गुरुग्राम: एमडीयू-सीपीएएस में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

गुरुग्राम: एमडीयू-सीपीएएस में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

गुरुग्राम में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के गुरुग्राम स्थित एमडीयू-सीपीएएस में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए एक अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बुधवार को नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना केवल एक नए पाठ्यक्रम की शुरुआत नहीं है। यह अपने सपनों को दिशा देने, क्षमताओं को पहचानने और भविष्य को आकार देने की यात्रा का पहला कदम है। आने वाले वर्ष विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान, अनुभव और व्यक्तित्व निर्माण के महत्वपूर्ण वर्ष होंगे। यह मुख्य बात महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के गुरुग्राम स्थित एमडीयू-सीपीएएस के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार अहलावत ने कही।

प्रो. प्रदीप कुमार अहलावत ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि इन वर्षों में वे सीखने की जिज्ञासा, निरंतर परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपना लें, तो वे कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वे न केवल अपने लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने नव प्रवेशित विद्यार्थियों को उनके नए शैक्षणिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश विद्यार्थियों के जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे यहां उपलब्ध अवसरों का किस प्रकार उपयोग करते हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. नसीम अहमद का संबोधन

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रो. नसीम अहमद ने विद्यार्थियों को जीवन के प्रति गंभीर और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पास अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अभी पर्याप्त समय है। लेकिन इस समय का उपयोग किस प्रकार किया जाता है, यही उनके भविष्य का निर्धारण करेगा। उन्होंने एक प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि आप अगले तीन-चार वर्ष आनंद में बिताकर शेष जीवन संघर्ष कर सकते हैं। अथवा आप अगले तीन-चार वर्षों में परिश्रम करके पूरे जीवन को बेहतर बना सकते हैं। प्रो. नसीम अहमद ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, अपने ज्ञान को अद्यतन रखने तथा तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया।

सक्रिय सीखने की संस्कृति और अन्य प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली की प्रो. कविता सोलंकी ने विद्यार्थियों को शिक्षा के पारंपरिक एवं निष्क्रिय दृष्टिकोण से आगे बढक़र सक्रिय सीखने की संस्कृति विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विधि कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अनुपम ने विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा और विकास से विद्यार्थियों को परिचित कराया। डॉ. संदीप अग्रवाल ने विश्वविद्यालय में कार्यरत विभिन्न समितियों की भूमिका एवं कार्यप्रणाली से विद्यार्थियों को अवगत कराया। बी.ए. एल.एल.बी. कार्यक्रम के विद्यार्थियों खुशी, मुस्कान, नक्ष एवं अंशिका ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. कविता दहिया, सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में पूर्व हरियाणा लोक सेवा आयोग सदस्य एवं विधि कार्यक्रम के विद्यार्थी डॉ. पवन धनवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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