कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर आयोजित हुआ एट होम कार्यक्रम, शिक्षकों को मिले लाइफ टाइम अचीवमेंट और बेस्ट रिसर्चर अवार्ड

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर आयोजित हुआ एट होम कार्यक्रम, शिक्षकों को मिले लाइफ टाइम अचीवमेंट और बेस्ट रिसर्चर अवार्ड

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा द्वारा शनिवार देर सांय शिक्षक दिवस के अवसर पर कुलगुरु निवास में एट होम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुवि के शिक्षकों को उनके शैक्षणिक अनुभव, पुस्तक लेखन, शोध पत्र और पेटेंट में बेहतर कार्य के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। इसके साथ ही शिक्षकों को शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए बेस्ट रिसर्चर अवार्ड देकर भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने शिक्षकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिक्षक का सम्मान कभी भी उसके पद से नहीं होता है। शिक्षक का सम्मान उसके ज्ञान, व्यक्तित्व, आचरण और विद्यार्थियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी और इस तरह पूरे शिक्षक समुदाय को बड़ा सम्मान दिलाया। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन के जीवन से सभी शिक्षकों को यह बड़ी सीख मिलती है कि आलोचना का उत्तर कभी भी आलोचना से नहीं देना चाहिए। आलोचना का उत्तर हमेशा अपने ज्ञान और अपने अच्छे कार्य से देना चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में शिक्षकों की बढ़ी जिम्मेदारी

आज के इस दौर में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना-विस्फोट का बोलबाला है, वहां शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ गई है। हमें विद्यार्थियों को केवल सूचना उपलब्ध कराने के बजाय सूचना को ज्ञान में बदलना सिखाना होगा। हमें ज्ञान को विवेक और विवेक को जीवन का मार्ग बनाने के लिए विद्यार्थियों को लगातार प्रेरित करना चाहिए। कुलगुरु ने कहा कि यदि वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई विद्यार्थी अपने शिक्षक से यह कहे कि गुरुजी, आपने मेरा जीवन बदल दिया, तो शिक्षक के लिए इससे बड़ी उपलब्धि और कोई नहीं हो सकती है। इस सुंदर अवसर पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मनमोहक गीत भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन प्रो. विवेक चावला द्वारा किया गया तथा कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने कार्यक्रम में आए सभी लोगों का आभार प्रकट किया।

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एसएफएस और पार्ट-टाइम शिक्षकों की पदोन्नति पर क्या बोले कुलगुरु

कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अपने संबोधन में कहा कि एसएफएस एवं पार्ट-टाइम शिक्षकों की पदोन्नति और उनकी सेवा-सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय बहुत ही गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। अकाउंट कोड की कुछ निर्धारित मर्यादाओं के कारण कई बार कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ जाती हैं। लेकिन पूर्व में नीतिगत बदलाव करके कई शिक्षकों को पदोन्नति का पूरा लाभ दिया जा चुका है। वर्तमान समय में विशेष रूप से एसोसिएट प्रोफेसर स्तर की कुछ पदोन्नतियाँ अभी लंबित पड़ी हुई हैं। कुलगुरु ने पूरा विश्वास व्यक्त किया कि आगामी 15-20 दिनों के भीतर अथवा अधिकतम एक माह के अंदर इन सभी मामलों में सकारात्मक दिशा में प्रगति देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एसएफएस शिक्षकों को बजट पदों से जोड़ने और उन्हें बेहतर सेवा-सुरक्षा उपलब्ध करवाने के लिए हम सभी का सहयोग बहुत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से यह भी कहा कि हरियाणा सरकार भी सभी शिक्षित साथियों को सेवा-सुरक्षा और उचित लाभ देने के प्रति पूरी तरह गंभीर है। सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर इस दिशा में लगातार प्रयास जारी रखे जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कई गणमान्य डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष और शिक्षक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बेस्ट रिसर्चर अवार्ड-2025 के विजेताओं की सूची

लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न कैटेगरी में इस वर्ष कई शिक्षकों को प्रतिष्ठित अवार्ड दिए गए हैं। बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र शर्मा को बेस्ट रिसर्चर (एच-इंडेक्स) अवार्ड से सम्मानित किया गया। यूआईईटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. विशाल अहलावत को उनके पेटेंट कार्य के लिए यह अवार्ड मिला। रसायन विज्ञान विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नीरा राघव को बेस्ट रिसर्चर (इम्पैक्ट फैक्टर) के लिए चुना गया। फिजिक्स विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजीव अग्रवाल को बेस्ट रिसर्चर-पब्लिकेशन (विज्ञान) अवार्ड प्रदान किया गया। अर्थशास्त्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. अर्चना चौधरी को बेस्ट रिसर्चर (नॉन-साइंसेज) पब्लिकेशन का अवार्ड मिला। फिजिक्स विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमन मेहंदिया को बेस्ट रिसर्चर (प्रोजेक्ट्स-साइंसेज) के लिए सम्मानित किया गया। यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय सोलखे को बेस्ट रिसर्चर (प्रोजेक्ट्स-नॉन-साइंसेज) अवार्ड मिला। जियोफिजिक्स विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. भगवान सिंह चौधरी, डॉ. मनीषा संधु व डॉ. आर.बी.एस. यादव को कंसल्टेंसी (साइंसेज) के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार को बेस्ट रिसर्चर (कोलेबोरेशन) अवार्ड से सम्मानित किया गया।

9 शिक्षकों को मिला प्रतिष्ठित लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

कम्प्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार को 35 वर्षों से अधिक के शिक्षण, शोध और प्रशासनिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भौतिकी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजीव अग्रवाल को 28 वर्षों से अधिक की सेवा और अकादमिक नेतृत्व के लिए यह अवार्ड मिला। भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ए.आर. चौधरी को 33 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवाओं के लिए यह सम्मान दिया गया। पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मोहिंदर चंद को 33 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षण और शोध के लिए सम्मानित किया गया। भूभौतिकी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. भगवान सिंह चौधरी को 22 वर्षों से अधिक की सेवा के लिए यह सम्मान मिला। वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र सिंह को 28 वर्षों से अधिक के योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया। आईआईएचएस के गणित विभाग की प्रोफेसर डॉ. निरुपमा को शोध और शिक्षण के लिए यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। बायोकेमिस्ट्री विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनिता रानी दुआ को 31 वर्षों से अधिक की सेवा और अकादमिक नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया। इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार को 29 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षण और शोध में योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया।

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