जेन-जी और युवाओं के प्रदर्शन पर मोहन भागवत के बयान के मायने, जानिए क्या कहा

समूचे हिंदुस्तान में जेन-जी का मुद्दा इस वक्त चर्चाओं में है। इसी मुद्दे पर मुंबई में 'इंटरनेशनल मॉडल यूनाइटेड नेशंस' कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी पहुंचे और युवा शक्तियों पर अपना मत खुलकर रखा। जेन-जी और जनरेशन अल्फा वर्ग में मोहन भागवत का यह बयान काफी सराहा जा रहा है। उनका यह बयान तब आया, जब युवाओं की मांगों को कुछ लोग नाजायज ठहरा रहे हैं। मोहन भागवत का बयान निश्चित रूप से भारत के युवाओं की शक्ति को संबल देगा।
युवाओं के विरोध-प्रदर्शन और परीक्षा गड़बड़ियों पर चिंता
गौरतलव है कि देश के युवा बीते कुछ समय से दाखिला और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर आक्रोशित हैं। उनकी उग्रता को पिछले दिनों जंतर-मंतर पर पूरे देश-दुनिया ने देखा। उग्रता में कुछ ऐसी अशोभनीय और अप्रिय घटनाएं भी घटी, जिसको लेकर युवाओं पर अनावश्यक सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल भी पुलिस-प्रशासन की ओर से किया गया। जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन झारखंड के रांची तक जा पहुंचा है और आसार ऐसे हैं कि तपिश और बढ़ेगी। छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पुलिस द्वारा बिलावजह लाठी भांजने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जताई।
आरएसएस प्रमुख का बयान और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जेन-जी और जेन अल्फा पीढ़ी को पुरानी पीढ़ियों से अधिक देशभक्त और ईमानदार बताना भी, निसंदेह हुकूमतों को आईना दिखाने जैसा है। यह सच है कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन आम सहमति तक पहुंचने का तरीका है और ऐसे में युवाओं को उनकी शिकायतों के लिए देश-विरोधी मानना सरासर गलत है। नीट पेपरलीक के खिलाफ देशभर में जारी प्रदर्शनों के बीच मोहन भागवत का युवाओं के साथ उनका संवाद इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि जेन-जी और जेन-अल्फा वर्ग सरकार से जुड़े लोगों की बातों से ज्यादा उनकी बातों पर इत्तेफाक कर रही है। भारत में आज शिक्षण संस्थानों की जो दुर्दशा है वह किसी से छिपी नहीं है और शिक्षा कमर्शियल बिजनेस में तब्दील हो चुकी है।