कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस में नवदीक्षा और विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजित

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस में नवदीक्षा और विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजित

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज़ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत और मार्गदर्शन के लिए शुक्रवार को नवदीक्षा एवं विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं:- सफलता के लिए ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण का होना आवश्यक है।- शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री पाना नहीं बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है।- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा सर्वोच्च ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त संस्थान है।- विश्वविद्यालय के दो इन्क्यूबेशन सेंटर विद्यार्थियों को स्टार्टअप के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देते हैं।

शिक्षा और सफलता के आधार

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो ज्ञान बढ़ाए, व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए और उसके चरित्र का निर्माण करे। उन्होंने ब्लूम द्वारा प्रतिपादित शिक्षा के तीन प्रमुख आयाम ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण को सफलता का आधार बताया। कुलगुरु ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सभी प्रमुख प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल है

विकसित भारत और नेतृत्व के गुण

कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक युवा आत्मानुशासित, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बने। उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलता की जिम्मेदारी स्वयं लेना और सफलता का श्रेय टीम को देना श्रेष्ठ नेतृत्व है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता अपनाने की सलाह दी।

रोजगार और अन्य गतिविधियां

विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने विद्यार्थियों को एनसीसी, एनएसएस, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया। प्राचार्या प्रो. रीटा ने अनुशासन और निरंतर परिश्रम को सफलता की कुंजी बताया। इस बीच एक अन्य कार्यक्रम में बैंक ऑफ बड़ौदा की क्षेत्रीय भाषा अधिकारी सरिता हर्ष ने कहा कि हिंदी विविध आयामी रोजगार की भाषा है और इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। अंत में कुलगुरु ने सभी विद्यार्थियों को स्वदेशी और राष्ट्र निर्माण की शपथ दिलाई।

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