शहीद मदनलाल ढींगरा का बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा: जगदीश चोपड़ा

सिरसा में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा नेता और नागरिक परिषद के अध्यक्ष जगदीश चोपड़ा ने कहा कि शहीद मदनलाल ढींगरा का बलिदान देश कभी भुला नहीं सकता है। मात्र पच्चीस वर्ष की आयु में मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले मदनलाल ढींगरा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों में शामिल हैं।
सिरसा में शहीद मदन लाल ढींगरा चौक पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े गणमान्य नागरिक शामिल हुए। इन सभी गणमान्य नागरिकों ने शहीद मदनलाल ढींगरा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
मदनलाल ढींगरा का ऐतिहासिक योगदान
जगदीश चोपड़ा ने अपने संबोधन में बताया कि एक जुलाई 1909 को लंदन में मदनलाल ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं हटाए। उन्होंने अदालत में भी पूरी निर्भीकता के साथ भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में अपने विचार रखे थे। ब्रिटिश अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद सत्रह अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में मात्र पच्चीस वर्ष की आयु में उन्हें फांसी दे दी गई थी। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के क्रांतिकारियों के लिए बड़ी प्रेरणा बना।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं महान क्रांतिकारी
नागरिक परिषद के सचिव सुरेंद्र भाटिया ने इस अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शहीद मदनलाल ढींगरा ने अपनी युवावस्था में जिस साहस और दृढ़ता के साथ ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। यह समय की एक बड़ी मांग और आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के जीवन, उनके संघर्ष तथा उनके बलिदान से अच्छी तरह परिचित करवाया जाए। प्रदेश स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों के होने से आज के युवाओं को देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सच्ची प्रेरणा मिलेगी।