कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में संत शिरोमणि गुरु रविदास की शिक्षाओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 10 सितंबर को और शिक्षक दिवस पर एट होम कार्यक्रम आज

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में संत शिरोमणि गुरु रविदास की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आगामी 10 सितंबर 2026 को केयू सीनेट हॉल में आयोजित होगी। इस एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्टडीज के अंतर्गत गुरु रविदास चेयर द्वारा इस कार्यक्रम को आयोजित किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय समकालीन समाज में संत शिरोमणि गुरु रविदास की शिक्षाओं का दर्शन एवं प्रासंगिकता रखा गया है।
संगोष्ठी के दौरान विद्वतजन संत गुरु रविदास के जीवन, उनके दर्शन तथा उनके सामाजिक चिंतन पर विचार-विमर्श करेंगे। इसके साथ ही भक्ति आंदोलन में उनके योगदान और समतामूलक समाज की परिकल्पना पर भी चर्चा की जाएगी। विद्वान लोग सामाजिक न्याय, जाति एवं सामाजिक पदानुक्रम की आलोचना, मानव गरिमा, समानता और बंधुत्व जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख केंद्रों में ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा, सामाजिक परिवर्तन, दलित चेतना, लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन तथा अंतरधार्मिक सद्भाव जैसे विषय भी शामिल होंगे। इसके अलावा गुरु रविदास की शिक्षाओं एवं संवैधानिक मूल्यों पर भी शोधपरक चर्चा होगी।
शोधपरक चर्चा में डॉ. बी. आर. अंबेडकर के सामाजिक न्याय संबंधी विचारों के साथ उनके विचारों की समानता पर भी बात की जाएगी। समकालीन भारत में गुरु रविदास के दर्शन की प्रासंगिकता और न्यायपूर्ण तथा मानवीय समाज के निर्माण में उनके योगदान पर भी चर्चा होगी। साहित्य, कला, संगीत एवं लोकप्रिय संस्कृति में गुरु रविदास के विचारों पर भी शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। वैश्वीकरण और आधुनिकता के संदर्भ में उनके चिंतन पर भी शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। डॉ. भीमराव अंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक एवं गुरु रविदास चेयर के कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रीतम सिंह ने इस पूरी जानकारी के बारे में अवगत कराया है।
डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षक, शोधकर्ता, शोधार्थी, विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य इच्छुक विद्वान अपने मौलिक शोधपत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। सभी प्रतिभागियों को अधिकतम 300 शब्दों का सारांश प्रस्तुत करना होगा। इस सारांश में शोध पत्र का शीर्षक, लेखक का नाम, संस्थागत संबद्धता, ई-मेल एवं संपर्क नंबर अंकित होना आवश्यक है। स्वीकृत सारांश के आधार पर ही प्रतिभागियों को पूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। प्रस्तुत किया जाने वाला शोधपत्र मौलिक, अप्रकाशित एवं शोध-पद्धति पर आधारित होना चाहिए।
संगोष्ठी में भाग लेने के लिए पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए 500 रुपये तथा शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों के लिए 700 रुपये पंजीकरण शुल्क तय किया गया है। पंजीकरण का यह कार्य 10 सितंबर को प्रातः 9 बजे से स्थल पर किया जाएगा। सभी प्रतिभागी पंजीकरण फॉर्म भरकर और निर्धारित शुल्क के साथ मौके पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल 19 प्रमुख उप-विषयों को शामिल किया गया है जिसमें गुरु रविदास का जीवन, दर्शन, सामाजिक चिंतन और समकालीन समाज की चुनौतियां शामिल हैं।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक अन्य कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर यानी शनिवार को सायं 6.30 बजे कुलगुरु निवास पर ‘एट होम’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा की तरफ से किया जा रहा है। यह आयोजन विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों के सम्मान में किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी है।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष शिक्षकों के सम्मान में ‘एट होम’ कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है। इसके साथ ही शिक्षकों के साथ एक आत्मीय संवाद स्थापित करना भी इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इस कार्यक्रम को सफल और गरिमापूर्ण स्वरूप प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें हॉर्टिकल्चर विभाग, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग, लोक सम्पर्क विभाग और मुख्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय शामिल हैं। इसके अलावा सामान्य शाखा, ललित कला विभाग, सेनिटेशन शाखा तथा निर्माण शाखा के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सभी अधिकारी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाएंगे।