नारनौल में पुलिस ने पकड़ी फर्जी नंबर प्लेट लगी कार, चालक समेत दो लोगों पर मामला दर्ज

नारनौल सदर थाना पुलिस ने गहली चौक पर नाकाबंदी के दौरान एक फर्जी नंबर प्लेट लगी स्विफ्ट डिजायर कार पकड़ी है। जांच के दौरान कार की वास्तविक रजिस्ट्रेशन संख्या एचआर66सी-1634 पाई गई है। पुलिस ने कार चालक सुनील समेत दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की नाकाबंदी और मुखबिर की सूचना
शुक्रवार को पुलिस प्रवक्ता ने जानकारी दी कि गुरुवार रात सदर नारनौल थाना पुलिस की टीम गहली चौक पर नाकाबंदी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया कि नारनौल से गोद बलाहा की ओर सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार जा रही है। इस कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई है और इसे सुनील नाम का व्यक्ति चला रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी कर सभी आने-जाने वाले वाहनों की जांच शुरू कर दी।
वाहन की जांच और दस्तावेजों की मांग
कुछ देर बाद पुलिस को बताए गए हुलिए के अनुसार एक कार आती हुई दिखाई दी। पुलिस ने उस कार को रुकवाया और उसकी नंबर प्लेट की अच्छी तरह से जांच की। जांच के दौरान कार पर एचआर47जी-1307 नंबर लिखा हुआ अंकित मिला। इसके बाद पुलिस ने चालक से कार से संबंधित वैध दस्तावेज दिखाने की मांग की। लेकिन चालक पुलिस को कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
असली नंबर और इंजन-चेसिस की जांच
पुलिस ने जब मशीन की मदद से नंबर की जांच की तो पता चला कि यह नंबर रणवीर सिंह निवासी नांगल जमालपुर, जिला रेवाड़ी के नाम पर पंजीकृत है। इसके बाद पुलिस ने कार के इंजन नंबर और चेसिस नंबर की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि कार की वास्तविक रजिस्ट्रेशन संख्या एचआर66सी-1634 है। यह असली रजिस्ट्रेशन संख्या सुनील निवासी सरेली के नाम पर पंजीकृत पाई गई।
लोन और चालान से बचने के लिए बदली नंबर प्लेट
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी सुनील ने बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि कार का लोन बहुत अधिक होने के कारण वह समय पर किश्तें नहीं भर पा रहा था। उसे इस बात का डर था कि फाइनेंस कंपनी उसकी कार को जब्त कर लेगी। गाड़ी की फिटनेस नहीं होने के कारण चालान से बचने के लिए उसने कार की नंबर प्लेट बदलने की बात भी स्वीकार कर ली है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी सुनील और हरेंद्र के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।