न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ प्रदर्शन

Atal Hind Team Online29 August 202611 min read25 viewsअमेरिका
न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ प्रदर्शन

न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ प्रदर्शन, मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध, 61 संगठनों ने उठाए सवाल

मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर प्रदर्शन; Hindus for Human Rights, IAMC समेत कई संगठन विरोध में, RSS बोला-यह एकता और संवाद का कार्यक्रम

न्यूयॉर्क /29 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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न्यूयॉर्क, 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। शनिवार को भागवत के कार्यक्रम के दौरान मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया।

भागवत यहां “Universal Oneness Celebration” कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता, संवाद और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को सामने रखना है। कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

वहीं विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि RSS की विचारधारा और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े विवादों को देखते हुए भागवत को न्यूयॉर्क के इतने बड़े सार्वजनिक मंच पर बोलने का विरोध जरूरी है।

इस विवाद में खास बात यह है कि विरोध केवल मुस्लिम या नागरिक अधिकार संगठनों तक सीमित नहीं है। एक अमेरिकी हिंदू संगठन Hindus for Human Rights भी इसका प्रमुख विरोधी है। संगठन का कहना है कि RSS और उसकी Hindutva विचारधारा अमेरिका में रहने वाले सभी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

61 संगठनों ने किया विरोध

Hindus for Human Rights की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ के अनुसार 61 अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध में खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

संगठन ने अपने आधिकारिक कार्यक्रम में शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर “Hindus Say No to the RSS: Rally for a Secular, Interfaith India” नाम से प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन का समय दोपहर से शाम तक रखा गया था।

विश्वनाथ ने विरोध का संदेश देते हुए कहा कि “RSS और उसकी Hindutva विचारधारा हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करती।” यह बयान इस विवाद के सबसे महत्वपूर्ण बयानों में शामिल है।

विरोधी संगठनों का कहना है कि उनका विरोध हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वे RSS की राजनीतिक और वैचारिक भूमिका तथा भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े सवालों के कारण विरोध कर रहे हैं।

Hindus for Human Rights ने क्यों किया विरोध?

Hindus for Human Rights अमेरिका में सक्रिय हिंदू अधिकार और बहुलतावादी संगठन है। संगठन खुद को मानवाधिकार, नागरिक अधिकार और धार्मिक बहुलवाद के समर्थन से जोड़ता है।

संगठन ने भागवत के कार्यक्रम के विरोध को “धर्मनिरपेक्ष और अंतरधार्मिक भारत” के समर्थन से जोड़ा है।

उसका कहना है कि RSS को हिंदू समुदाय या हिंदू धर्म का पर्याय मानना ठीक नहीं है। संगठन के अनुसार अमेरिका में रहने वाले अनेक हिंदू RSS की विचारधारा से सहमत नहीं हैं।

इसी संदेश के साथ संगठन ने अपने समर्थकों और सहयोगी संगठनों को मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर जुटने का आह्वान किया था।

Indian American Muslim Council भी विरोध में

Indian American Muslim Council (IAMC) भी भागवत के कार्यक्रम के प्रमुख विरोधियों में शामिल है।

IAMC भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा एक अमेरिकी संगठन है। संगठन ने RSS की विचारधारा और भारत में मुसलमानों तथा अन्य अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से अपनी आपत्तियां जताई हैं।

न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से पहले IAMC और अन्य सहयोगी संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर विरोध और प्रेस कार्यक्रम आयोजित किया।

इन संगठनों ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन से कार्यक्रम रद्द करने की अपील भी की थी।

IAMC का मुख्य तर्क यह है कि RSS को केवल सांस्कृतिक संगठन के रूप में पेश करना पर्याप्त नहीं है। संगठन RSS की विचारधारा और भारत की राजनीति पर उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाता है।

हालांकि, RSS इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और स्वयं को हिंदू समाज के संगठन और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा संगठन बताता है।

Interfaith Center of New York की आपत्ति

विरोध में शामिल प्रमुख संगठनों में Interfaith Center of New York का भी नाम सामने आया है।

इस संगठन की भागीदारी से यह साफ होता है कि विरोध केवल किसी एक धार्मिक समुदाय की ओर से नहीं हो रहा था। विरोधी गठबंधन में अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकार समूह भी शामिल हैं।

इन संगठनों का कहना है कि न्यूयॉर्क जैसे बहुधार्मिक शहर में सार्वजनिक जीवन में सभी समुदायों के लिए समानता और धार्मिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है।

उनका आरोप है कि RSS की विचारधारा को लेकर भारत में अल्पसंख्यकों और बहुलतावाद से जुड़े गंभीर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए वे भागवत के कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति दर्ज कराना चाहते हैं।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी असहमत

इस विवाद को उस समय और राजनीतिक महत्व मिला जब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत के कार्यक्रम के प्रति सार्वजनिक रूप से असहमति जताई।

