कैथल में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल और जांच कमेटी गठित

कैथल जिले में प्रसव के बाद दो महिलाओं की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों महिलाओं की डिलीवरी गांव करोड़ा और किठाना स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में हुई थी। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण दोनों की हालत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया गया था। यहाँ डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद एक महिला की रविवार दोपहर और दूसरी महिला की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। दोनों महिलाओं की यह दूसरी डिलीवरी थी।
परिवारों में छाया मातम और बिना पोस्टमार्टम के शव ले गए परिजन
महिलाओं की मौत की सूचना मिलते ही दोनों परिवारों में गहरा मातम छा गया। परिजनों ने शवों का पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया और वे शवों को अपने साथ ले गए। एक ही दिन में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत की इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के दौरान मिलने वाली सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ा और किठाना स्वास्थ्य केंद्र में दोनों महिलाओं का प्रसव कराया गया था और स्थिति बिगड़ने पर उन्हें जिला नागरिक अस्पताल भेजा गया था जहाँ उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच कमेटी
स्वास्थ्य विभाग ने इन दोनों मौतों को बेहद गंभीरता से लिया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी इस बात का पता लगाएगी कि प्रसव के दौरान और उसके बाद महिलाओं को किस स्तर पर उपचार मिला, स्वास्थ्य केंद्र से नागरिक अस्पताल रेफर करने में कितना समय लगा और क्या उपचार में किसी प्रकार की कोई कमी रही थी।
सिविल सर्जन ने दी मामले की जानकारी
जिला सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने इस संबंध में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि करोड़ा और किठाना स्वास्थ्य केंद्रों में दोनों महिलाओं की डिलीवरी हुई थी। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया गया था जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उन्होंने आगे बताया कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है।
दोषियों के खिलाफ होगी विभागीय कार्रवाई
सिविल सर्जन ने बताया कि संबंधित पीएचसी और सीएचसी के स्टाफ, आशा वर्कर और पीड़ित परिवार के सदस्यों को इस पूरी जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और पूरे मामले की गहराई से समीक्षा की जाएगी। महिलाओं की मौत के वास्तविक कारणों का इस जांच के जरिए पता लगाया जाएगा। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर किसी की भी लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी हिन्दुस्थान समाचार द्वारा दी गई है।