

बुधवार सुबह जब ग्रामीण और श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए डेरे में पहुंचे तो उन्हें विश्राम गृह में शिव शंकर पुरी का शव पड़ा मिला। शव की स्थिति देखकर लोगों को मामला सामान्य मौत का नहीं लगा। शरीर पर चोट के निशान होने की बात सामने आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई।

घटना की खबर कुछ ही समय में आसपास के गांवों तक पहुंच गई। बड़ी संख्या में लोग डेरे में जमा हो गए। मृतक से जुड़े अनुयायियों ने मुख्य महंत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

पुलिस ने स्थिति को देखते हुए मौके पर अपनी मौजूदगी बढ़ा दी। धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और किसी तरह की अप्रिय स्थिति रोकने के लिए जरूरी इंतजाम किए।

अनुयायियों ने मुख्य महंत पर लगाए गंभीर आरोप

साधु की मौत की खबर फैलने के बाद उनके अनुयायियों में नाराजगी बढ़ गई। उनका आरोप है कि शिव शंकर पुरी के साथ डेरे के अंदर मारपीट की गई थी।

कुछ अनुयायियों ने दावा किया कि साधु को रस्सियों और जंजीरों से बांधा गया और इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई। यह भी आरोप लगाया गया कि मारपीट के दौरान उसके सिर और दाढ़ी के बाल उखड़ गए।

ये आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल इन्हें अनुयायियों के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस ने इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। जांच अधिकारी घटनास्थल, शव की स्थिति और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

यही वजह है कि इस समय किसी व्यक्ति को अदालत के फैसले से पहले दोषी बताना उचित नहीं होगा। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि साधु की मौत किस वजह से हुई और इसमें किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

पुलिस की शुरुआती जांच में सिगरेट को लेकर विवाद

मामले में एक और जानकारी सामने आई है। सदर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती जांच में शिव शंकर पुरी और मुख्य महंत दूजपुरी के बीच सिगरेट उठाने को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है।

पुलिस इस विवाद को मौत की परिस्थितियों से जोड़कर भी जांच कर रही है। हालांकि केवल विवाद सामने आने से यह साबित नहीं होता कि उसी कारण साधु की मौत हुई। इसके लिए पुलिस को दूसरे साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

यही इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक तरफ अनुयायियों ने मुख्य महंत पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस शुरुआती स्तर पर घटना से पहले हुए विवाद की जानकारी जुटा रही है।

जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि साधु और मुख्य महंत के बीच पहले से कोई विवाद था या मामला अचानक शुरू हुआ था।

मुख्य महंत समेत कई साधु हिरासत में

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य महंत दूजपुरी समेत कुछ अन्य साधुओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

सीआईए और एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ की टीमों के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे साफ है कि पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है। घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शिव शंकर पुरी की मौत कैसे हुई। क्या उनकी मौत मारपीट से हुई, पहले से कोई चोट थी या कोई दूसरी वजह थी, यह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से स्पष्ट होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही पुलिस यह भी देख रही है कि घटना के समय डेरे में कौन-कौन लोग मौजूद थे और मृतक की आखिरी बार किन लोगों से बातचीत या मुलाकात हुई थी।

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होगी।

इस रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि शरीर पर लगी चोटें कितनी गंभीर थीं और मौत का संभावित कारण क्या रहा। इसके अलावा चोटों का समय और उनकी प्रकृति भी जांच की दिशा तय करने में मदद कर सकती है।

जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरी जांच पूरी नहीं होती, तब तक मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस भी इसी आधार पर फिलहाल सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

अगर जांच में हत्या के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो पुलिस उसी आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। वहीं अगर मौत का कोई दूसरा कारण सामने आता है तो जांच उसी दिशा में आगे जाएगी।

तीन महीने पहले यूपी से आया था साधु

रिपोर्टों के मुताबिक मृतक साधु शिव शंकर पुरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से था और करीब तीन महीने पहले ही बाबा राजपुरी डेरे में आया था। यहां वह मुख्य महंत के पास रह रहा था।

कम समय पहले डेरे में आने के कारण पुलिस उसके पिछले जीवन और संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है। जांच में यह देखा जा सकता है कि वह इससे पहले कहां रहता था और डेरे में आने के बाद उसका किन लोगों से संपर्क रहा।

हालांकि इस बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मृतक की निजी जिंदगी या उसके पुराने संबंधों को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

फिलहाल पुलिस का ध्यान घटना की परिस्थितियों और डेरे में हुई गतिविधियों पर है।

ऐतिहासिक है बाबा राजपुरी डेरा

गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला स्थान माना जाता है। रिपोर्टों में इसे कई सौ वर्ष पुरानी संत परंपरा से जुड़ा बताया गया है।

डेरे की महंत परंपरा में कई संतों के नाम जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार तोतापुरी भी इस परंपरा से जुड़े रहे हैं। तोतापुरी का नाम रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक यात्रा से भी जोड़ा जाता है।

इसी कारण इस डेरे का आसपास के क्षेत्र में धार्मिक महत्व है। यहां समय-समय पर श्रद्धालु और साधु पहुंचते हैं। बाबा लदाना में होने वाले धार्मिक आयोजनों में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते रहे हैं।

ऐसे स्थान पर साधु की संदिग्ध मौत की खबर सामने आने से अनुयायियों में नाराजगी होना स्वाभाविक है। पुलिस के सामने चुनौती यह भी है कि जांच के साथ-साथ डेरे में शांति व्यवस्था बनी रहे।

डेरे के पास बड़ी संपत्ति और पशुधन

स्थानीय रिपोर्टों में बाबा राजपुरी डेरे से जुड़ी करीब 80 एकड़ भूमि और लगभग 135 पशुओं का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि इनमें कई पशु श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हैं।

डेरे के परिसर में पुराने पेड़ और धार्मिक महत्व वाले स्थान भी बताए जाते हैं। यही वजह है कि बाबा लदाना का यह डेरा आसपास के लोगों के लिए सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा भी है।

हालांकि वर्तमान साधु की मौत का इन संपत्तियों या डेरे की जमीन से कोई संबंध है या नहीं, ऐसी कोई बात अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले को फिलहाल केवल मौत और उससे जुड़े आरोपों तक ही सीमित रखना उचित है।

पुलिस बल क्यों तैनात किया गया?

साधु की मौत की खबर के बाद बड़ी संख्या में अनुयायी और ग्रामीण डेरे में जमा हो गए। मुख्य महंत पर आरोप लगाए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण होने की सूचना सामने आई।

ऐसी स्थिति में पुलिस का मौके पर रहना जरूरी हो जाता है, ताकि किसी तरह का टकराव न हो। पुलिस ने डेरे में अपनी मौजूदगी बनाए रखी है और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।

अगर जांच के दौरान किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो पुलिस उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी। फिलहाल मुख्य महंत समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

आगे की जांच में क्या-क्या साफ होगा?

अब जांच के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि शिव शंकर पुरी की मौत कब और कैसे हुई।

इसके बाद पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि मौत से पहले उनके साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे। डेरे के अंदर लगे किसी सीसीटीवी कैमरे या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से भी जानकारी मिल सकती है, अगर ऐसी व्यवस्था वहां मौजूद हो।

इसके अलावा पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों और डेरे में रहने वाले दूसरे साधुओं के बयान दर्ज कर सकती है। घटनास्थल से मिले साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी इन बयानों के साथ मिलाकर देखा जाएगा।

इन सभी जानकारियों के बाद ही मामले की तस्वीर ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।

फिलहाल आरोप और जांच के बीच अंतर जरूरी

इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि मुख्य महंत पर हत्या का आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

दूसरी तरफ साधु के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात कई रिपोर्टों में सामने आई है। इससे पुलिस जांच में हत्या की आशंका का पहलू महत्वपूर्ण हो गया है। लेकिन मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और आगे की जांच से ही स्पष्ट होगा।

इसलिए खबर को संतुलित तरीके से देखना जरूरी है। अनुयायियों के आरोप अपनी जगह हैं और पुलिस की जांच अपनी जगह।

जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि घटना में कौन जिम्मेदार है और उसके खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

कैथल के बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में साधु शिव शंकर पुरी की संदिग्ध मौत ने इलाके में चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है। शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद अनुयायियों ने मुख्य महंत दूजपुरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पुलिस ने मुख्य महंत समेत कुछ साधुओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। शुरुआती जांच में सिगरेट उठाने को लेकर विवाद की बात भी सामने आई है। हालांकि इस विवाद और साधु की मौत के बीच सीधा संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ लोगों से पूछताछ कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आगे बढ़ने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और जिम्मेदार व्यक्ति या लोगों के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी।

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