कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली और संस्कृति के संरक्षण के लिए उठाएगा महत्वपूर्ण कदम

हरियाणवी बोली के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा केयू: कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा
हरियाणवी बोलियों को किया जाएगा संरक्षित
शशि अरोड़ा /कुरुक्षेत्र /15 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केयू धरोहर हरियाणा संग्रहालय एवं रत्नावली के माध्यम से हरियाणा की अनेक लुप्त होती हुई विधाओं को मंच से जोड़कर जीवंत किया है। इसी परम्परा में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा। इस आशय की घोषणा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केन्द्र की स्थापना केयू हिन्दी विभाग में की जा रही है। यह शोध केन्द्र आने वाले दिनों में हरियाणवी भाषा के संवर्धन के लिए भी कार्य करेगा।
उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने रत्नावली के अवसर पर हरियाणवी को भाषा का दर्जा देने की मुहिम की शुरुआत की थी। इसके लिए हरियाणवी मीडिया चौपाल की स्थापना की थी। चौपाल पर सभी संस्कृति प्रेमियों का साक्षात्कार हरियाणवी में लिया गया था। इस मंच के माध्यम से हरियाणवी को खूब बढ़ावा मिला। युवाओं में हरियाणवी मीडिया चौपाल विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि पिछले दिनों कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने हिन्दी विभाग में लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केन्द्र की घोषणा की थी। जल्द ही यह शोध केन्द्र लोक संस्कृति पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए खुल जाएगा। इस शोध केन्द्र में हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी हुई 7000 से अधिक पुस्तकें एवं शोध प्रबन्ध रखे जा रहे हैं ताकि हरियाणा की लोक साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी हुई समस्त सामग्री सभी हरियाणवी शोधार्थियों को एक स्थान पर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. वरूण गुलाटी ने भी हिन्दी दिवस के अवसर पर हरियाणवी भाषा एवं हरियाणा की अलग-अलग बोलियों जिनमें कौरवी, अहीरवाटी, ब्रज, मेवाती, बांगरू, बागड़ी शामिल हैं, के संरक्षण में संस्कृति मंत्रालय का शोध केन्द्र स्थापित करने के लिए उद्घोषणा की है। आने वाले दिनों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली को भाषा एवं हरियाणवी भाषा की उपबोलियों के संरक्षण में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणवी बोली में फिल्में बनाने का दौर भी शुरू हो चुका है। इस कड़ी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अकादमिक दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
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लोक कला सांझी को पुनर्जीवित करने के लिए होगी कार्यशाला**
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने पिछले दिनों की उद्घोषणा की थी कि हरियाणा की लोक कला सांझी को बाजार के साथ जोड़कर हरियाणा की कला के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। इस आशय की घोषणा रत्नावली में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी की थी। उनकी उद्घोषणा पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग, हिन्दी विभाग एवं ललित कला के छात्रों के माध्यम से आने वाले दिनों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि कुलगुरु की उद्घोषणा पर कार्य शुरू हो चका है। बहुत जल्द इस विषय पर हरियाणवी की सांझी कला को हरियाणवी कला के रूप में स्थापित करने के लिए तथा सांझी के नवीन प्रयोगों के लिए जल्द ही कार्यशाला आयोजित की जा रही है जिसमें हरियाणवी कला प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं भाग लेकर सांझी को नवीन स्वरूप में प्रस्तुत करेंगे। जिस प्रकार बिहार की मधुबनी वहां की लोक कला के रूप में विख्यात है उसी प्रकार आने वाले दिनों में हरियाणा की सांझी कला भी लोक प्रिय बनाई जाएगी।