हिसार लुवास में आधुनिक आणविक तकनीकों और सेल कल्चर पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

हिसार लुवास में आधुनिक आणविक तकनीकों और सेल कल्चर पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

हिसार में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के पशु जैव प्रौद्योगिकी विभाग में एक नया प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। यह कार्यक्रम इंटीग्रेटेड मेथड्स इन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड सेल कल्चर विषय पर आधारित है। यह 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 30 सितंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम में कुल 20 वैज्ञानिक, शिक्षक और शोधार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कई तरह की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएंगी। इसमें आणविक जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और कोशिका संवर्धन की आधुनिक तकनीकों का सैद्धांतिक ज्ञान दिया जाएगा। इसके अलावा प्रतिभागियों को प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

अधिष्ठाताओं ने दी व्यावहारिक ज्ञान पर जोर

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनीश यादव ने शुक्रवार को अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आधुनिक आणविक तकनीकों की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आती है, जब शोधकर्ता उनके व्यावहारिक पक्ष में भी दक्ष हों। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागी तकनीकी ज्ञान को अपने अनुसंधान कार्यों में इस्तेमाल करें।

डेयरी विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सुशीला मान ने भी इस अवसर पर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही उनका व्यावहारिक अनुप्रयोग भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रत्येक व्यावहारिक सत्र का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

विभाग अब तक कर चुका है 43 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

कार्यक्रम निदेशक एवं पशु जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अमन कुमार ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनका विभाग अब तक कुल 43 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुका है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 700 वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उन्होंने इन सभी को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने की बात कही।

डॉ. अमन कुमार ने इसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कौशल आधारित एवं व्यावहारिक शिक्षा के उद्देश्यों के बिल्कुल अनुरूप है।

इन प्रमुख तकनीकों का दिया जाएगा प्रशिक्षण

समन्वयक डॉ. कनिष्क बत्रा ने प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में व्याख्यान दिए जाएंगे। इसके अलावा तकनीकी प्रदर्शन और प्रयोगशाला आधारित अभ्यास भी कराए जाएंगे। इन सभी माध्यमों से प्रतिभागियों को आधारभूत से लेकर उन्नत तकनीकों की पूरी जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण में कई विशेष विषयों को शामिल किया गया है। इसमें जीन अभिव्यक्ति विश्लेषण, जैव सूचना विज्ञान, जीनोमिक्स, उच्च-थ्रूपुट विश्लेषण और पुनर्संयोजित प्रोटीन अभिव्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा प्राथमिक एवं कोशिका-रेखा संवर्धन जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में शामिल विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागी

इस 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 20 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। ये सभी प्रतिभागी देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से लुवास, जीएडीवीएएसयू लुधियाना, एचएयू, सीबीएलयू और संस्कारम विश्वविद्यालय शामिल हैं।

इन प्रतिभागियों में विभिन्न पदों के लोग अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं। इनमें वैज्ञानिक, सहायक प्राध्यापक, सूक्ष्मजीव विज्ञानी और रोग विज्ञानी शामिल हैं। इसके अलावा युवा वैज्ञानिक, अनुसंधान सहयोगी और शोधार्थी भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा हैं।

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