कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विकसित भारत 2047 विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के ब्रोशर का हुआ विमोचन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विकसित भारत 2047 विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के ब्रोशर का हुआ विमोचन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लोक प्रशासन विभाग द्वारा 24 और 25 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी का विषय विकसित भारत 2047 न्यू पैराडाइम्स इन गवर्नेंस एम्पावरिंग सिटीजन्स एंड रीचिंग द लास्ट माइल रखा गया है। कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इस संगोष्ठी के ब्रोशर का आधिकारिक विमोचन किया है। इस अवसर पर कुलसचिव लै. प्रो. वीरेंद्र पाल, संगोष्ठी निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार और सह-निदेशक डॉ. ज्योति सहित विभाग के अन्य शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित रहे। यह पूरी संगोष्ठी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित की जा रही है।

विकसित भारत 2047 और सुशासन पर कुलगुरु के विचार

ब्रोशर विमोचन के दौरान कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 का विजन देश को आजादी के सौ वर्ष पूरे होने पर एक विकसित, समावेशी, नवाचारी और सतत समाज के रूप में स्थापित करने का संकल्प है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसी व्यवस्था से प्रत्येक नागरिक और विशेषकर अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक जन सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि लोक प्रशासन विभाग द्वारा चुना गया यह विषय बेहद समसामयिक और राष्ट्रीय महत्व का है, जिससे शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं को एक नई दिशा मिलेगी।

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डिजिटल पहलों और कल्याणकारी योजनाओं का महत्व

कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी, आधार आधारित सेवाएं, डिजिटल इंडिया मिशन, यूपीआई और ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म जैसी तमाम डिजिटल पहलों ने सेवा वितरण में पारदर्शिता को काफी बढ़ाया है और लीकेज को कम किया है। इसके अलावा आकांक्षी जिला कार्यक्रम, जल जीवन मिशन, पीएम गति शक्ति, आयुष्मान भारत, पीएम जन धन योजना, पीएम विश्वकर्मा और मिशन कर्मयोगी जैसे कार्यक्रम समावेशी विकास तथा प्रभावी शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को पूरी तरह दर्शाते हैं। कुलसचिव लै. प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि आज नागरिक सशक्तिकरण केवल कल्याणकारी योजनाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन, सहभागी निर्णय-प्रक्रिया, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य तक पहुंच, उद्यमिता, लैंगिक समानता और पंचायती राज संस्थाओं व शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से विकेंद्रीकृत शासन भी शामिल है।

संगोष्ठी में 30 से अधिक उप-विषयों पर होगी चर्चा

संगोष्ठी निदेशक एवं लोक प्रशासन विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार ने जानकारी दी कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में 30 से अधिक उप-विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इन प्रमुख उप-विषयों में नागरिक-केंद्रित शासन एवं जन सेवा वितरण, डिजिटल इंडिया व ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं स्मार्ट गवर्नेंस, सुशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही व नैतिकता शामिल हैं। इसके अलावा सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद, पंचायती राज एवं स्थानीय स्वशासन, शहरी शासन एवं स्मार्ट सिटी, महिला सशक्तिकरण, जनजातीय विकास एवं आकांक्षी जिले, स्वास्थ्य शासन एवं आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षा सुधार, सतत विकास लक्ष्य, जलवायु शासन, साइबर सुरक्षा व डेटा गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, शासन में युवाओं की भागीदारी, न्यायिक सुधार, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लिए भारत का वैश्विक नेतृत्व जैसे विषय भी शामिल हैं। सह-निदेशक डॉ. ज्योति ने बताया कि संगोष्ठी से जुड़ी हुई सभी प्रकार की विस्तृत जानकारी विभाग से प्राप्त की जा सकती है।

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में संत शिरोमणि गुरु रविदास चेयर द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे सीनेट हॉल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। यह संगोष्ठी वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के दर्शन एवं शिक्षा की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम के संरक्षक कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा होंगे। संगोष्ठी में डेरा सिरसागढ़ के मुख संचालक संत मंदीप दास जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि साहित्य अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री मुख्य वक्ता होंगे। इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. वीरेंद्र पाल सम्मानित अतिथि के रूप में और राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर के प्रो. रमेश धारीवाल तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. हरेंद्र सिंह असवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

गुरु रविदास जी के संदेश और समाज सुधार पर चर्चा

गुरु रविदास चेयर के सह-संयोजक डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के दर्शन, शिक्षाओं और सामाजिक चिंतन की समकालीन संदर्भ में प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करना है। गुरु रविदास जी ने हमेशा समानता, मानवता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया है। उनकी शिक्षाएं आज के समय में भी जातिगत भेदभाव, असमानता और विभिन्न सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में समाज का सही मार्गदर्शन करती हैं। इस अवसर पर गुरु रविदास चेयर के सदस्य दिविज गुगनानी, डॉ. हरिओम फुलिया और सह-संयोजक डॉ. प्रीतम सिंह भी मौजूद रहेंगे। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी बहुत बड़ी संख्या में भाग लेंगे।

हिंदी विभाग में छात्र मिलन समारोह का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा एक छात्र मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. ऋषि पाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने की। मुख्य अतिथि डॉ. ऋषि पाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा के साथ-साथ पत्रकारिता, जनसंचार, अनुवाद, लेखन, डिजिटल मीडिया और विभिन्न रचनात्मक क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं करियर के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संप्रेषण कौशल को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि इस तरह के मंच विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्र मिलन समारोह विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल को प्रदर्शित करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. जसबीर सिंह सहित विभाग के कई शिक्षक और शोधार्थी मौजूद रहे।

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