हिसार के रावतखेड़ा में आयोजित हुआ वार्षिक मेला, कुलदीप बिश्नोई ने मंदिर निर्माण को बताया समाज जोड़ने का केंद्र

हिसार में अमावस्या के पावन अवसर पर रावतखेड़ा गांव स्थित श्री प्राचीन साथरी मंदिर में वार्षिक मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में आस्था का भारी सैलाब उमड़ा और वरिष्ठ भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई ने इसमें विशेष रूप से शिरकत की। उनके साथ विधायक रणधीर पनिहार भी मौजूद रहे।
मंदिर निर्माण में 36 बिरादरियों का सहयोग
कुलदीप बिश्नोई ने बुधवार को मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए कामना की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से मुलाकात करके उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। मेले में पहुंचने पर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कुलदीप बिश्नोई का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। गांव में नया मंदिर निर्माणाधीन है जिसके लिए एक सहयोग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में बिश्नोई समाज सहित 36 बिरादरियों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी लोगों ने दिल खोलकर मंदिर निर्माण में आर्थिक सहयोग दिया। समाज के सभी वर्गों की इस सामूहिक सहभागिता ने सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी समरसता की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश की है।
गुरु जम्भेश्वर महाराज के आदर्शों पर चलना जरूरी
कुलदीप बिश्नोई ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रावतखेड़ा में जिस प्रकार बिश्नोई समाज और 36 बिरादरियों के लोगों ने एकजुट होकर मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है, वह बेहद प्रेरणादायी है। इस अवसर पर उन्हें अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल की कही हुई बात याद आ गई। चौधरी भजनलाल हमेशा कहा करते थे कि किसी भी धार्मिक और सामाजिक कार्य में हर साथी तथा हर बिरादरी की सक्रिय सहभागिता होनी चाहिए। यह भावना समाज को आपस में जोड़ने और उसे मजबूत बनाने का कार्य करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर केवल पूजा-पाठ करने के केंद्र मात्र नहीं होते हैं। ये मंदिर समाज को आपस में जोड़ने, अच्छे संस्कार प्रदान करने और सेवा की भावना को मजबूत करने के मुख्य केंद्र होते हैं। गुरु जम्भेश्वर महाराज ने मानवता की भलाई, जीव-जंतुओं की रक्षा करने, पर्यावरण का संरक्षण करने, आपसी भाईचारे और सदाचार का संदेश दिया है। उनके इन पवित्र आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर ही एक समरस, संस्कारित और आदर्श समाज का निर्माण किया जा सकता है।
दानदाताओं का जताया आभार
कुलदीप बिश्नोई ने मंदिर निर्माण में खुलकर सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं, गांव के ग्रामीणों और 36 बिरादरियों के प्रतिनिधियों का तहे दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सद्भाव की एक बहुत बड़ी प्रेरणादायी मिसाल के रूप में हमेशा याद रहेगा। इस वार्षिक मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु, गणमान्य लोग और विभिन्न बिरादरियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया।