मथाना में कश्यप सम्मेलन: राजनीतिक भागीदारी पर जोर, भाजपा शासन में प्रतिनिधित्व न मिलने पर जताई चिंता

राजनीतिक भागीदारी को लेकर कश्यप समाज ने मथाना में आयोजित कश्यप स मेलन में उठाई मजबूत आवाज ----
भाजपा के शासन में कश्यप समाज को उसकी अपेक्षा के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलना गंभीर चिंतन का विषय : बलजिंद्र कश्यप
सुरेश अरोड़ा /बाबैन/ 23 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कश्यप राजपूत महासभा का सम्मेलन गांव मथाना के सामुदायिक केंद्र में समाज के गणमान्य व्यक्तियों, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन कश्यप राजपूत महासभा के बैनर तले महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष परमजीत कौर कश्यप, वाईस चेयरमैन जिप व उपाध्यक्ष सीता कश्यप की देखरेख में किया गया। बैठक में समाज को संगठित करने, संगठन के विस्तार, नई टीम के गठन, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों, संगठनात्मक अनुशासन तथा कश्यप समाज की सामाजिक एवं राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर एवं सकारात्मक मंथन किया गया। बैठक का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के नेतृत्व को स्थापित करना नहीं, बल्कि कश्यप समाज की सामूहिक शक्ति को एक मंच पर लाना है। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों को जोड़कर ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।
संगठन के विस्तार और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन पर जोर
प्रदेशाध्यक्ष बलजिंदर सिंह कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन को केवल नाम और पदों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक पदाधिकारी को जमीन पर काम करना होगा और समाज के बीच अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति और सामाजिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। युवा शिक्षित बने, नशामुक्त रहे, संगठित रहे और आगे बढ़े के संकल्प को समाज के भविष्य की महत्वपूर्ण दिशा बताते हुए उन्होंने सभी सदस्यों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। महासभा की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह संगठन किसी व्यक्ति, संस्था या अन्य सामाजिक मंच के विरोध में खड़ा करने का प्रयास नहीं है। इसका मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, संवाद बढ़ाना, नई पीढ़ी को नेतृत्व देना और कश्यप समाज की सामूहिक आवाज को मजबूत करना है।
नवनियुक्त सदस्यों को सौंपे गए दायित्व और राजनीतिक भागीदारी पर मंथन
सम्मेलन में संगठन के विस्तार को गति देने के लिए नए सदस्यों को विभिन्न पदों एवं जिम्मेदारियों पर नियुक्त किया गया। नवनियुक्त पदाधिकारियों को उनके कार्यभार और दायित्वों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में समाज के लोगों से संपर्क स्थापित करें, नए सदस्यों को संगठन से जोड़ें तथा समाज की समस्याओं और सुझावों को संगठन के सामने रखें। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि कश्यप समाज की संख्या, सामाजिक योगदान और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए समाज को राजनीतिक व्यवस्था में अपेक्षित भागीदारी और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। वक्ताओं ने विशेष रूप से कहा कि भाजपा की लगातार तीन बार सरकार बनने के बावजूद कश्यप समाज को उसकी अपेक्षा के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलना गंभीर चिंतन का विषय है। समाज अब केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के विषय पर संगठित एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
सामूहिक एकता और गांव-गांव संगठन विस्तार का आह्वान
लोगों को संबोधित करते हुए सरदार तरसेम कश्यप ने समाज की वर्तमान परिस्थितियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता आज एकता और संगठन है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के लोग एक साझा मंच पर बैठकर अपनी समस्याओं और भविष्य की दिशा पर विचार नहीं करेंगे, तब तक समाज की सामूहिक शक्ति का सही उपयोग नहीं हो पाएगा। उन्होंने संगठन के विस्तार को गांव-गांव तक ले जाने तथा अधिक से अधिक सामाजिक एवं जागरूक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर तरेसम कश्यप अंबाला, सुशील कश्यप, रमेश कश्यप, राजेंद्र कश्यप दुधला, शमशेर कश्यप, ममता कश्यप, फतेह सिंह पूर्व सरपंच, रामेश्वर सरपंच छलौंदी, अंग्रेज सिंह पूर्व सरपंच आदि भारी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।