कैथल में C-Section डिलीवरी का बड़ा अंतर: निजी अस्पतालों में 55%, सरकारी में 24.68% सिजेरियन

कैथल में सिजेरियन डिलीवरी के आंकड़ों ने बढ़ाए सवाल
कैथल में 55% सिजेरियन डिलीवरी: सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़ों में बड़ा अंतर, स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच
कैथल /12 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कैथल जिले में अप्रैल से जून के बीच दर्ज हुए प्रसव के आंकड़ों ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते तीन महीनों में जिले भर में कुल 2,951 डिलीवरी हुईं, जिनमें से 1,193 मामले सिजेरियन ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के रहे।
इन आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन की दर 55 प्रतिशत से भी अधिक रही। इसके विपरीत, सरकारी अस्पतालों में कुल डिलीवरी में से 25 प्रतिशत से भी कम सिजेरियन ऑपरेशन किए गए। दोनों क्षेत्रों के बीच का यह बड़ा अंतर अब चर्चा का विषय बन गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में सिजेरियन डिलीवरी की दर 10 से 15 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। जब यह दर 15 प्रतिशत से अधिक होती है, तो यह माना जाता है कि बिना चिकित्सकीय जरूरत के भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। कैथल के निजी अस्पतालों का आंकड़ा इस मानक से लगभग चार गुना अधिक है।
सरकारी और निजी अस्पतालों की तुलनात्मक रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच सरकारी अस्पतालों में कुल 1,422 महिलाओं का प्रसव हुआ। इनमें से 351 प्रसव सिजेरियन विधि से कराए गए। इस तरह सरकारी क्षेत्र में सिजेरियन प्रसव की दर 24.68 प्रतिशत दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर, इसी समय अवधि में निजी अस्पतालों में कुल 1,529 डिलीवरी कराई गईं। इनमें से 842 प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए हुए। इस प्रकार निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की दर 55.07 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कुल मामलों के आधे से भी अधिक है।
सरल शब्दों में कहें तो सरकारी अस्पतालों में हर चार में से लगभग एक प्रसव ऑपरेशन से हुआ। वहीं निजी अस्पतालों में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही, जहां हर दो में से एक से अधिक प्रसव के लिए ऑपरेशन का सहारा लिया गया।
कुल सिजेरियन में निजी क्षेत्र का 71 प्रतिशत योगदान
जिले में हुई कुल डिलीवरी में सरकारी और निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी लगभग बराबर रही। कुल 2,951 प्रसवों में से 52 प्रतिशत निजी अस्पतालों में और 48 प्रतिशत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में हुए।
लेकिन जब बात केवल सिजेरियन प्रसव की आती है, तो संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। जिले में हुए कुल 1,193 सिजेरियन ऑपेरशनों में से अकेले निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत रही।
इसके मुकाबले, सरकारी अस्पतालों ने 48 प्रतिशत डिलीवरी कराने के बावजूद कुल सिजेरियन मामलों में केवल 29 प्रतिशत की भागीदारी दर्ज की। यह अंतर दर्शाता है कि निजी केंद्रों में सिजेरियन को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऑपरेशन की आवश्यकता और चिकित्सकीय कारण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सिजेरियन एक गंभीर शल्य प्रक्रिया (सर्जरी) है। इसका उपयोग केवल उसी स्थिति में किया जाना चाहिए जब सामान्य प्रसव से मां या बच्चे की जान को खतरा हो।
डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भस्थ शिशु के दिल की धड़कन अचानक असामान्य होना, प्रसव पीड़ा का आगे न बढ़ना, या बच्चे का पेट में गलत स्थिति (उल्टा) में होना सी-सेक्शन के मुख्य कारण होते हैं।
इसके अलावा, प्लेसेंटा (गर्भनाल) से जुड़ी गंभीर समस्याएं, मां को उच्च रक्तचाप या मधुमेह होना जैसी स्थिति में भी सिजेरियन ऑपरेशन करना अनिवार्य हो जाता है।
निजी अस्पतालों में बढ़ती दर के पीछे के मुख्य कारण
देशभर में हुए विभिन्न अध्ययनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो निजी अस्पतालों में सिजेरियन दर अधिक होने के पीछे केवल चिकित्सकीय कारण ही जिम्मेदार नहीं हैं। इसमें व्यावसायिक और व्यवहार्य कारण भी शामिल हैं।
पहला कारण यह है कि सिजेरियन ऑपरेशन में समय की बचत होती है और अस्पताल के लिए आर्थिक रूप से अधिक लाभ होता है। सामान्य प्रसव में कई बार 12 से 24 घंटे का समय लग जाता है, जबकि ऑपरेशन आधे से एक घंटे में पूरा हो जाता है।
दूसरा कारण प्रसूता और परिजनों का डर भी है। प्रसव पीड़ा के डर से कई परिवार खुद ही ऑपरेशन की मांग करते हैं। निजी अस्पताल अक्सर परिजनों को जोखिम का हवाला देकर ऑपरेशन के लिए आसानी से तैयार कर लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के संकेत
मामला सामने आने के बाद कैथल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रेणु चावला ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जिले के सभी अस्पतालों के प्रसव आंकड़ों पर निरंतर नजर रखता है।
सीएमओ ने बताया कि वे स्वयं हर दो महीने में इन आंकड़ों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, हालिया आंकड़ों में आए बड़े अंतर को देखते हुए अब अस्पतालों के रिकॉर्ड का अधिक गहराई से ऑडिट किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग अब उन निजी अस्पतालों की विशेष जांच करवाएगा जहां सिजेरियन दर असामान्य रूप से अधिक है। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या किए गए सभी ऑपरेशन चिकित्सकीय रूप से जरूरी थे या नहीं।
अनिवार्य ऑडिट और प्रशासनिक सख्ती की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़े जुटाने से स्थिति में सुधार नहीं होगा। इसके लिए निजी अस्पतालों में होने वाले हर सिजेरियन प्रसव का 'मेडिकल ऑडिट' अनिवार्य किया जाना चाहिए।
यदि किसी अस्पताल में बिना ठोस डॉक्टरी कारण के ऑपरेशन किया पाया जाता है, तो संबंधित डॉक्टर और संस्थान पर प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। इससे गैर-ज़रूरी ऑपरेशनों पर लगाम लग सकेगी।
साथ ही, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है कि सामान्य प्रसव मां और बच्चे दोनों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक माध्यम है।
कैथल जिले में अप्रैल से जून के आंकड़ों के आधार पर सरकारी और निजी अस्पतालों का तुलनात्मक विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| विवरण / मानक | सरकारी अस्पताल | निजी अस्पताल | कुल योग / अंतर |
|---|---|---|---|
| कुल प्रसव (Deliveries) | 1,422 (48.19%) | 1,529 (51.81%) | 2,951 |
| सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) | 351 | 842 | 1,193 |
| सिजेरियन दर (C-Section Rate) | 24.68% (हर 4 में से 1) | 55.07% (हर 2 में से 1 से अधिक) | 40.43% (औसत) |
| कुल सिजेरियन में हिस्सेदारी | 29.42% | 70.58% | 100% |
| डब्ल्यूएचओ (WHO) का मानक | 10% - 15% | 10% - 15% | मानक से काफी अधिक |