करनाल के गगसीना में आयोजित एकता संकल्प दिवस, रणदीप सुरजेवाला ने नायब सैनी सरकार पर बोला तीखा हमला

करनाल के गगसीना में आयोजित एकता संकल्प दिवस, रणदीप सुरजेवाला ने नायब सैनी सरकार पर बोला तीखा हमला

एकता संकल्प दिवस गगसीना, करनाल ।

हरियाणा हो या देश, असलियत यह है कि “अन्याय” और “अहंकार” ही आज के हुक्मरानों का चेहरा है ।

आज न्याय माँगना अपराध हो गया है ।

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पर अन्याय सहना भी महापाप है ।

हमारे बेटे बेटियाँ जंतर मंतर पर पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे और बीजेपी सरकार उन पर पैलेट गन, कील लगी लाठियां और अश्रु गैस के गोले दाग़ रही थी ।

अंबाला में हमारे सिख भाई पंजोखड़ा साहिब गुरुद्वारा में संगत पर हुए जानलेवा हमले को लेकर गुरसिमरन मंड और अन्य दोषियों के खिलाफ न्याय माँग रहे थे और नायब सैनी सरकार उन्हें लाठियां मार रही थी ।

जीवन हत्या कांड, हिसार में परिवार जन स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री से हांसी में न्याय माँग रहे थे और पुलिस उन्हें लाठियों से पीट रही थी ।

पिछड़े वर्ग की होनहार भिवानी की बेटी मनीषा का परिवार उसके हत्यारों का सुराग ढूंढने व उन्हें पकड़ने हेतु बीजेपी सरकार से न्याय मांग रहा था और बीजेपी सरकार “केस बंद” का बोर्ड लगा रही थी ।

इसलिए, कर्ण की भूमि करनाल से मिल कर अन्याय से लड़ने का आह्वान किया।

करनाल /16  अगस्त /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

करनाल (गगसीना): करनाल के गगसीना में आयोजित "एकता संकल्प दिवस" समारोह के जरिए प्रदेश और देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर हुक्मरानों पर तीखा हमला बोला गया। ऐतिहासिक कर्ण की भूमि करनाल की पावन धारा से एकजुट होकर हर तरह के अन्याय के खिलाफ एक बड़े जन आंदोलन और संघर्ष का स्पष्ट आह्वान किया गया।

समारोह में वक्ताओं ने वर्तमान सत्ता व्यवस्था की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि आज पूरे प्रदेश और देश में "अन्याय" और "अहंकार" ही हुक्मरानों का असली चेहरा बन चुका है। सत्ता के अहंकार में डूबी सरकारें आम जनता की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का काम कर रही हैं। आज के दौर में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की मांग करना जैसे सबसे बड़ा अपराध बना दिया गया है, लेकिन इसके साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि अन्याय के सामने झुकना और उसे खामोशी से सहना भी उससे बड़ा पाप है।

युवाओं और किसानों के मुद्दों पर घेराव

मंच से युवाओं, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों पर हुए अत्याचारों के कई उदाहरण सामने रखे गए:

  • जंतर-मंतर पर युवाओं का संघर्ष: देश के शिक्षित बेटे-बेटियां जब पेपर लीक और लगातार बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सड़क पर उतरकर जंतर-मंतर पर अपना अधिकार मांग रहे थे, तब सरकार ने संवाद करने के बजाय उन पर आंसू गैस के गोले, लाठियां और कड़े बल प्रयोग का सहारा लिया।
  • धार्मिक और सामाजिक भावनाएं: अंबाला में सिख समुदाय के लोग पंजोखड़ा साहेब गुरुद्वारा संगत पर हुए हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन जनता की बात सुनने के बजाय सरकार की पुलिस ने उन पर ही बल प्रयोग किया।
  • हिसार और भिवानी के चर्चित मामले: हिसार के जीवन हत्याकांड में जब पीड़ित परिवार स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगा रहा था, तब उन्हें आश्वासन देने के बजाय पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ीं। इसी तरह भिवानी की पिछड़े वर्ग की बेटी मनीषा के मामले में परिवार न्याय और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग करता रहा, लेकिन जांच एजेंसियों और सरकार का रुख पूरी तरह उपेक्षापूर्ण रहा।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला रविवार को करनाल जिले के गगसीना गांव में आयोजित “एकता संकल्प दिवस” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई मुद्दों पर आरोप लगाए। सुरजेवाला ने कहा कि आज अन्याय और अहंकार ही हुक्मरानों का चेहरा बन गया है। न्याय मांगना अपराध माना जा रहा है, लेकिन अन्याय सहना महापाप है। उन्होंने कर्ण की भूमि करनाल से अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता, ग्रामीण और पार्टी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सुरजेवाला के पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। दैनिक भास्कर सहित स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को अहंकार छोड़कर जमीन पर उतरना होगा। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर से उतरकर चुटकुले सुनाने से काम नहीं चलेगा। अगर सरकार जनता की आवाज नहीं सुनेगी तो हरियाणा के लोग उसे अर्श से फर्श पर ला सकते हैं।

