कैथल में लिंगानुपात सुधारने के लिए प्रशासन सख्त, अल्ट्रासाउंड और एमटीपी केंद्रों पर कसेगा शिकंजा

कैथल में लिंगानुपात सुधारने के लिए प्रशासन सख्त, अल्ट्रासाउंड और एमटीपी केंद्रों पर कसेगा शिकंजा

कैथल में लिंगानुपात सुधारने और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने जिले में अल्ट्रासाउंड व एमटीपी केंद्रों की निगरानी बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन की ओर से सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

लघु सचिवालय में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की मासिक बैठक आयोजित की गई। इसके अलावा जिला स्तरीय कमेटी की भी बैठक हुई। एडीसी सुशील कुमार ने अधिकारियों को जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों, एमटीपी केंद्रों और मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि वे इन केंद्रों का औचक निरीक्षण करें। एडीसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जांच के दौरान यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

गर्भवती महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की निगरानी में आशा वर्कर और एएनएम की भूमिका बेहद अहम है। आशा वर्कर और एएनएम के माध्यम से संदिग्ध मामलों पर विशेष नजर रखी जाएगी। अवैध गतिविधि की कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध एमटीपी किट की बिक्री को पूरी तरह रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की विशेष जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर डिकॉय ऑपरेशन के जरिए भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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प्रशासन का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से ही लिंगानुपात में सुधार संभव नहीं है। इसके लिए आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। आशा वर्कर, एएनएम और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता का यह संदेश समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की स्थिति और जांच

सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जिले में फिलहाल कुल 31 पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं। डिप्टी सिविल सर्जन के नेतृत्व वाली टीम इन सभी केंद्रों की हर माह नियमित तौर पर औचक जांच कर रही है। जांच की इस प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जाती है। इसके साथ ही केंद्रों पर सभी आवश्यक दस्तावेजों की भी पूरी जांच की जाती है।

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