कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस में नवदीक्षा एवं विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजित, सफलता के बताए गए तीन आधार

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज़ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं मार्गदर्शन के लिए शुक्रवार को नवदीक्षा एवं विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों को सम्बोधित किया।
शिक्षा और सफलता के तीन प्रमुख आयाम
कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो ज्ञान बढ़ाए, व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए और उसके चरित्र का निर्माण करे। इसी प्रकार ब्लूम द्वारा प्रतिपादित शिक्षा के तीन प्रमुख आयाम ज्ञान (नॉलेज), कौशल (स्किल) और दृष्टिकोण (एटिट्यूड) आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसलिए सफलता के लिए इन तीनों का संतुलित विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आईआईएचएस ने नई शिक्षा नीति को सबसे पहले अपनाते हुए विद्यार्थियों को बहु विषयक शिक्षा, स्किल एनहांसमेंट, एबिलिटी एन्हांसमेंट तथा वैल्यू एडेड कोर्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स के अनुसार विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक युवा आत्मानुशासित, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बने।
नैतिक मूल्य और स्वरोजगार पर विशेष जोर
कुलगुरु ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलता की जिम्मेदारी स्वयं लेना और सफलता का श्रेय अपनी टीम को देना ही श्रेष्ठ नेतृत्व और उच्च चरित्र का परिचायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में तीन सी जिज्ञासा (क्यूरोसिटी), आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र स्वरोजगार और उद्यमिता है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहकर रोजगार देने वाले युवा बनने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें हरियाणा के अग्रणी संस्थान में प्रवेश मिलने पर बधाई दी। प्राचार्या प्रो. रीटा, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता और मंच संचालक प्रो. विवेक चावला ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे। अंत में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सभी विद्यार्थियों को स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहने की शपथ दिलाई।
हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं
एक अन्य विशेष व्याख्यान में बैंक ऑफ बड़ौदा की क्षेत्रीय भाषा अधिकारी एवं प्रबंधक सरिता हर्ष ने गणपति चन्द्र गुप्त हॉल में विद्यार्थियों को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी विविध आमयामी रोजगार की भाषा है। हिंदी के माध्यम से शिक्षक, मंच संचालक, हिंदी अधिकारी, भाषा अधिकारी, अनुवाद अधिकारी, दुभाषिया, सृजनात्मक लेखक, विज्ञापन, उद्घोषक, संवाद लेखन, फिल्म लेखन, पटकथा के साथ-साथ केन्द्रीय हिंदी विभागों में हिंदी अधिकरी के रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। एआई के दौर में हिंदी अनुवादक एवं दुभाषिया के साथ-साथ कमेंटेटर एवं रेडियो जॉकी के क्षेत्र में भी हिंदी में रोजगार की नई संभावनाएं पनपी हैं।