नरवाना में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया कृष्ण जन्माष्टमी पर्व,

नरवाना में जगह-जगह मनाया गया कृष्ण जन्माष्टमी पर्व,
श्री कृष्ण की झांकियों से सजे मंदिरों में हुई नंदलाला की जयकार
नरेंदर जेठी/नरवाना मंडी /05 सितंबर 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
नरवाना में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व क्षेत्र में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया। मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजी लगी रही।
रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारे गूंज उठे। नरवाना में प्राचीन शिव मन्दिर, धीरजा मन्दिर, बीरबल नगर शीशा वाला वैष्णो देवी मंदिर, मॉडल टाउन के नव दुर्गा मंदिर, पतराम नगर के दुर्गा मंदिर और सनातन धर्म मन्दिर सहित क्षेत्र के अन्य मंदिरों में झांकियां सजाई गईं। इन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण, कृष्ण-सुदामा, शिव शंकर और बाल कृष्ण की मनमोहक झांकियां सजाई गईं।
आकर्षक विद्युत सजावट और फूलों से मंदिरों को सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और बाल गोपाल को झूला झुलाकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान किया। मंदिरों में प्रसाद का वितरण भी किया गया।
जन्माष्टमी पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता रही। पुलिसकर्मी मंदिरों के आसपास और बाजारों में लगातार गश्त करते नजर आए। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस की विशेष निगरानी रही।
वहीं, श्रद्धालुओं ने नंदीशाला में पहुंचकर गायों को हरा चारा खिलाया। महिलाओं और पुरुषों ने गायों की सेवा कर पुण्य लाभ कमाया। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी और समाजसेवी के विचार
प्राचीन शिव मन्दिर के पुजारी पंडित मेहरचंद मुदगिल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश का संदेश दिया। जन्माष्टमी का पर्व हमें भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता समाजसेवी मोहनलाल गर्ग ने कहा कि पहली गाली पर सिर काटने की शक्ति होने के बाद भी यदि 99 और गाली सुनने की सामर्थ्य है, तो वह श्रीकृष्ण जी हैं। सुदर्शन जैसा शस्त्र अपने पास होने के बाद भी यदि हाथ में हमेशा मुरली है, तो वह श्रीकृष्ण जी हैं। द्वारिका का वैभव होने के बाद भी यदि सुदामा जैसा सच्चा मित्र है, तो वह श्रीकृष्ण जी हैं। मृत्यु के फन पर मौजूद होने पर भी यदि नृत्य करते हैं, तो वह श्रीकृष्ण जी हैं। सर्व सामर्थ्य होने पर भी यदि बहनोई के रथ पर सारथी बने हुए हैं, तो वह श्रीकृष्ण जी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लीलाओं का वर्णन अद्भुत है।