जर्मनी में कुरुक्षेत्र के रहने वाले 25 साल के युवक विशू शर्मा की वहां चाकू घोंपकर हत्या

विशू करीब 3 साल पहले बेहतर भविष्य की उम्मीद में 15 लाख रुपये का कर्ज लेकर 'डंकी रूट' (पुर्तगाल और फ्रांस के रास्ते) से जर्मनी पहुंचे थे।
कुरुक्षेत्र /12 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स/शशि अरोड़ा
जर्मनी के प्रसिद्ध शहर फ्रैंकफर्ट से एक बहुत ही दुखद खबर सामने आई है। कुरुक्षेत्र के रहने वाले 25 साल के युवक विशू शर्मा की वहां चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई है। इस घटना के बाद से कुरुक्षेत्र में रहने वाले उनके परिवार में कोहराम मच गया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विशू शर्मा कुरुक्षेत्र के महादेव मोहल्ले का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वहां कुछ भारतीय युवकों के साथ उसकी किसी बात को लेकर मामूली कहासुनी हो गई थी। देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि आरोपियों ने विशू पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
हमले के बाद आरोपी विशू को खून से लथपथ हालत में वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गए। आसपास के लोगों ने जब उसे घायल अवस्था में देखा तो तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विशू कुरुक्षेत्र के पूर्व नगर पार्षद नितिन भारद्वाज लाली का सगा भतीजा था। नितिन लाली ने बताया कि उन्हें तड़के करीब चार बजे जर्मनी से फोन पर इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिली। उन्होंने बताया कि फोन करने वाले ने बस इतना कहा कि विशू पर चाकू से हमला हुआ है और अब वह हमारे बीच नहीं रहा।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, विशू पर हमला करने वाले तीन से चार युवक भी भारतीय ही बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि उन लोगों के बीच किस बात को लेकर झगड़ा शुरू हुआ था। झगड़े की असली वजह जर्मन पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगी।
जर्मनी की लोकल पुलिस ने इस पूरे मामले में हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। जर्मन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
विशू शर्मा के अतीत और उसके विदेश जाने की कहानी भी काफी संघर्षपूर्ण रही है। विशू लगभग तीन साल पहले अपने बेहतर भविष्य का सपना लेकर कुरुक्षेत्र से निकला था। वह 'डंकी रूट' यानी अवैध और खतरनाक रास्तों के जरिए अमेरिका जाने की कोशिश में घर से रवाना हुआ था।
सफर के दौरान वह सबसे पहले पुर्तगाल पहुंचा और वहां से फ्रांस होते हुए जर्मनी दाखिल हुआ। जर्मनी पहुंचने के बाद उसने आगे जाने का इरादा छोड़ दिया और वहीं रहकर मेहनत-मजदूरी करने लगा। धीरे-धीरे उसने वहां अपना काम-धंधा जमा लिया था और मेहनत से अपनी जिंदगी पटरी पर ला रहा था।
हाल ही में विशू ने जर्मनी में स्थायी निवास यानी पीआर (PR) पाने के लिए अपने दस्तावेज जमा करवाए थे। वह इस साल दीपावली के त्योहार पर अपने घर कुरुक्षेत्र वापस आने की तैयारी भी कर रहा था। उसकी इस वतन वापसी को लेकर पूरा परिवार बहुत उत्साहित था।
घर पर परिजन विशू के स्वागत की तैयारियों के साथ-साथ उसकी शादी के लिए रिश्ता ढूंढने में भी लगे हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि विशू जब इस बार घर आएगा तो उसकी सगाई या शादी पक्की कर दी जाएगी। लेकिन इस दुखद खबर ने परिवार की तमाम खुशियों और अरमानों को एक पल में खत्म कर दिया।
विशू अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता नीरज शर्मा एक स्थानीय सुनार की दुकान पर मामूली नौकरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, फिर भी बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
पिता ने अपने इकलौते बेटे को विदेश भेजने के लिए करीब 15 लाख रुपये का भारी कर्ज लिया था। परिजनों को पूरी उम्मीद थी कि विशू विदेश में सेटल होकर जल्द ही सारा कर्ज उतार देगा। वे सोचते थे कि अब उनके बुरे दिन खत्म होने वाले हैं और परिवार की गरीबी दूर हो जाएगी।
विशू की असमय मौत की खबर सुनते ही उसके पिता नीरज शर्मा और माता का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता का कहना है कि विशू के जाने के बाद उनकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई है। जिस बेटे के सहारे वे अपने बुढ़ापे और परिवार के सुखद भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे थे, वही अब उनके बीच नहीं रहा।
विशू के मोहल्ले और कुरुक्षेत्र में इस घटना की जानकारी मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई है। लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे हैं। हर कोई इस दर्दनाक हादसे से हतप्रभ है और दोषी युवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
अब पीड़ित परिवार ने भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। परिजनों की मांग है कि सरकारी स्तर पर विदेश मंत्रालय के जरिए आवश्यक कागजी औपचारिकताएं जल्द पूरी करवाई जाएं। वे चाहते हैं कि विशू का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द जर्मनी से भारत लाया जा सके।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे केवल इतना चाहते हैं कि विशू का शव समय पर कुरुक्षेत्र पहुंच जाए ताकि वे अपने बेटे का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें। अब पूरे कुरुक्षेत्र की निगाहें भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और जर्मन पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।