सुरजेवाला ने अपने संबोधन और सोशल मीडिया पोस्ट में कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उन पर पैलेट गन, कील लगी लाठियां और अश्रुगैस के गोले दागे। उन्होंने कहा कि युवा केवल शिक्षा, हुनर और अवसर की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा।

अंबाला में गुरुद्वारा पंजोखड़ा साहिब से जुड़ी घटना और उसके बाद सिख संगत के प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गुरसिमरन मंड और अन्य आरोपियों के खिलाफ न्याय मांग रहे सिख भाइयों पर नायब सैनी सरकार की पुलिस ने लाठियां चलाईं। इससे पहले भी उन्होंने अंबाला घटना को “नफरत का काला दिन” बताया था और न्यायिक जांच की मांग की थी।

हिसार के जीवन हत्याकांड का जिक्र करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर हांसी में परिवारजन मुख्यमंत्री से न्याय मांग रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटा। उन्होंने कहा कि जिस परिवार का सदस्य मारा गया हो, उसके गुस्से को समझना चाहिए था। मुख्यमंत्री को अभिभावक की भूमिका निभानी चाहिए थी, न कि पुलिस कार्रवाई करवानी चाहिए थी।

भिवानी की मनीषा हत्याकांड (या संबंधित मामले) का भी उल्लेख किया गया। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्ग की होनहार बेटी मनीषा के परिवार ने हत्यारों का सुराग ढूंढने और उन्हें पकड़ने के लिए न्याय मांगा, लेकिन सरकार ने “केस बंद” का रुख अपनाया। इससे पहले भी उन्होंने इस मामले में सीबीआई रिपोर्ट और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

सुरजेवाला ने हरियाणवी संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कुर्ता-पायजामा और पगड़ी संबंधी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये हरियाणा की संस्कृति और बुजुर्गों की शान का हिस्सा हैं। किसानों और हरियाणवी परंपराओं का अपमान स्वीकार्य नहीं है। अगर सरकार इसी तरह आवाज दबाएगी तो प्रदेश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह से जुड़े मंच विवाद का भी जिक्र किया गया। सुरजेवाला ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अलग बात है, लेकिन वरिष्ठ नेता को सम्मानजनक जगह न देना आम हरियाणवी के लिए मायने रखता है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित छुआछूत वाली घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों से जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान सुरजेवाला ने जोर दिया कि हरियाणा हो या देश, असली मुद्दा अन्याय के खिलाफ लड़ाई का है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि कर्ण की भूमि करनाल से एकजुट होकर अन्याय से लड़ें। उनके अनुसार, आज न्याय मांगना अपराध बन गया है, लेकिन अन्याय सहना महापाप है।

यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा स्थानीय स्तर पर आयोजित किया गया था। सुरजेवाला के बयान सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से साझा किए गए। उनके आधिकारिक अकाउंट पर पोस्ट किए गए संदेश में उपरोक्त बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल थे।

सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स में सामने नहीं आई। पुलिस कार्रवाइयों को लेकर सामान्यतः प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने का तर्क देता रहा है, जबकि विपक्ष इन्हें दमनकारी बताता है। अंबाला घटना पर पहले भी सिख संगठनों और कांग्रेस ने विरोध दर्ज कराया था, जबकि प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में बताई थी।

सुरजेवाला लंबे समय से हरियाणा कांग्रेस के प्रमुख चेहरे रहे हैं। वे राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। गगसीना कार्यक्रम उनके हालिया जनसंपर्क और सरकार के खिलाफ अभियान का हिस्सा लगता है। स्वतंत्रता दिवस के आसपास हुए विभिन्न प्रदर्शनों और घटनाओं को लेकर विपक्ष सक्रिय रहा है।

स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की भी भागीदारी रही। सुरजेवाला के संबोधन के बाद कार्यकर्ताओं ने एकता और न्याय की मांग वाले नारे लगाए। मीडिया रिपोर्ट्स में कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए गए, जिनमें सुरजेवाला मंच पर बोलते दिख रहे थे।

यह घटनाक्रम हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुद्दों पर तीखी बहस जारी है। युवा बेरोजगारी, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था और समुदाय विशेष के मुद्दे विपक्षी आलोचना का केंद्र बने हुए हैं। सुरजेवाला ने इन सबको जोड़ते हुए “एकता संकल्प” का आह्वान किया।

कुल मिलाकर, गगसीना का यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का मंच बना। सुरजेवाला के आरोप गंभीर हैं और इन्हें लेकर आगे राजनीतिक बहस जारी रह सकती है। जनता और मीडिया इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख पर नजर रखे हुए हैं।A

गगसीना में एकत्र हुए लोगों ने एक स्वर में कहा कि करनाल की इस ऐतिहासिक धरती से शुरू हुआ यह "एकता संकल्प" पूरे हरियाणा में न्याय की एक नई लहर पैदा करेगा। वक्ताओं ने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बिना किसी डर के एकजुट हों और शोषण व अन्याय करने वाली ताकतों के खिलाफ हर स्तर पर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ें।

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