फरुखनगर के महाबल धाम में मनाया गया 22वां स्थापना दिवस, प्रदीप जी महाराज ने दी शिक्षा और संस्कृति की सीख

फरुखनगर के महाबल धाम में मनाया गया 22वां स्थापना दिवस, प्रदीप जी महाराज ने दी शिक्षा और संस्कृति की सीख

शिक्षा और संस्कृति, वैचारिक-बौद्धिक शुद्धता की चाबी- प्रदीप जी महाराज

सनातन संस्कृति और धर्म क्या, इसका ज्ञान दिया जाना की नितांत जरूरत

धर्म, सनातन, संस्कार और शिक्षा युवा वर्ग के लिए प्राथमिकता होना चाहिए

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गुरुवार को महाबल धाम मिर्ची की ढाणी कालियावास में स्थापना दिवस मनाया गया 

प्रदीप जी महाराज बोले गुरु श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ज्योति गिरी की असीम कृपा

फतह सिंह उजाला /फरुखनगर /27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

जय महाबल धाम मिर्ची की ढाणी कालियावास फरुखनगर में गुरुवार को 22 वां स्थापना दिवस सनातन संस्कृति और श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। यह आयोजन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ज्योति गिरी महाराज के परम शिष्य प्रदीप जी महाराज के सानिध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस मौके पर जय महाबल धाम परिसर में ही ब्लड डोनेशन कैंप का भी आयोजन किया गया। इस वार्षिक अनुष्ठान एवं धार्मिक आयोजन का आरंभ यहां प्राण प्रतिष्ठित देवी देवताओं के समक्ष सभी देवताओं का आह्वान करते हुए हवन यज्ञ में मंत्र उच्चारण के बीच आहुतियां अर्पित किए जाने के साथ हुआ। इस मौके पर पुण्य कमाने और धर्म लाभ अर्जित करने के लिए दूर दराज के क्षेत्र से बड़ी संख्या में भक्त एवं श्रद्धालु विशेष रूप से पहुंचे।

प्रदीप जी महाराज ने बताए जीवन में 27 अगस्त के महत्व

जय महाबल धाम के अधिष्ठाता एवं पीठाधीश्वर प्रदीप जी महाराज ने संस्थान और अपने जीवन में 27 अगस्त के महत्व को लेकर बेहद सारगर्भित बात कही। इस मौके पर कहा कि शिक्षा और संस्कृति ही वैचारिक शुद्धता की चाबी है। मौजूदा परिवेश में धर्म, संस्कृति, संस्कार, सनातन, वास्तव में क्या है ? इसका युवा वर्ग अथवा युवा पीढ़ी को ज्ञान बोध करवाया जाना अति आवश्यक है। धर्म, ज्ञान, सनातन, संस्कार, अभिभावकों और गुरुजनों का सम्मान सहित आज्ञा पालन की शिक्षा दिया जाना भी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बताया आज ही के दिन गुरु कृपा से आध्यात्मिक ज्ञान और मुझे मेरे ईष्ठ का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

सनातन संस्कृति और सामाजिक संरचना को बांधे रखने पर जोर

प्रदीप जी महाराज ने कहा भारतीय सनातन, संस्कृति, संस्कार और सामाजिक संरचना को बांधे रखने तथा बनाए रखने में मौजूदा समय में हमारे अपने प्रचार तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। वास्तव में संस्कार के माध्यम से माता-पिता, गुरु से शिक्षित और ज्ञानवान होना बताया गया है। इसी कड़ी में अध्यात्म हमारे को अपना जीवन सुधारने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान का बोध कराता है। उन्होंने युवा वर्ग और युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा जितना अधिक शुद्ध खानपान और विचारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जीवन में एक अलग ही प्रकार का अनुभव प्राप्त होता रहेगा। उन्होंने कहा नशा वही व्यक्ति करता है, जो की लाचार हो या फिर अज्ञानी हो। साधु, संत, महापुरुषों, विद्वानों का भी अनादि काल से यही प्रयास निरंतर चल आ रहा है कि समाज में किसी भी प्रकार के नशे का विस्तार होने से रोका जाए। इसी मौके पर यहां पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को भंडारा का प्रसाद वितरित किया गया।

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