MOMS ने मनाया स्वतंत्रता दिवस, ‘आजादी—कल, आज और कल’ पर देशभर की माताओं ने साझा किए विचार

MOMS ने मनाया स्वतंत्रता दिवस, ‘आजादी—कल, आज और कल’ पर देशभर की माताओं ने साझा किए अपने विचार
आवाज, सुरक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और अपने फैसले लेने के अधिकार को माताओं ने बताया आजादी का हिस्सा
नरेंद्र जेठी /नरवाना /16 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर MOMS — Multitasking Outstanding Mothers Space की देशव्यापी मातृ समुदाय ने विशेष ऑनलाइन संवाद “आजादी — कल, आज और कल” का आयोजन किया। देश के विभिन्न शहरों से जुड़ी माताओं ने इसमें भाग लेकर अपने जीवन में आजादी के अर्थ और आने वाली पीढ़ी के लिए वे कैसी आजादी चाहती हैं, इस पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की मेजबानी MOMS की मूल रूप से नरवाना की संस्थापक रासेश्वरी हिंदुस्तानी ने की, जो ‘हिंदुस्तानी’ उपनाम को आधिकारिक रूप से अपनी पहचान के रूप में अपनाने वाली देश की पहली भारतीय के रूप में जानी जाती हैं। ऊर्जा परिवर्तन विशेषज्ञ और “वॉकिंग टॉकिंग मिरैकल” के नाम से पहचानी जाने वाली रासेश्वरी अपनी पहचान के माध्यम से जाति, पंथ और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर एक व्यापक भारतीय पहचान का संदेश देती हैं।
कार्यक्रम का मूल प्रश्न था, “आज के परिवेश को देखते हुए आपके लिए आजादी के क्या मायने हैं?” माताओं ने आजादी को अपनी आवाज, निर्णय लेने की स्वतंत्रता, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, सम्मान और बिना भय के स्वयं होने के अधिकार से जोड़ा। संवाद में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि आजादी केवल वह नहीं है जो हमें विरासत में मिली है, बल्कि वह भी है जो हम अगली पीढ़ी के लिए तैयार करते हैं।
कार्यक्रम में अंजू गुप्ता, सुचिता ठाकुर, अरुणा सिंह, नीति कनुंगो, प्रिया खोडापे, डॉ. भक्ति पिटाले, डॉ. कीर्ति, माया दासवानी, आर्चना चोपड़ा और डॉ. जैस्मिन मोसेस ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय को सुचारू रूप से संचालित करने में आयुषी घोष की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि अरुणा सिंह एवं रोली गुप्ता का विशेष सहयोग रहा
कार्यक्रम का संदेश रहा— “आजादी केवल मनाने की चीज नहीं, आने वाली पीढ़ी के लिए बनाने की जिम्मेदारी भी है। और इस दुनिया को बनाने के लिए माँ से बेहतर कौन हो सकता है?”