ममदानी ने RSS की विचारधारा को “exclusionary”, यानी बहिष्करणकारी, बताया। उन्होंने कहा कि जिस भारत की कल्पना वे करते हैं, वह धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी है।

हालांकि ममदानी ने यह भी संकेत दिया कि यह एक निजी कार्यक्रम है और न्यूयॉर्क शहर के पास इसे अपनी ओर से रद्द कराने का अधिकार नहीं हो सकता।

इस तरह मेयर की राजनीतिक असहमति और कार्यक्रम को कानूनी रूप से रोकने की क्षमता दो अलग बातें बनी रहीं।

USCIRF ने वीजा रद्द करने की मांग की

विवाद केवल न्यूयॉर्क तक सीमित नहीं रहा। U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF) से भी भागवत के खिलाफ कार्रवाई की मांग सामने आई।

USCIRF ने अमेरिकी प्रशासन से भागवत का वीजा रद्द करने और RSS से जुड़े लोगों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की अपील की।

आयोग ने अपनी चिंता भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर जताई है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि USCIRF की सिफारिश अमेरिकी सरकार का अंतिम आदेश नहीं होती। यह एक सलाहकारी आयोग है और अंतिम निर्णय अमेरिकी सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

Brad Lander ने भी विरोध जताया

न्यूयॉर्क के राजनीतिक नेता Brad Lander ने भी भागवत के कार्यक्रम को लेकर विरोध जताया।

उन्होंने सार्वजनिक बयान में RSS और भागवत की विचारधारा को लेकर कड़ी आपत्ति व्यक्त की और कहा कि न्यूयॉर्क में उनके लिए ऐसी विचारधारा की जगह नहीं होनी चाहिए जिसे वे नफरत और बहिष्कार से जोड़ते हैं।

उनका बयान विरोधी समूहों की व्यापक चिंता को दर्शाता है कि RSS के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से संगठन की वैश्विक छवि मजबूत हो सकती है।

विरोधी संगठनों का सबसे बड़ा आरोप

विरोध करने वाले संगठनों के आरोपों का केंद्र मुख्य रूप से तीन मुद्दे हैं।

पहला, वे RSS की हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा को भारत की धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत मानते हैं।

दूसरा, वे भारत में मुस्लिम, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यकों से जुड़े हिंसा तथा भेदभाव के आरोपों को RSS की वैचारिक भूमिका से जोड़ते हैं।

तीसरा, उनका कहना है कि “Universal Oneness” जैसे शब्दों के जरिए RSS की विवादित विचारधारा को अधिक स्वीकार्य और उदार रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।

इन सभी बातों को विरोधी संगठनों के आरोप के रूप में देखना जरूरी है। RSS इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता।

RSS और मोहन भागवत का पक्ष क्या है?

विरोध के बीच RSS और कार्यक्रम के आयोजकों ने अपने कार्यक्रम का अलग उद्देश्य बताया है।

कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD) की ओर से किया गया है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाना और भारतीय संस्कृति में मौजूद एकता तथा संवाद के विचार को सामने रखना है।

कार्यक्रम के प्रवक्ता ने लोगों से मतभेदों के बावजूद साथ आने की अपील की। आयोजकों का कहना है कि अलग विचार रखने वाले लोग भी एक-दूसरे से संवाद कर सकते हैं।

RSS का कहना है कि कार्यक्रम को नफरत या किसी समुदाय के खिलाफ अभियान के रूप में देखना गलत है।

मोहन भागवत ने क्या कहा?

मोहन भागवत ने अपने न्यूयॉर्क संबोधन में RSS के सेवा कार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संगठन के संपर्क का उदाहरण दिया।

उन्होंने विशेष रूप से एक विमान दुर्घटना के बाद RSS स्वयंसेवकों द्वारा किए गए राहत और सेवा कार्यों का उल्लेख किया।

भागवत ने कहा कि जब स्वयंसेवक लोगों की मदद करने पहुंचे तो उन्होंने यह नहीं देखा कि पीड़ित किस धर्म से हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वयंसेवकों ने यह नहीं सोचा कि प्रभावित लोग “मुसलमान हैं”

भागवत ने इस उदाहरण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि RSS की सेवा गतिविधियां धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करतीं।

यह बयान उस समय महत्वपूर्ण हो गया जब बाहर प्रदर्शन कर रहे संगठन RSS पर अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता के आरोप लगा रहे थे।

“Universal Oneness” पर भागवत का संदेश

न्यूयॉर्क कार्यक्रम का केंद्रीय विचार Universal Oneness, यानी सार्वभौमिक एकता, रखा गया है।

आयोजकों ने इसे भारतीय दर्शन की “वसुधैव कुटुम्बकम्” भावना से जोड़ा है। इसका सामान्य अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।

भागवत और कार्यक्रम के समर्थकों का कहना है कि भारत की सभ्यता में अलग-अलग मतों और समुदायों के साथ रहने की परंपरा रही है।

RSS के अनुसार इसी विचार को दुनिया के सामने रखने के लिए न्यूयॉर्क में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विरोधी संगठनों का कहना है कि केवल कार्यक्रम का नाम “Universal Oneness” रखने से RSS को लेकर उनकी वैचारिक आपत्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।

RSS प्रवक्ता ने क्या कहा?

