लाडवा में वेदों की गूँज: वेद प्रचार सप्ताह के पाँचवें दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का भारी सैलाब

वेदों की गूँज से गूँजा लाडवा, वेद प्रचार सप्ताह के पंचम दिवस उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
मानव गर्ग/लाडवा/ 28 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
आर्य समाज लाडवा द्वारा आयोजित सात दिवसीय वेद प्रचार सप्ताह का पाँचवें दिन वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ की पावन आहुतियों और आध्यात्मिक ज्ञान से पूरी तरह सराबोर रहा। इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, आर्यजनों, मातृशक्ति और युवाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ पवित्र अग्निहोत्र यज्ञ के साथ किया गया। सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य रणवीर शास्त्री ने यज्ञ के ब्रह्मा के रूप में शास्त्रानुकूल तरीके से यज्ञ को संपन्न कराया, जबकि पुरोहित विक्रमादित्य ने बहुत ही मधुर वेदपाठ करवाया। इस धार्मिक अनुष्ठान में यजमान के रूप में रामसिंह वर्मा, भानूमती आर्या, अजय गर्ग और तारा देवी ने विधि-विधान के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।
श्रावणी पर्व पर यज्ञोपवीत धारण और परिवर्तन
आर्य समाज के पूर्व मंत्री अरविन्द सिंघल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावणी पर्व के इस पावन अवसर पर एक विशेष आयोजन किया गया था। इस दौरान जाति-पाति और वर्गभेद की दीवारों से ऊपर उठकर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञोपवीत धारण एवं परिवर्तन कर प्राचीन वैदिक परंपरा को जीवंत किया। मुख्य वक्ता आचार्य रणवीर शास्त्री ने यज्ञोपवीत संस्कार पर प्रकाश डालते हुए सभी को इसका महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत केवल एक सामान्य धागा नहीं है, बल्कि यह जीवनभर के संकल्प, कर्तव्य और संयम का बहुत बड़ा प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में युवाओं को भटकाव से बचाने और उनमें अच्छे संस्कारों का विकास करने के लिए 16 संस्कारों का ज्ञान कराना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
भजनोपदेशक संगीता आर्या के ओजस्वी भजन और ऋणों का महत्व
सभा की मुख्य भजनोपदेशक संगीता आर्या ने अपने ओजस्वी भजनों और प्रभावशाली प्रवचनों से वहाँ उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रक्षा बंधन के त्योहार को केवल राखी बांधने तक सीमित रखना हमारी महान संस्कृति को सीमित करना है। इसका वास्तविक और सनातन नाम श्रावणी पर्व है। उन्होंने देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य जन्म से ही इन तीनों ऋणों से गहराई से जुड़ा होता है। ईश्वर की सच्ची उपासना से देव ऋण उतारा जाता है, वेदों के नियमित स्वाध्याय एवं प्रचार से ऋषि ऋण चुकता होता है, तथा माता-पिता और पूर्वजों की पूरी सेवा करने से मनुष्य पितृ ऋण से पूरी तरह उऋण हो सकता है।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति और कार्यक्रम का समापन
इस महत्वपूर्ण अवसर पर आर्य समाज लाडवा के प्रधान अनिल गोयल, सुखविंदर आर्य, रत्न कुमार, मोहित अरोड़ा, सुनील आर्य, महेन्द्रपाल आर्य, अरविंद सिंघल, गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रधान राजकुमार गर्ग, डॉ. रविन्द्र अरोड़ा, डॉ. अजीत सेठी, रोहित गर्ग, ओमपाल आर्य, जयदयाल, सौरभ, सुभाष चंद, बीर सिंह, राजेश, हुकुमचंद, ओमप्रकाश मल्होत्रा, जयभगवान, उर्मिल सिंघल, कविता गोयल, शोभा गोयल, परमजीत सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य समापन शांति पाठ और उपस्थित सभी लोगों को प्रसाद वितरण के साथ किया गया।