देहदान कर कमलेश रानी इन्सां ने छोड़ी मानवता की मिसाल, बेटियों ने कंधा देकर दिया समानता का संदेश

देहदान कर कमलेश रानी इन्सां ने छोड़ी मानवता की मिसाल, बेटियों ने कंधा देकर दिया समानता का संदेश
- 66 वर्षीय कमलेश रानी की पार्थिव देह मेडिकल शोध के लिए दान, अंतिम यात्रा में गूंजे शरीरदानी कमलेश रानी अमर रहे के नारे
ऐलनाबाद/ 18 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
अंतिम सांस के बाद भी समाज के काम आने की सोच ने ऐलनाबाद की 66 वर्षीय कमलेश रानी इन्सां को एक प्रेरणादायी पहचान दे दी है। उनके निधन के बाद परिजनों ने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की देहदान की शिक्षा से प्रेरित होकर उनकी पार्थिव देह मेडिकल शोध कार्यों के लिए दान कर दी है। कमलेश रानी इन्सां की देह उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित जीएस मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा को शोध कार्यों के लिए सौंपी गई है।
अंतिम यात्रा में गूंजे शरीरदानी कमलेश रानी अमर रहे के नारे
कमलेश रानी इन्सां को अंतिम विदाई देने के लिए ऐलनाबाद ब्लॉक और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साध-संगत, परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण पहुंचे थे। आवास पर अरदास के बाद फूलों से सजी एंबुलेंस में पार्थिव देह रखी गई थी। इसके बाद ममेरा रोड होते हुए मुख्य बाजार तक अंतिम विदाई यात्रा निकाली गई थी। यात्रा के दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों, साध-संगत और शहर वासियों ने शरीर दानी कमलेश रानी इन्सां अमर रहे और जब तक सूरज चांद रहेगा, कमलेश रानी इन्सां तेरा नाम रहेगा जैसे नारे लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

बेटी-बेटे की समानता का दिखा अनूठा उदाहरण
कमलेश रानी इन्सां की अंतिम यात्रा में बेटा-बेटी एक समान की शिक्षा का अनूठा उदाहरण देखने को मिला था। उनकी पुत्रवधुओं सोनिया, मंजू, अनिता और निशा, पुत्री शिल्पा रानी, परियों साक्षी व कंचन सहित पुत्र सोनू, सुशील, पवन और रिंकू इन्सां ने अर्थी को कंधा दिया था। परिजनों के इस कदम की मौजूद लोगों ने सराहना की थी और इसे बेटियों व बहुओं को समान सम्मान देने का सशक्त संदेश बताया था।
समाज के लिए प्रेरणादायी है देहदान का निर्णय
नगर पार्षद सत्यनारायण पांडिया और सुभाष चंद्र ने कहा कि कमलेश रानी इन्सां के परिजनों का देहदान का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी है। देहदान से मेडिकल शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलता है तथा भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि परिवार की यह पहल अन्य लोगों को भी समाजहित में देहदान के लिए प्रेरित करेगी।