MWB ने सोशल मीडिया पेज संचालक को भेजा कानूनी नोटिस

मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (MWB) ने कैथल से संचालित एक फेसबुक पेज पर संस्था और उसके पदाधिकारियों से संबंधित कथित भ्रामक एवं गलत जानकारी प्रसारित किए जाने के मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्था के कानूनी प्रकोष्ठ की ओर से चंडीगढ़ और पानीपत से अलग-अलग कानूनी नोटिस जारी कर कैथल के सोशल मीडिया संचालक मनोज मलिक से कथित आपत्तिजनक सामग्री तत्काल हटाने तथा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया है।
चंडीगढ़/कैथल /27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन यानी एमडब्ल्यूबी ने हाल ही में एक सोशल मीडिया मामले में कानूनी कदम उठाया है। संस्था का आरोप है कि कैथल से संचालित एक फेसबुक पेज पर संस्था और उसके पदाधिकारियों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी डाली गई। इस सामग्री में पदाधिकारी की तस्वीर बिना अनुमति इस्तेमाल की गई थी।
संस्था के कानूनी प्रकोष्ठ ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। चंडीगढ़ और पानीपत से अलग-अलग कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस कैथल के सोशल मीडिया संचालक मनोज मलिक को भेजे गए हैं। नोटिस में कथित आपत्तिजनक सामग्री तुरंत हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया है।
एमडब्ल्यूबी उत्तर भारत के अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी ने इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री डाली गई जिससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खासकर बिना अनुमति तस्वीर लगाकर गलत जानकारी जोड़ना गंभीर बात है।
कानूनी नोटिस में साफ कहा गया है कि सामग्री को जल्द से जल्द हटाया जाए। साथ ही सार्वजनिक मंच पर माफी भी मांगी जाए। संस्था का रुख है कि अगर नोटिस मिलने के बाद भी सामग्री नहीं हटाई गई और सही स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो आगे सिविल और आपराधिक दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एमडब्ल्यूबी ने यह भी संकेत दिया है कि मानहानि के मामले में एक करोड़ रुपये तक की क्षतिपूर्ति का दावा दायर करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला उपलब्ध सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा। संस्था ने जोर देकर कहा कि वे तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ेंगे।
चंद्र शेखर धरणी ने स्पष्ट किया कि मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन एक पंजीकृत और स्वतंत्र संस्था है। यह अपने संगठनात्मक नियमों के अनुसार किसी भी जिले में जिला प्रधान या अन्य पदाधिकारी नियुक्त कर सकती है। इसके लिए किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति संस्था के अपने अधिकार क्षेत्र में आती है। इसलिए इस बारे में सोशल मीडिया पर गलत या अधूरी जानकारी फैलाना सही नहीं है। संस्था अपने आंतरिक फैसलों पर कायम है और इन्हें लेकर किसी तरह का भ्रम फैलाने का विरोध करती है।
एमडब्ल्यूबी का दावा है कि वह पत्रकारों के कल्याण और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए काम कर रही है। संस्था पत्रकारों को बिना कोई सदस्यता शुल्क लिए अपने साथ जोड़ने का प्रयास करती है। पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में सैकड़ों पत्रकारों को बीमा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
संस्था के अनुसार पत्रकारों के लिए 10-10 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा और टर्म इंश्योरेंस की व्यवस्था की गई है। साथ ही कैशलेस मेडिकल बीमा की सुविधा भी बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है। पिछले पांच वर्षों में हरियाणा के कई पत्रकारों को इन सुविधाओं का लाभ मिला है। उत्तर भारत में संस्था के करीब 1280 सदस्य बताए जाते हैं।
एमडब्ल्यूबी के कार्यक्रमों में कई बार वरिष्ठ राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरे शामिल हुए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के ऊर्जा और परिवहन मंत्री अनिल विज, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल जैसे नाम शामिल हैं। संस्था का कहना है कि इन कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी पत्रकार कल्याण के काम की स्वीकार्यता को दर्शाती है।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर संस्था ने जिम्मेदारी भरे रुख पर जोर दिया है। एमडब्ल्यूबी का मानना है कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का अच्छा माध्यम है, लेकिन किसी की तस्वीर बिना अनुमति लगाना, गलत जानकारी जोड़ना या किसी संस्था की छवि खराब करने वाली सामग्री डालना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच करके ही आगे बढ़ना चाहिए।
