कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने आईआईएचएस का किया औचक दौरा, विद्यार्थियों को दिए आत्मनिर्भरता के टिप्स

विद्यार्थी विकसित भारत के निर्माण में बनें सक्रिय भागीदारः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुवि कुलगुरु ने आईआईएचएस का किया औचक दौरा
विद्यार्थियों से रूबरू होकर जानी शैक्षणिक व्यवस्था, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
शशि अरोड़ा/कुरुक्षेत्र /24 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड आनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) का औचक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों, सुविधाओं और समस्याओं के बारे में जानकारी ली। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों के बीच सहजता से बैठकर उनकी बात सुनी और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर आईआईएचएस की प्राचार्या प्रो. रीटा तथा विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. अनिल गुप्ता भी उपस्थित रहे।
कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय नैक के उच्चतम ग्रेड ए-प्लस-प्लस ग्रेड से सुशोभित देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल है। विश्वविद्यालय का निरंतर प्रयास है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल एवं अवसर उपलब्ध करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को ज्ञान के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगारपरकता से जोड़ने पर बल देती है तथा कुवि इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदार बनें। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप कौशल विकसित कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार, स्टार्टअप और कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा ज्ञानवान होने के साथ कुशल, नवाचारी, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बने।
इस दौरान प्राचार्या प्रो. रीटा ने संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों एवं विद्यार्थियों से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा को दी। प्रॉक्टर डॉ. अनिल गुप्ता ने भी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए अनुशासन एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने से संबंधित व्यवस्थाओं से अवगत कराया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति संवेदनशीलता एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज, अम्बाला छावनी द्वारा यूजीसी के मानव संसाधन विकास केंद्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सहयोग से 36वें आठ दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति संवेदनशीलता एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पांचवें दिन अनुसंधान एवं विकास विषय पर विशेषज्ञों ने शिक्षकों को शोध, नवाचार एवं ज्ञान-सृजन की महत्ता से अवगत कराया। इस कार्यक्रम में देशभर के शिक्षण संस्थानों से जुड़े 50 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की।
अनुसंधान में गुणवत्ता और नैतिक मूल्यों पर जोर
प्रथम सत्र में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नई दिल्ली की डॉ. शिवांगी कौशिक ने उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक अनुसंधान की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों को नवीन एवं प्रासंगिक शोध विषयों की पहचान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान में नैतिक मूल्यों और शोध की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। द्वितीय सत्र में मेरठ कॉलेज, मेरठ के विधि विभाग के डॉ. अनुराग सिंह ने अनुसंधान एवं विकास को ज्ञान-आधारित समाज और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। कार्यक्रम के अंत में समन्वयक डॉ. ज्योति सोरौत ने दोनों विशेषज्ञों एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।