कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में स्थापित होगा लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में स्थापित होगा लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक साहित्य, लोककला, लोकगीत, लोकनाट्य, लोकभाषा एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस केंद्र के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित शोध, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण एवं प्रकाशन कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

हरियाणा की लोक संस्कृति का संरक्षण

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति में जनजीवन, सामाजिक मूल्य, कृषि संस्कृति, रीति-रिवाज, लोकगीत, लोककथाएं, लोकनाट्य एवं पारंपरिक कलाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय लंबे समय से इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय का रत्नावली समारोह हरियाणा की लोक संस्कृति, लोककला, लोकनृत्य, लोकगीत एवं लोकनाट्य को व्यापक मंच प्रदान करने वाला प्रमुख आयोजन है।

धरोहर हरियाणा संग्रहालय की सामग्री का होगा उपयोग

प्रोफेसर महासिंह पूनिया ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर हरियाणा संग्रहालय में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन, लोककला, लोक साहित्य, लोक वेशभूषा, पारंपरिक हस्तशिल्प एवं जीवन-पद्धति से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध है। संग्रहालय में उपलब्ध हरियाणा की लोक साहित्य एवं संस्कृति से संबंधित पुस्तकों तथा अन्य संदर्भ सामग्री का शोधार्थियों द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करने के लिए इन्हें हिंदी विभाग के कमरा नंबर-8 में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया है। हिंदी विभाग में हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति पर पहले से ही व्यापक अध्ययन एवं शोध कार्य किया जाता रहा है।

शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का होगा आयोजन

प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानमालाओं, शोध परियोजनाओं, प्रदर्शनियों तथा अन्य शैक्षणिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा सकेगा। इसके साथ ही लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण एवं प्रकाशन भी किया जा सकेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप मातृभाषा, लोकभाषा एवं स्थानीय सांस्कृतिक विरासत पर आधारित शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

शोध परियोजनाओं के संचालन के लिए बनेगी समिति

हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र की स्थापना तथा इससे जुड़ी शोध परियोजनाओं के संचालन के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया को समिति का संयोजक प्रस्तावित किया गया है। समिति में निदेशक, लोक संपर्क विभाग; निदेशक, युवा एवं सांस्कृतिक मामले; पुस्तकालयाध्यक्ष, जेएलएन पुस्तकालय; उपनिदेशक, लोक संपर्क विभाग; सहायक रजिस्ट्रार (सामान्य) तथा वित्त अधिकारी के प्रतिनिधि को सदस्य प्रस्तावित किया गया है। यह समिति शोध केंद्र की स्थापना, उपलब्ध साहित्य एवं संसाधनों के समुचित उपयोग तथा शोध परियोजनाओं को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Share:

Comments

Leave a comment