कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया राष्ट्रीय ध्वजारोहण

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आजादी की 80वीं वर्षगांठ के तहत स्वतंत्रता दिवस समारोह बहुत ही जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने राष्ट्रीय ध्वजारोहण किया। इसके बाद उन्होंने एनसीसी परेड की सलामी ली और शहीदों को नमन किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग, आईआईएचएस और यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मंच का संचालन युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने किया। इस अवसर पर डॉ. ममता सचदेवा, कुलसचिव लेफ्टिनेंट प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. जितेन्द्र शर्मा और प्रो. नरेन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सैनिकों को किया गया नमन
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को हमने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं पाई, बल्कि अपने आत्मसम्मान, अपनी पहचान और अपने उज्जवल भविष्य को भी पुनः प्राप्त किया। आज जब हम अपने तिरंगे को आकाश में लहराता हुआ देखते हैं, तो हमें उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की याद आती है। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाला लाजपत राय, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रानी लक्ष्मीबाई, वीर सावरकर, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और तमाम वीरों एवं महापुरुषों ने अपना सर्वस्व राष्ट्र को समर्पित कर दिया था।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि हरियाणा की धरती ने भी राव तुलाराम जैसे अनेक वीरों को जन्म दिया है। आज का दिन हम उन वीर सैनिकों को भी याद करते हैं जो विषम से विषम परिस्थितियों की परवाह न करते हुए हमारी सीमाओं पर खड़े होकर हमारी रक्षा करते हैं, ताकि हम अपने घरों में सुख-चैन से रह सकें। हाल ही में संपन्न हुआ 'आपरेशन सिंदूर' हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और अद्वितीय शौर्य का जीवंत उदाहरण है। वहां उन्होंने दुर्गम परिस्थितियों में असाधारण पराक्रम और अनुशासन का परिचय देते हुए राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखा। इस अभियान की सफलता हमारी सेना और हमारे शीर्षस्थ नेतृत्व के दृढ़ संकल्प, अटूट निष्ठा और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।
शिक्षा, खेल और पर्यावरण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियां
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आजादी के बाद 79 वर्षों में भारत ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा जगत में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कुवि हरियाणा का एकमात्र सरकारी विश्वविद्यालय है जिसे नैक द्वारा ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्लेटिनम अवार्ड से सम्मानित किया गया है। विश्वविद्यालय ने 40 से अधिक नए शैक्षणिक कार्यक्रम, 11 अप्रेंटिसशिप-आधारित डिग्री कार्यक्रम तथा अनेक शोध एवं नवाचार पहल शुरू की हैं। लगभग 75 पेटेंट प्रकाशित हुए हैं, जिनमें 37 पेटेंट स्वीकृत हो चुके हैं। दो इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से लगभग 100 स्टार्टअप पंजीकृत हैं।
खेलों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने लगातार दो वर्षों तक खेलो इंडिया पदक तालिका में देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के लिए 'एक विद्यार्थी, एक पेड़' के तहत प्रतिवर्ष लगभग 75,000 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा में उत्कृष्टता, शोध में वैश्विक पहचान, नवाचार में नेतृत्व, युवाओं में कौशल एवं उद्यमिता तथा पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को और अधिक उत्कृष्ट, आधुनिक, आत्मनिर्भर एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाना है।
विद्यार्थियों के कौशल विकास और एलुमनी सहयोग पर जोर
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सोच के अनुरूप विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों में कौशल विकास, उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास किए हैं। इसके परिणामस्वरूप आज हमारे विद्यार्थियों में नौकरी तलाशने के साथ-साथ स्वयं रोजगार पैदा करने और दूसरों को रोजगार देने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। विश्वविद्यालय की एलुमनी एसोसिएशन भी आज पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सक्रिय स्थिति में काम कर रही है। इन्हीं व्यवस्थाओं के माध्यम से अमेरिका में रहने वाले हमारे एक पूर्व विद्यार्थी ने विश्वविद्यालय को लगभग 5 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।
इस सहायता से विश्वविद्यालय में कैफेटेरिया और उसके सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गेस्ट हाउस परिसर में एलुमनी के सहयोग से दो वीवीआईपी सूट्स, लगभग 200 क्षमता वाला डायनिंग हॉल और लगभग 200 क्षमता वाला कांफ्रेंस हॉल भी विकसित किया जा रहा है। यह हमारे एलुमनी और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत होते रिश्ते का उदाहरण है। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों व गैर-शिक्षक कर्मचारियों को समय पर पदोन्नत किया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए अवार्ड देकर सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विकसित भारत 2047 और युवाओं की भूमिका
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश के लिए सपनों को सच करने का समय आ गया है। 2047 की घड़ी हमें पुकार रही है और यह पुकार भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की है। हम भारत के इस अमृत काल के सिपाही हैं। विकसित राष्ट्र बनने का यह स्वर्णिम अवसर है क्योंकि आज हम 4 ट्रिलियन जीडीपी के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और 2030 तक तीसरे स्थान तक पहुंचने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। 15 से 29 वर्ष के बीच के 37 करोड़ युवा भारत की बहुत बड़ी ताकत हैं। हम इन सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर, कौशल विकास कर, उद्यमिता व नवाचार की भावना विकसित करके इन्हें जॉब सीकर से जॉब प्रोवाइडर बना सकते हैं। एनईपी-2020 हमें इसके लिए प्रोत्साहित करती है।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी दिनचर्या में स्व का भाव विकसित करने के लिए हमारे विचार, हमारी व्यवस्था, वस्तुएं व वृत्ति का स्वदेशीकरण आवश्यक है। इन उपलब्धियों के लिए मैं आप सभी के सहयोग, सहभागिता और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक अभिनंदन एवं बधाई देता हूँ। उन्होंने कहा कि आइए, हम ऐसा भारत बनाएं जहां ज्ञान के साथ विनम्रता, शक्ति के साथ संवेदना, तकनीक के साथ मानवता, समृद्धि के साथ समावेशिता और आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा का गौरव हो। विकसित भारत के संकल्प के साथ हमारा प्रयास हो कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय पहचान स्थापित करे और भारत का अग्रणी विश्वविद्यालय बने। राष्ट्र सेवा, समाज के उत्थान और देश की प्रगति के लिए समर्पित जीवन ही स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।