संसद में मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा गूंजा है। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कुमारी शैलजा ने सोमवार को संसद में नियम 377 के तहत हरियाणा, विशेषकर सिरसा सहित प्रदेश के प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों के मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय सदन के पटल पर रखा।
हरियाणा की मंडियों में हजारों पंजीकृत मजदूर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली के अंतर्गत खरीदे जाने वाले खाद्यान्न की सफाई, ग्रेडिंग, लोडिंग और हैंडलिंग के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं।
बदलती खरीद और खाद्यान्न हैंडलिंग व्यवस्था में उनकी पारंपरिक भूमिका लगातार कम होती जा रही है, जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है।कुमारी शैलजा ने कहा कि मंडी मजदूर वर्षों से कृषि खरीद व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं।
व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव करते समय इन मजदूरों के रोजगार और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।ऐसी शिकायतें भी सामने आई हैं कि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रसंस्करण व्यवस्था के अभाव में सफाई और गुणवत्ता सुधार के नाम पर किसानों से कटौती की जा रही है।
केंद्र सरकार को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए जिसमें खाद्यान्न की सफाई और ग्रेडिंग पूरी तरह पारदर्शी, वैज्ञानिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।कुमारी शैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की कि पंजीकृत मंडी मजदूरों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनके लिए स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, पेंशन तथा जहां संभव हो ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का प्रावधान किया जाए।
प्रदेश की प्रमुख मंडियों में मजदूरों के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।कुमारी शैलजा ने मंडी मजदूरों के लिए एक व्यापक कल्याणकारी नीति तैयार करने की मांग करते हुए कहा कि खरीद व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ मजदूरों को रोजगार से वंचित करना नहीं होना चाहिए।
सरकार ऐसी संतुलित नीति बनाए जिससे किसान को उचित मूल्य मिले, मजदूर की आजीविका सुरक्षित रहे और उपभोक्ता तक गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पहुंचे।