कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'अभ्युदय-2026' और विश्व उद्यमिता दिवस का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (USM) द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ‘अभ्युदय-2026’ इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन सीनेट हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नेतृत्व, प्रबंधन कौशल, बदलती चुनौतियों और व्यावहारिक जीवन में सफलता के महत्वपूर्ण सूत्रों से परिचित कराया गया।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा का मार्गदर्शन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि तकनीक, ज्ञान और कौशल के साथ विद्यार्थियों को बदलती चुनौतियों का सामना करना होगा। विश्वविद्यालय जीवन केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय नैक ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से विद्यार्थियों को बहुविषयक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नई क्षमताओं का विकास करें, तकनीक और ज्ञान के साथ स्वयं को निरंतर अपडेट रखें तथा अपने लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के साथ उन्हें प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें।
चेयरपर्सन प्रो. अनिल कुमार मित्तल का स्वागत संबोधन
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के चेयरपर्सन प्रो. अनिल कुमार मित्तल के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय जीवन के इस नए अध्याय के लिए शुभकामनाएं दीं और उनसे सीखने के प्रत्येक अवसर का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. सागर प्रीत हुड्डा के विचार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंडीगढ़ पुलिस के पुलिस महानिदेशक डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने विद्यार्थियों के साथ अपने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रभावी नेतृत्व के लिए उनमें त्वरित निर्णय क्षमता और तकनीकी दक्षता का होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण दौर में वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी तथा टैगोर हॉस्टल में रहकर अपनी तैयारी किया करते थे। उन्होंने पुलिस व्यवस्था के संदर्भ में प्रबंधन की बदलती चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज साइबर अपराध पारंपरिक अपराधों से बिल्कुल अलग प्रकृति के हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए तकनीक, रणनीति, त्वरित निर्णय क्षमता और नए प्रबंधकीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उनके अनुभवों और सहज संवाद ने विद्यार्थियों को सार्वजनिक सेवा तथा प्रभावी नेतृत्व के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराया।
पूर्व छात्र अभिनव राहुल और विशिष्ट वक्ता डॉ. आकाश चंदा के सत्र
USM के 1986-88 बैच के पूर्व छात्र एवं इम्पैक्ट मल्टीप्लायर के संस्थापक अभिनव राहुल ने विद्यार्थियों को प्रबंधन और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांतों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से 80ः20 सिद्धांत के माध्यम से प्राथमिकताओं के प्रभावी प्रबंधन की महत्ता समझाई। उन्होंने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि USM का पूर्व छात्र समुदाय अपने संस्थान और वर्तमान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। विशिष्ट वक्ता डॉ. आकाश चंदा ने अपने प्रभावशाली एवं संवादात्मक सत्र में सॉफ्ट स्किल्स, प्रभावी संचार और व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
सम्मान समारोह और धन्यवाद ज्ञापन
इस अवसर पर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने अपने पूर्व शिक्षक डॉ. महावीर सिंह को उनके उल्लेखनीय योगदान एवं सेवाओं के लिए सम्मानित किया, जिन्होंने संस्थान में लंबे समय तक सेवाएं प्रदान की और हाल ही में गुरु नानक खालसा कॉलेज, करनाल में कार्यभार ग्रहण किया है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सलोनी पवन दीवान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन अंशिका कथूरिया एवं भूमि अरोड़ा ने किया।
विश्व उद्यमिता दिवस समारोह का आयोजन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (IMS) तथा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (USM) द्वारा संयुक्त रूप से सीनेट हॉल में विशेष समारोह आयोजित किया गया। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि युवाओं की नवाचारी सोच से आत्मनिर्भर व विकसित भारत का स्वप्न पूरा होगा। भारत को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला देश बनना होगा। उन्होंने कहा कि उद्यमिता व्यक्तिगत आर्थिक सफलता के साथ-साथ राष्ट्रसेवा और रोजगार सृजन का माध्यम भी है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से 'मैं भी स्वदेशी समर्थक' बनने का आह्वान किया।