लखनऊ विकास प्राधिकरण ने बर्लिंगटन कंपाउंड में सड़क के ऊपर निर्माण और अपार्टमेंट्स के मामले में एफआई बिल्डर के सिराज इकबाल को भेजा नोटिस, मांगे दस्तावेज

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एफ. आई. बिल्डर के सिराज इकबाल को नोटिस भेजा है। इस नोटिस के माध्यम से बर्लिंगटन कंपाउंड में सड़क के ऊपर बने प्लेटफॉर्म और अपार्टमेंट्स के स्वीकृत मानचित्र व अभिलेख मांगे गए हैं।
अलीगंज अग्निकांड के बाद भी एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता संजय शर्मा की शिकायत पर बर्लिंगटन कंपाउंड में सड़क के ऊपर निर्माण की जांच की फाइल खुली है। लखनऊ में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को यह मामला सामने आया। अलीगंज की भयावह अग्निकांड त्रासदी के बाद अवैध और अनधिकृत निर्माणों को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि आखिर एलडीए की निगरानी व्यवस्था तब कहां रहती है जब शहर में निर्माण होते रहते हैं और अधिकारी तभी सक्रिय होते हैं जब कोई जागरूक नागरिक शिकायत दर्ज कराता है।
इसका ताजा उदाहरण कैंट रोड स्थित बर्लिंगटन कंपाउंड का मामला है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिकायतकर्ता संजय शर्मा द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से उठाए गए मामले के बाद एलडीए ने स्थल निरीक्षण किया है। अब संबंधित भवनों के स्वीकृत मानचित्र तथा अभिलेख तलब किए गए हैं। एलडीए के दस्तावेज के अनुसार संजय शर्मा ने बर्लिंगटन कंपाउंड, कैंट रोड स्थित सरवरी अपार्टमेंट तथा उसी गली में स्थित ए ब्लॉक, बी ब्लॉक, सी ब्लॉक, डी ब्लॉक और अन्य अपार्टमेंट में संभावित मानचित्र उल्लंघन तथा भवन उपयोग से संबंधित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच के लिए 19 अगस्त 2026 को स्थल निरीक्षण किया गया था।
एलडीए की जांच और नोटिस
एलडीए की जांच आख्या में बताया गया है कि बर्लिंगटन कंपाउंड लगभग 46 वर्ष पूर्व निर्मित है। यहां लगभग 100 भवन और करीब 1500 की आबादी है। निरीक्षण के समय मौके पर कोई नवीन निर्माण कार्य होता हुआ नहीं पाया गया था। लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। जांच आख्या में एलडीए ने बर्लिंगटन कंपाउंड के ए, बी, सी और डी ब्लॉक, कैंट रोड, थाना कैसरबाग, लखनऊ के स्वीकृत मानचित्र और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए संबंधित पक्ष को पत्र भेजने की बात कही है, ताकि अभिलेख प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
इसके बाद एलडीए के प्रवर्तन जोन-6 के सहायक अभियंता द्वारा एफ. आई. बिल्डर के सिराज इकबाल, ओनर/अध्यक्ष/सचिव, बर्लिंगटन कंपाउंड, कैंट रोड, कैसरबाग, लखनऊ को बाकायदा नोटिस जारी किया गया है। एलडीए ने संबंधित भूखंड और भवन का स्वीकृत मानचित्र व साक्षीय अभिलेख एक सप्ताह के भीतर कार्यालय में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए तो उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई प्रस्तावित कर दी जाएगी और इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।
निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यही दस्तावेज अब एलडीए की निगरानी व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि सार्वजनिक सड़क के ऊपर निर्माण किए जाने की शिकायत इतनी गंभीर है कि एलडीए को संबंधित भवन का स्वीकृत मानचित्र और अभिलेख तलब करने पड़ रहे हैं, तो सवाल यह है कि इतने वर्षों तक एलडीए के अधिकारी क्या करते रहे। क्या निर्माण के समय स्थल निरीक्षण नहीं हुआ था। क्या स्वीकृत मानचित्र की जांच नहीं हुई थी। क्या सड़क और भवन की वास्तविक स्थिति का कभी मिलान नहीं किया गया। और यदि निर्माण वास्तव में सार्वजनिक सड़क के ऊपर हुआ है तो इतने वर्षों तक वह निर्माण कैसे अस्तित्व में रहा और आज भी उसमें लोग रह रहे हैं।
सड़क के दोनों ओर भवन और बीच की सार्वजनिक सड़क के ऊपर निर्माण
संजय शर्मा द्वारा उठाया गया एक और गंभीर सवाल यह है कि एक सार्वजनिक सड़क के दोनों ओर स्थित भवनों के बीच सड़क के ऊपर निर्माण आखिर किस अनुमति के आधार पर किया गया। यदि यह निर्माण स्वीकृत मानचित्र का हिस्सा है तो एलडीए को वह स्वीकृत मानचित्र सार्वजनिक करना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक सड़क के ऊपर निर्माण की अनुमति किस प्रावधान के तहत दी गई है। यदि यह निर्माण स्वीकृत मानचित्र में नहीं है तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई। और यदि निर्माण वर्षों से मौजूद है तो एलडीए के प्रवर्तन अधिकारियों ने स्वतः संज्ञान लेकर इसे क्यों नहीं जांचा।
यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सार्वजनिक सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती है। वह आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। सड़क के ऊपर अथवा सड़क की सीमा में किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण आपदा की स्थिति में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
अलीगंज त्रासदी के बाद और गंभीर हुए सवाल
हाल ही में अलीगंज में हुई भयावह अग्निकांड त्रासदी ने लखनऊ में अवैध निर्माण, भवन उपयोग, अग्नि सुरक्षा और सरकारी प्रवर्तन व्यवस्था की कमियों को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। ऐसे समय में बर्लिंगटन कंपाउंड जैसे मामलों को केवल एक व्यक्तिगत शिकायत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह सवाल सीधे तौर पर शहर में प्रिवेंटिव एनफोर्समेंट यानी घटना होने से पहले अवैध निर्माणों की पहचान और कार्रवाई की व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। विकास प्राधिकरण का काम केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना नहीं बल्कि शहर में होने वाले निर्माणों पर लगातार निगरानी रखना भी है।
शिकायतकर्ता संजय शर्मा की भूमिका और धमकियों के आरोप
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता संजय शर्मा की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने केवल शिकायत दर्ज कराकर मामले को छोड़ नहीं दिया बल्कि सार्वजनिक सड़क और भवन निर्माण से जुड़े गंभीर सवालों को सरकारी तंत्र के सामने रखा है। उनकी शिकायत के बाद स्थल निरीक्षण हुआ और अब एलडीए ने संबंधित पक्ष से स्वीकृत मानचित्र और अभिलेख मांग लिए हैं। यानी जिस मामले पर एलडीए को स्वयं निगरानी रखनी चाहिए थी, उसमें कार्रवाई की शुरुआत एक सजग नागरिक की शिकायत के बाद हुई है। यह स्थिति स्वयं एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है कि क्या उसकी प्रवर्तन व्यवस्था इतनी निष्क्रिय है कि नागरिकों द्वारा लगातार शिकायत किए बिना संभावित अनधिकृत निर्माणों की पहचान नहीं हो पाती है। मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आया है जिसमें संजय शर्मा ने आरोप लगाया है कि इन विवादित निर्माणों से जुड़े मालिकों और कब्जेदारों द्वारा उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकियां दी जा रही हैं।