कैथल: वर्ष 2017 के बहुचर्चित हत्या मामले में अदालत का बड़ा फैसला, पांच दोषियों को उम्रकैद और दो लाख 42 हजार रुपये जुर्माना

कैथल में करीब नौ साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साेमवार काे कैथल की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. नंदिता कौशिक की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। यह पूरा मामला वर्ष 2017 में गांव पाडला में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने से जुड़ा हुआ है। अदालत ने गांव पाडला निवासी देवेंद्र, संजीव, मनीराम, श्रीभगवान और सुभाष को दोषी करार दिया है। सभी दोषियों को उम्रकैद के साथ-साथ प्रत्येक को दो लाख 42 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई है। यदि कोई दोषी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
घटना की पूरी जानकारी और पुलिस शिकायत
पुलिस के अनुसार गांव मालखेड़ी निवासी मोहित ने सदर थाना में इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के मुताबिक तीन मार्च 2017 को वह अपने दोस्त दिल्लोंवाली निवासी प्रदीप के साथ सांघन में एक शादी समारोह में गया था। रात करीब 11 बजे दोनों बाइक से गांव पाडला की ओर लौट रहे थे। उनके साथ एक अन्य दोस्त भी था, जिसे उन्होंने रास्ते में गांव के बीच में ही छोड़ दिया था। इसके बाद प्रदीप और मोहित गांव की एक गली से पैदल गुजर रहे थे। इसी दौरान प्रदीप ने अपनी बाइक रोककर एक मकान से आवाज लगाकर एक लड़की को बातचीत के लिए बाहर बुलाया था। आरोप है कि उस लड़की ने दोनों युवकों को वहां से तुरंत जाने के लिए कहा था। लड़की ने उन्हें बताया था कि उसका चाचा वहां आ रहा है। इसी बीच परिवार के कई लोग कथित तौर पर हथियार लेकर मौके पर पहुंच गए थे।
युवकों के साथ मारपीट और हत्या की वारदात
आरोपियों ने दोनों युवकों की बाइक को गिरा दिया और उन्हें जबरन पकड़कर घर के अंदर ले गए। वे दोनों युवकों को खींचकर एक बाड़े में ले गए जहां उनके हाथ बांध दिए गए। इसके बाद आरोपियों ने दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस भयानक मारपीट में प्रदीप की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहित गंभीर रूप से घायल हो गया था। अगली सुबह मोहित के परिजन मौके पर पहुंचे और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया। इस शिकायत के आधार पर सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी थी।
25 गवाह और 95 पेज के फैसले के आधार पर सजा
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मामले से जुड़े सभी ठोस साक्ष्य जुटाकर अदालत में चालान पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक कुलदीप गर्ग ने पूरी पैरवी की थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में कुल 25 गवाह पेश किए गए थे। अदालत ने सभी गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया था। इसके बाद 95 पृष्ठ के लंबे फैसले में पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। सोमवार को अदालत ने अपने इस फैसले में सभी पांचों दोषियों को उम्रकैद और 2.42 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।