कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जुड़ी विशेष खबरें: मच्छर भगाने वाले रसायन और शैक्षिक गतिविधियों पर नए अध्ययन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में सामने आया है कि मच्छर भगाने वाले रसायनों का मांसपेशियों की कोशिकाओं पर असर पड़ सकता है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रो. अश्वनी मित्तल द्वारा स्केलेटल मसल्स रिसर्च लेबोरेटरी में एक प्रयोग किया गया है। इस प्रयोग के दौरान ट्रांसफ्लुथ्रिन नामक वाष्पशील टाइप-1 पाइरेथ्रॉयड के मांसपेशी कोशिकाओं पर प्रभावों का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नल टोक्सियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। कंकालीय मांसपेशी कोशिकाओं के अध्ययन में पाया गया कि प्रयोगशाला परिस्थितियों में ट्रांसफ्लुथ्रिन के संपर्क में आने वाली मांसपेशी कोशिकाओं में ग्लूकोज के उपयोग, ऊर्जा उत्पादन और कोशिकीय संरचना से संबंधित कई प्रक्रियाओं में बदलाव के संकेत मिले हैं।
केयू प्रो. अश्वनी मित्तल ने बताया कि मच्छर भगाने वाले रसायन मांसपेशी कोशिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कंकालीय मांसपेशी कोशिकाओं के अध्ययन में पाया गया कि कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के अवशोषण और उपयोग में वृद्धि के साथ ग्लाइकोजन का भंडारण कम हुआ तथा लैक्टेट का उत्पादन बढ़ा। ये परिवर्तन कोशिकाओं के सामान्य ऊर्जा चयापचय में बदलाव की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण अंग हैं। शोध के दौरान माइटोकॉन्ड्रियल कार्यक्षमता से जुड़े संकेतकों में कमी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि ट्रांसफ्लुथ्रिन के संपर्क से मांसपेशी कोशिकाओं की सामान्य ऊर्जा उत्पादन प्रणाली प्रभावित हो सकती है। वहीं इन प्रारंभिक प्रयोगशाला निष्कर्षों को मानव स्वास्थ्य के संदर्भ में समझने के लिए आगे इन-विवो, महामारी विज्ञान और दीर्घकालिक अध्ययन किए जाने आवश्यक हैं।
शोधकर्ताओं ने ट्रांसफ्लुथ्रिन के संपर्क में आई मांसपेशी कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव भी दर्ज किए। रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज तथा लिपिड पेरॉक्सीडेशन में वृद्धि के साथ एंटीऑक्सीडेंट रक्षा प्रणाली में भी परिवर्तन पाए गए। अत्यधिक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कोशिकाओं के विभिन्न घटकों को नुकसान पहुँचा सकता है और इसलिए इसके बढ़े हुए स्तर को कोशिकीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। प्रो. अश्वनी मित्तल ने बताया कि इन निष्कर्षों को लेकर वैज्ञानिक सावधानी बरतना आवश्यक है। यह अध्ययन सी2सी12 कल्चर की गई कंकालीय मांसपेशी कोशिकाओं पर किया गया है और मनुष्यों पर प्रत्यक्ष रूप से नहीं। इसलिए इन निष्कर्षों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि घरेलू मच्छर भगाने वाले उत्पादों के इस्तेमाल से मनुष्यों में मांसपेशियों की कमी, मधुमेह अथवा कोई अन्य बीमारी होती है।
हालांकि, शोध का महत्व इस तथ्य में है कि ट्रांसफ्लुथ्रिन घरेलू मच्छर नियंत्रण उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला रसायन है। कीटनाशकों का शरीर में प्रवेश सांस के माध्यम से, त्वचा के संपर्क से अथवा आकस्मिक रूप से निगलने के माध्यम से हो सकता है। ऐसे में इनके संभावित जैविक प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लोगों को मच्छर भगाने वाले उत्पादों या मच्छर नियंत्रण के उपायों का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों से बचाव सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। वहीं ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल के दौरान पर्याप्त वेंटिलेशन का ध्यान रखना तथा उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करना उपयोगी सावधानी हो सकती है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में केयू एमएमटीटीसी द्वारा 37वें आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी ओरिएंटेशन एंड सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के पांचवें दिन प्रथम तकनीकी सत्र में केंद्रीय राजस्थान विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह तोमर ने शिक्षा का उद्देश्य एवं उच्च शिक्षा में शिक्षक की बदलती भूमिका विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री अथवा ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अच्छे मानव एवं जिम्मेदार नागरिक का निर्माण भी शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने एनईपी 2020 के संदर्भ में कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, संरक्षक एवं सीखने की प्रक्रिया में सहायक की भूमिका निभाता है। उन्होंने समावेशी कक्षा, विद्यार्थियों की विविधता, सामुदायिक सहभागिता, एनएसएस, एनसीसी, मूल्य-आधारित शिक्षा तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया।
ओरिएंटेशन प्रोग्राम के दूसरे तकनीकी सत्र में कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल की प्रोफेसर एवं मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की निदेशक डॉ. दिव्या उपाध्याय जोशी ने कौशल विकास विषय को लेकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसे व्यावहारिक जीवन में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। डॉ. दिव्या ने खेल, संगीत, नृत्य, कला एवं अन्य रुचि-आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन, संचार एवं पारस्परिक कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास एक निरंतर एवं आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है। एनईपी 2020 के संदर्भ में उन्होंने व्यावसायिक शिक्षा, व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक अधिगम तथा विद्यार्थियों को रोजगार, उद्यमिता और बदलती सामाजिक एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में लिटरेरी क्लब के अंतर्गत निबंध लेखन एवं कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की प्राचार्या प्रो. अनिता दुआ ने कहा कि मातृभाषा मूल विचारों की सार्थक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है। मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक चेतना की संवाहक भी है। इस अवसर पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विकसित भारत 2047ः संभावनाएं एवं चुनौतियां, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत, नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा का महत्त्व तथा ऑनलाइन शिक्षा जैसे समসামयिक एवं सामाजिक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में मंगलवार को केयू में महिला वॉलीबॉल इंटर कॉलेज चैंपियनशिप के आयोजन के साथ शैक्षणिक सत्र 2026-27 की खेल गतिविधियों का विधिवत आगाज हुआ। प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर खिलाड़ियों ने उत्साह एवं खेल भावना के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केयू खेल निदेशक प्रो. दिनेश राणा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय की खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अपने प्रदर्शन के माध्यम से विश्वविद्यालय एवं प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।