संस्था का सुझाव है कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन से कोई शिकायत हो तो पहले संबंधित पक्ष से बात करके सही जानकारी ली जाए। कानूनी रास्ते अपनाए जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर बिना जांच के आरोप लगाना उचित तरीका नहीं माना जा सकता। इससे गलतफहमी और विवाद बढ़ते हैं।
चंद्र शेखर धरणी ने कहा कि एमडब्ल्यूबी पत्रकारों के हितों और संस्था की गरिमा से जुड़े मामलों में समझौता नहीं करेगी। कानूनी नोटिस जारी हो चुका है। अगर संबंधित व्यक्ति सामग्री नहीं हटाता और सार्वजनिक माफी नहीं मांगता तो संस्था उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर आगे बढ़ेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था का मकसद किसी को परेशान करना नहीं है। उद्देश्य सिर्फ तथ्यहीन सामग्री, बिना अनुमति तस्वीरों के इस्तेमाल और कथित मानहानिकारक प्रचार के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करना है। संस्था स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लेती रहेगी और पत्रकारों के कल्याण के काम को जारी रखेगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सोशल मीडिया पर संस्थाओं और व्यक्तियों की छवि को लेकर विवाद अक्सर सामने आते रहते हैं। कई बार गलत जानकारी तेजी से फैल जाती है और बाद में सुधार करना मुश्किल हो जाता है। एमडब्ल्यूबी जैसे संगठन जो पत्रकारों के बीमा और कल्याण का काम करते हैं, उनकी छवि को लेकर संवेदनशीलता ज्यादा रहती है।
संस्था ने पहले भी कई मौकों पर पत्रकारों की मदद का दावा किया है। बीमा पॉलिसी वितरण, आर्थिक सहायता और कानूनी सलाह जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती रही है। कैथल जिले में भी संस्था की इकाई सक्रिय बताई जाती है और वहां पदाधिकारियों की नियुक्ति पहले भी हुई है।


कानूनी नोटिस में समय सीमा का जिक्र करते हुए सामग्री हटाने पर जोर दिया गया है। संस्था का रुख है कि नोटिस का जवाब सही तरीके से दिया जाए। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो अदालती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसमें सिविल मुकदमा और आपराधिक शिकायत दोनों विकल्प खुले हैं।
एमडब्ल्यूबी ने बार-बार कहा है कि वह तथ्यों पर आधारित कार्रवाई करेगी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अगला कदम तय होगा। संस्था का जोर इस बात पर है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो और गलत सूचनाओं से बचा जाए।
इस पूरे प्रकरण से एक बात साफ होती है कि डिजिटल माध्यमों पर सामग्री डालते समय सावधानी बरतनी चाहिए। तस्वीरों का इस्तेमाल, आरोप और जानकारी को लेकर कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखना जरूरी है। बिना अनुमति किसी की तस्वीर लगाना या गलत संदर्भ में पेश करना विवाद का कारण बन सकता है।
एमडब्ल्यूबी जैसी संस्थाएं पत्रकारों के बीच सक्रिय हैं और उनके कल्याण के दावे करती हैं। ऐसे में उनकी गतिविधियों को लेकर गलत सूचना फैलाने पर वे कानूनी रास्ता अपना रही हैं। आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, यह संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
संस्था ने साफ किया है कि वह पत्रकारों के हितों और अपनी गरिमा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाती रहेगी। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे बढ़ने का इरादा जताया गया है। फिलहाल नोटिस जारी हो चुका है और जवाब का इंतजार है।
यह मामला चंडीगढ़ और कैथल से जुड़ा हुआ है। नोटिस चंडीगढ़ और पानीपत से भेजे गए। संस्था उत्तर भारत स्तर पर काम करती है और कई राज्यों में अपनी इकाईयां बताती है। पत्रकारों को बिना शुल्क बीमा सुविधा देने का दावा उसका प्रमुख बिंदु रहा है।
समग्र रूप से देखें तो यह विवाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार की जरूरत को रेखांकित करता है। संस्था ने अपनी बात रखी है और कानूनी रास्ता चुना है। संबंधित फेसबुक पेज संचालक की तरफ से अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे की स्थिति नोटिस के जवाब पर निर्भर करेगी।