कैथल: पंचायत भूमि लीज अनियमितताओं के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, जांच की मांग

कैथल: पंचायत भूमि लीज अनियमितताओं के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, जांच की मांग

कैथल जिले में पंचायत भूमि की लीज से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। गांव भूना की पंचायत भूमि से संबंधित कथित अनियमितताओं और नियम विरुद्ध लीज के खिलाफ ग्रामीणों ने आवाज उठाई है। पंचायत को हुए आर्थिक नुकसान के विरोध में ग्रामीणों ने बुधवार को जिला सचिवालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से पंचायत भूमि की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा लीज प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही पंचायत को हुए आर्थिक नुकसान की पूरी रिकवरी कराने की भी मांग की गई है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला एक जुलाई 2026 का है। इस दिन पंचायत भूमि की करीब एक वर्ष की लीज भंवरी देवी के नाम जारी की गई थी। इस मामले में सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी, गुहला की ओर से एक महत्वपूर्ण आदेश आया था। सहायक कलेक्टर की तरफ से 24 अगस्त 2026 को इस लीज को निरस्त कर दिया गया था। इसके साथ ही लीज प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के भी कड़े निर्देश दिए गए थे। लेकिन ग्रामीणों का यह मुख्य आरोप है कि इन आदेशों के बावजूद भी पूरी प्रक्रिया का सही से पालन नहीं किया गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कई गंभीर खुलासे किए हैं। ज्ञापन में बताया गया है कि एक जुलाई को हुई बोली के दौरान भंवरी देवी स्वयं वहां मौजूद नहीं थीं। वह अपने किसी भी प्रतिनिधि के रूप में भी वहां उपस्थित नहीं थीं। इन सब के बावजूद ग्राम सरपंच और ग्राम सचिव की ओर से उनके पक्ष में लीज जारी कर दी गई थी। ग्रामीणों ने अब इस पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में यह विशेष उल्लेख भी किया गया है कि भंवरी देवी के आधार कार्ड में 14 जुलाई 2026 को ग्राम भुना का पता दर्ज हुआ है। जबकि दूसरी तरफ वोटर रिकॉर्ड में उनका पता किसी अन्य स्थान का बताया जा रहा है।

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सरपंच और पंचायत सचिव की विभागीय जांच की मांग

ग्रामीणों ने सहायक कलेक्टर के 24 अगस्त के आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन करवाने की मांग उठाई है। उन्होंने मांग की है कि लीज वाली जमीन का कब्जा तुरंत ग्राम पंचायत भुना को दिलाया जाए। इसके साथ ही सरपंच और पंचायत सचिव की विभागीय जांच करवाने की भी पुरजोर मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में भंवरी देवी के अलावा भाजपा के पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है। ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि पंचायत भूमि की पूरी बोली प्रक्रिया में कुलवंत बाजीगर की भी भूमिका रही है।

कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है। तो संबंधित सभी लोगों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और एफआईआर दर्ज की जाए। इसके अलावा ग्रामीणों ने नहरी खाल वाली जमीन की भी विशेष मांग की है। उन्होंने राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग से इस जमीन की संयुक्त जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि पंचायत की जमीन गांव की एक सार्वजनिक संपत्ति होती है। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता या फिर निजी लाभ का प्रयास बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने की मांग दोहराई है। पंचायत को हुए नुकसान की भरपाई यानी रिकवरी करने की भी मांग की गई है। इसके साथ ही पंचायत भूमि को अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त करवाने की मांग की गई है। मुक्त करवाकर इस भूमि को वापस ग्राम पंचायत को सौंपने की मांग की गई है। इस पूरे मामले पर पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर का भी बयान सामने आया है। पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने कहा है कि यह करीब पांच हजार की आबादी वाला एक बड़ा गांव है। इस गांव में राजपूत, कश्यप और गुर्जर समाज के लोग बहुतायत संख्या में रहते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा लोग ही इस मुद्दे को बार-बार हवा दे रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि उन लोगों से भी यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उनके पास खुद कितने साल की लीज है।

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