RSS के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि यह अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच खुले संवाद और आपसी सम्मान का अवसर है।

RSS के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सभ्यता और उसके एकता संबंधी विचारों को सामने रखना है।

आयोजकों ने भी कहा कि समाज में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों के बावजूद एक साथ बैठकर संवाद किया जा सकता है।

RSS समर्थकों का यह भी कहना है कि संगठन को केवल राजनीतिक चश्मे से देखना उसके सामाजिक और सेवा कार्यों की अनदेखी होगी।

200 से ज्यादा हिंदू-अमेरिकी संगठनों का समर्थन

विरोध के साथ-साथ भागवत के कार्यक्रम को समर्थन भी मिला है।

Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम को 200 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठनों का समर्थन प्राप्त होने की बात कही गई है।

समर्थकों का कहना है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अपनी संस्कृति, धर्म और सभ्यतागत पहचान के बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने का अधिकार है।

इससे साफ है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बीच RSS को लेकर एकमत नहीं है।

एक तरफ कई संगठन RSS की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में हिंदू-अमेरिकी संगठन भागवत के कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं।

असली विवाद क्या है?

न्यूयॉर्क का यह विवाद केवल एक कार्यक्रम को लेकर नहीं है। इसके पीछे भारत की राजनीति, हिंदुत्व, धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकार और अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की राजनीतिक पहचान जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं।

RSS अपने आपको हिंदू समाज का सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन बताता है। आलोचक RSS को हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रमुख केंद्र मानते हैं।

इसी अंतर के कारण एक ही कार्यक्रम की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं।

समर्थकों के लिए यह भारतीय संस्कृति और विश्व एकता का कार्यक्रम है।

विरोधियों के लिए यह RSS की विचारधारा को अमेरिका में सार्वजनिक वैधता और अंतरराष्ट्रीय मंच देने का प्रयास है।

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के भीतर मौजूद वैचारिक मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है।

Hindus for Human Rights, Indian American Muslim Council और Interfaith Center of New York समेत कई संगठनों ने कार्यक्रम का विरोध किया। Hindus for Human Rights के अनुसार 61 अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने विरोधी खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

दूसरी ओर कार्यक्रम आयोजक और RSS इसे “Universal Oneness” यानी एकता, संवाद और भारतीय सांस्कृतिक विचारों का कार्यक्रम बता रहे हैं। कार्यक्रम को 200 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठनों के समर्थन की बात भी सामने आई है।

मोहन भागवत ने अपने भाषण में RSS के सेवा कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि जरूरतमंदों की मदद करते समय स्वयंसेवकों ने पीड़ितों का धर्म नहीं पूछा।

इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि विरोधी संगठनों के आरोपों को आरोप के रूप में और RSS/भागवत के जवाब को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

इसलिए खबर की भाषा में “RSS की हेट रैली” को निर्विवाद तथ्य की तरह लिखने के बजाय यह लिखना अधिक तथ्यपूर्ण होगा कि “विरोधी संगठनों ने RSS की विचारधारा को नफरत और बहिष्कार से जोड़ते हुए कार्यक्रम का विरोध किया, जबकि RSS और आयोजकों ने इसे एकता और संवाद का कार्यक्रम बताया।”

न्यूयॉर्क का यह विवाद अब एक कार्यक्रम से आगे बढ़कर भारत की विचारधारा और विदेशों में भारतीय मूल के लोगों की राजनीतिक पहचान पर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।

संगठन/व्यक्ति मुख्य आपत्ति
Hindus for Human Rights RSS/Hindutva को अपना प्रतिनिधि नहीं मानता
Indian American Muslim Council (IAMC) RSS की विचारधारा और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर आपत्ति
Interfaith Center of New York अंतरधार्मिक और बहुलतावादी मूल्यों की चिंता
61 संगठन खुले पत्र के जरिए कार्यक्रम का विरोध
Zohran Mamdani RSS विचारधारा को “exclusionary” बताया
USCIRF भागवत का वीजा रद्द करने/प्रतिबंधों पर विचार की सिफारिश
Brad Lander RSS/भागवत की विचारधारा पर कड़ा विरोध
RSS/AHEAD कार्यक्रम को एकता, संवाद और “वसुधैव कुटुम्बकम्” पर आधारित बताया
मोहन भागवत RSS की सेवा गतिविधियों का उदाहरण; कहा कि सेवा करते समय स्वयंसेवकों ने पीड़ितों का धर्म नहीं देखा
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